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खोह में मशीनों से हो रहे खनन के खिलाफ ग्रामीण लामबंद, आंदोलन की तैयारी
Updated Mon, 16 Apr 2018 11:08 PM IST
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कोटद्वार। खोह नदी के राजस्व क्षेत्र में सरकार द्वारा जारी खनन पट्टों की आड़ में चल रहे मशीनों से खनन के खिलाफ क्षेत्र के ग्रामीण लामबंद हो गए हैं। ग्रामीणों ने सोमवार को लालपानी में बैठक कर नदी के चैनलाइलेशन के नाम पर चल रहे पोकलैंड और जेसीबी के खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग शासन प्रशासन से की है। कहा कि एक साथ चल रही कई मशीनों से जहां आबादी के तटबंधों को खतरा बन गया है, वहीं आगामी बरसात में रेल पुल की तरह मोटर पुलों के भी ढहने का खतरा मंडराने लगा है।
सोमवार को ग्रामीणों ने खोह नदी में मशीनों से हो रहे खनन को रोकने और आंदोलन की रणनीति तैयार करने के लिए एक संघर्ष समिति का गठन किया है। ग्रामीणों ने कहा कि जीरो टॉलरेंस वाली सरकार अब खनन माफिया के हाथों में खेल रही है। जिला प्रशासन को खनन के मानक भी नहीं दिख रहे हैं। सत्ता की आड़ में ग्रामीणों को आपदा के मुंह में धकेला जा रहा है।
बैठक में ग्रामीण महानंद ध्यानी और अंजू पुंडीर ने कहा कि खोह नदी में बने पुल के पिल्लरों को भी खोद दिया गया है। पहली बार भारी भरकम पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से खननकारी भारी मात्रा में रेत, बजरी तथा पत्थरों की दूसरे प्रदेशों में सप्लाई कर रहे हैं। सिंचाई विभाग द्वारा पूर्व में बनाए गए तटबंध भी खोखले कर दिए गए हैं। बैठक में विजेश्वरी देवी झिंकवाण, कुसुम भंडारी, सिद्धि देवी, शोभा देवी, इंदू देवी, कुसुम नेगी, शंकेश्वर प्रसाद, प्रेम सिंह, दान सिंह, प्रकाश चंद्र, चंद्रमोहन, मदन सिंह व सतीश मलासी आदि मौजूद थे।
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सोमवार को ग्रामीणों ने खोह नदी में मशीनों से हो रहे खनन को रोकने और आंदोलन की रणनीति तैयार करने के लिए एक संघर्ष समिति का गठन किया है। ग्रामीणों ने कहा कि जीरो टॉलरेंस वाली सरकार अब खनन माफिया के हाथों में खेल रही है। जिला प्रशासन को खनन के मानक भी नहीं दिख रहे हैं। सत्ता की आड़ में ग्रामीणों को आपदा के मुंह में धकेला जा रहा है।
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बैठक में ग्रामीण महानंद ध्यानी और अंजू पुंडीर ने कहा कि खोह नदी में बने पुल के पिल्लरों को भी खोद दिया गया है। पहली बार भारी भरकम पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से खननकारी भारी मात्रा में रेत, बजरी तथा पत्थरों की दूसरे प्रदेशों में सप्लाई कर रहे हैं। सिंचाई विभाग द्वारा पूर्व में बनाए गए तटबंध भी खोखले कर दिए गए हैं। बैठक में विजेश्वरी देवी झिंकवाण, कुसुम भंडारी, सिद्धि देवी, शोभा देवी, इंदू देवी, कुसुम नेगी, शंकेश्वर प्रसाद, प्रेम सिंह, दान सिंह, प्रकाश चंद्र, चंद्रमोहन, मदन सिंह व सतीश मलासी आदि मौजूद थे।
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