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होटल से कम नहीं अस्पताल, चिकित्सा सेवाएं बेहाल
Updated Fri, 09 Feb 2018 10:37 PM IST
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कोटद्वार। पौड़ी जिले के सबसे बड़े चंद्रमोहन सिंह नेगी राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार में चिकित्सा सुविधाएं बदहाल हैं। अस्पताल की बिल्डिंग किसी पांच सितारा होटल से कम नहीं है। अस्पताल अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से भी लैस है, लेकिन आज तक न्यूरो सर्जन और विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलावा मशीनों को संचालित करने के लिए कुशल टेक्नीशियनों की तैनाती नहीं हो सकी है। फिजिशियन भी एक ही हैं। इसके चलते मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। न्यूरो सर्जन नहीं होने से दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल देहरादून पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ देते हैं।
कोटद्वार राजकीय चिकित्सालय का करीब दो साल पहले जीर्णोंद्वार हुआ है। अस्पताल की भव्य बिल्डिंग से यकायक नजर नहीं हटती है। अस्पताल में सीटी स्कैन से लेकर तमाम आधुनिक सुविधाएं हैं। अस्पताल में सबसे ज्यादा न्यूरो सर्जन और फिजिशियन की आवश्यकता है। पौड़ी जिले में सड़क और अन्य दुर्घटनाओं से घायलों को कोटद्वार रेफर किया जाता है। सिर में गंभीर चोट होने पर उनका इलाज नहीं हो पाता है। तीमारदार घायलों को देहरादून ले जाते हैं। इससे अक्सर कई मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं।
अस्पताल में प्रतिदिन करीब सात सौ ओपीडी के पर्चे बनते हैं। इनमें 250 से अधिक पर्चे अकेले फिजिशियन से संबंधित होते हैं। एकमात्र फिजिशियन डा. जीसी ध्यानी की तैनाती होने से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल में फार्मेसिस्टों की भी कमी है।
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ट्रामा सेंटर बन गया सफेद हाथी
अस्पताल में ट्रामा सेंटर बना है। ट्रामा सेंटर में ओटी और आधुनिक मशीनें लगी हैं। सेंटर शुरू नहीं होने के कारण अस्पताल प्रशासन ट्रामा सेंटर की ओटी को सामान्य सर्जरी के लिए इस्तेमाल करता है।
कोट
पूरे प्रदेश में न्यूरो सर्जन का संकट है। श्रीनगर मेडिकल कालेज, हल्द्वानी और देहरादून सरकारी अस्पताल में ही न्यूरो सर्जन हैं। सिर की गंभीर चोट के घायलों को दून और ऋषिकेश एम्स रेफर किया जाता है। एक फिजिशियन का पद खाली है। जल्द ही उसमें भी तैनाती हो जाएगी। -आरएस राणा, सीएमओ, राजकीय चिकित्सालय कोटद्वार
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कोटद्वार राजकीय चिकित्सालय का करीब दो साल पहले जीर्णोंद्वार हुआ है। अस्पताल की भव्य बिल्डिंग से यकायक नजर नहीं हटती है। अस्पताल में सीटी स्कैन से लेकर तमाम आधुनिक सुविधाएं हैं। अस्पताल में सबसे ज्यादा न्यूरो सर्जन और फिजिशियन की आवश्यकता है। पौड़ी जिले में सड़क और अन्य दुर्घटनाओं से घायलों को कोटद्वार रेफर किया जाता है। सिर में गंभीर चोट होने पर उनका इलाज नहीं हो पाता है। तीमारदार घायलों को देहरादून ले जाते हैं। इससे अक्सर कई मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं।
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अस्पताल में प्रतिदिन करीब सात सौ ओपीडी के पर्चे बनते हैं। इनमें 250 से अधिक पर्चे अकेले फिजिशियन से संबंधित होते हैं। एकमात्र फिजिशियन डा. जीसी ध्यानी की तैनाती होने से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल में फार्मेसिस्टों की भी कमी है।
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ट्रामा सेंटर बन गया सफेद हाथी
अस्पताल में ट्रामा सेंटर बना है। ट्रामा सेंटर में ओटी और आधुनिक मशीनें लगी हैं। सेंटर शुरू नहीं होने के कारण अस्पताल प्रशासन ट्रामा सेंटर की ओटी को सामान्य सर्जरी के लिए इस्तेमाल करता है।
कोट
पूरे प्रदेश में न्यूरो सर्जन का संकट है। श्रीनगर मेडिकल कालेज, हल्द्वानी और देहरादून सरकारी अस्पताल में ही न्यूरो सर्जन हैं। सिर की गंभीर चोट के घायलों को दून और ऋषिकेश एम्स रेफर किया जाता है। एक फिजिशियन का पद खाली है। जल्द ही उसमें भी तैनाती हो जाएगी। -आरएस राणा, सीएमओ, राजकीय चिकित्सालय कोटद्वार