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विहिप कार्यकर्ताओं पर दर्ज सड़क जाम और डीएफओ से अभद्रता का मुकदमा समाप्त

Tue, 05 Feb 2019 10:18 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 05 Feb 2019 10:18 PM IST
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विहिप कार्यकर्ताओं पर दर्ज सड़क जाम और डीएफओ से अभद्रता का मुकदमा समाप्त
कोटद्वार। राज्य सरकार ने विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं पर दर्ज दोनों मुकदमे वापस ले लिए हैं। सरकार के निर्णय पर यहां एसीजेएम कोर्ट ने भी मुहर लगाते हुए मुकदमा समाप्त कर दिया है। दोनों मामले वर्ष 2017 के जून अंतिम सप्ताह के हैं, जिसमें बदरीनाथ मार्ग पर स्थित लालपुल पर वन विभाग द्वारा एक मंदिर को तोड़ दिया गया था। वन विभाग की कार्रवाई से भड़के विहिप कार्यकर्ताओं ने तब तत्कालीन डीएफओ के आवास पर घुसकर अभद्रता और गाली गलौच की थी।
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सहायक अभियोजन अधिकारी यजुवेंद्र सिंह और एडवोकेट अमित सजवाण ने बताया कि 29 जून, 2017 को हिंदू संगठनों की ओर से लैंसडौन वन प्रभाग के लालपुल के पास पूर्व में बने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जा रहा था। दुगड्डा रेंज के अधिकारियों की सूचना पर इस मामले को आरक्षित वन क्षेत्र में हस्तक्षेप मानते हुए मंदिर को तुड़वा दिया गया। इसके बाद भड़के विहिप कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन डीएफओ मयंक शेखर झा के आवास पर घुसकर उनके साथ अभद्रता और गाली गलौच की। डीएफओ की ओर से इस मामले में राहुल अग्रवाल, संजय थपलियाल और संदीप डबराल समेत कई विहिप कार्यकर्ताओं के खिलाफ नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। 30 जून को मंदिर निर्माण को लेकर विहिप कार्यकर्ताओं ने लालपुल के पास राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया था। कोतवाली पुलिस ने इस मामले में भी पांच लोगों को नामजद करते हुए सड़क जाम का केस दर्ज कर दिया। पुलिस की ओर से दोनों मामलों की जांच कर आरोप पत्र एसीजेएम कोर्ट में दाखिल कर दिया था।
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हिंदू संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे को वापस लेने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ा तो सरकार ने न्याय एवं विधि मंत्रालय, गृह मंत्रालय के माध्यम से जिलाधिकारी गढ़वाल से रिपोर्ट तलब की। इसमें दोनों मामलों केे सार्वजनिक मंदिर निर्माण के विवाद पर आधारित बताया गया। कहा गया कि यदि इन वादों को वापस ले लिया गया तो समाज पर इसका कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। सरकार के निर्णय पर एसीजेएम कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को केस वापस लिए जाने की सहमति प्रदान कर दी है।
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