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संस्कृति के बिना हमारे समाज का अस्तित्व नहीं: जंगली
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कोटद्वार/सतपुली। हिंदू नव संवत्सर के उपलक्ष्य में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में क्षेत्र की विभिन्न महिला मंगल दल और कीर्तन मंडलियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर समा बांधा। इस मौके पर आशु कला समिति के कलाकारों ने गढ़वाली लोक संस्कृति की छटा बिखेरी।
नव संवत्सर अभिनंदन समारोह समिति के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम का बतौर मुख्य अतिथि प्रसिद्ध पर्यावरणविद् जगत सिंह चौधरी जंगली और समाजसेवी अभिलाषा भारद्वाज ने शुभारंभ किया। इस अवसर पर पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति और प्रकृति एक दूसरे की पर्याय हैं। इसके बिना हमारे समाज का कोई अस्तित्व नहीं है।
रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत श्रीगणेश वंदना से की गई। इसके बाद वैष्णवी कीर्तन मंडली धनीश फार्म सहित क्षेत्र की 40 कीर्तन मंडलियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कोटद्वार की आशुकला समिति की ओर से गढ़वाली लोक संस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियां दी गईं। गायिका सुमित्रा रावत और गायक योगेश गडोई के गीत औ ए डांडा औ ए...,धार मां उरख्याली ब्वे..,चला फूल्यारों फूल लौला.., खैई जाला बल केला हो..गीत पर रंगकर्मियों ने आकर्षक प्रस्तुति दी। सुमित्रा रावत के पौराणिक लोक गीत दरजी दिदा मेकू तू अंगड़ी बणें दे.. गीत ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शशि नैनवाल, रश्मि राणा, गीता बुड़ाकोटी, चंद्रपाल नेेगी, डा. जितेंद्र नेगी, पंकज ध्यानी, डा. पदमेश बुड़ाकोटी आदि मौजूद थे।
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उधर, सतपुली में नगर पंचायत सतपुली में होली की होल्यार टीम के तत्वावधान में हिंदू नववर्ष के उपलक्ष्य में भजन संध्या का आयोजन किया गया। मां भगवती और राधाकृष्ण कीर्तन मंडली ने लोकगीत और भजन कीर्तन गाकर हिंदू नववर्ष मनाया। इस मौके पर अध्यक्ष बसंती रावत, नंदा देवी, जयश्री देवी, शारदा देवी, शुकमा देवी, गोदा देवी, हिमाली देवी, मनीष खुगशाल, प्रेम सिंह रावत, जैकी भाई, डब्बल मियां, देवेंद्र चौहान, हरीश जैरवान आदि लोग उपस्थित रहे।
-फोटो
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नव संवत्सर अभिनंदन समारोह समिति के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम का बतौर मुख्य अतिथि प्रसिद्ध पर्यावरणविद् जगत सिंह चौधरी जंगली और समाजसेवी अभिलाषा भारद्वाज ने शुभारंभ किया। इस अवसर पर पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति और प्रकृति एक दूसरे की पर्याय हैं। इसके बिना हमारे समाज का कोई अस्तित्व नहीं है।
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रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत श्रीगणेश वंदना से की गई। इसके बाद वैष्णवी कीर्तन मंडली धनीश फार्म सहित क्षेत्र की 40 कीर्तन मंडलियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कोटद्वार की आशुकला समिति की ओर से गढ़वाली लोक संस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियां दी गईं। गायिका सुमित्रा रावत और गायक योगेश गडोई के गीत औ ए डांडा औ ए...,धार मां उरख्याली ब्वे..,चला फूल्यारों फूल लौला.., खैई जाला बल केला हो..गीत पर रंगकर्मियों ने आकर्षक प्रस्तुति दी। सुमित्रा रावत के पौराणिक लोक गीत दरजी दिदा मेकू तू अंगड़ी बणें दे.. गीत ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शशि नैनवाल, रश्मि राणा, गीता बुड़ाकोटी, चंद्रपाल नेेगी, डा. जितेंद्र नेगी, पंकज ध्यानी, डा. पदमेश बुड़ाकोटी आदि मौजूद थे।
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उधर, सतपुली में नगर पंचायत सतपुली में होली की होल्यार टीम के तत्वावधान में हिंदू नववर्ष के उपलक्ष्य में भजन संध्या का आयोजन किया गया। मां भगवती और राधाकृष्ण कीर्तन मंडली ने लोकगीत और भजन कीर्तन गाकर हिंदू नववर्ष मनाया। इस मौके पर अध्यक्ष बसंती रावत, नंदा देवी, जयश्री देवी, शारदा देवी, शुकमा देवी, गोदा देवी, हिमाली देवी, मनीष खुगशाल, प्रेम सिंह रावत, जैकी भाई, डब्बल मियां, देवेंद्र चौहान, हरीश जैरवान आदि लोग उपस्थित रहे।
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