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उत्तराखंडः आपदा में भी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
गंगा असनोड़ा थपलियाल
Updated Mon, 01 Jul 2013 06:42 PM IST
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आपदा राहत कार्य को पूरी तरह सेना द्वारा संभाल लेने के बावजूद राज्य सरकार पहाड़ी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को आपदा के समय में भी दुरूस्त करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। यहां तक कि कई आपदा प्रभावितों को भी इलाज के लिए यहां-वहां भटकना पड़ा।
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उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बदहाल स्वास्थ्य सेवा के लिए सरकार अक्सर डॉक्टरों का पहाड़ी क्षेत्रों पर जाने से इंकार बताती रही हैं। राज्य पर आई इस आपदा के समय में भी फौरी तौर पर बाढ़ प्रभावितों को राहत देने के लिए भी स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर नहीं लाया जा सका।
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डाक्टरों ने जताई थी इच्छा
ऐसा नहीं है कि डाक्टरों का टोटा है, बल्कि आपदा को देखते हुए देश भर से डॉक्टर तथा कई स्वयं सेवी संस्थाएं जरूरतमंदों को इलाज देने के लिए पहुंचना चाहती थी। राज्य सरकार द्वारा डॉक्टरों व स्वयं सेवी संस्थाओं से तालमेल न बिठा पाने के कारण व्यवस्था पर भी डॉक्टर विभिन्न अस्पतालों में नहीं पहुंच पाए।
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19 जून को केदारनाथ से फाटा स्थित अस्पताल लाए गए उज्जैन मध्य प्रदेश के मंगू सिंह को कोई इलाज नहीं मिल पाया। यहां से उसे गुप्तकाशी भेजा गया, जहां रात हो जाने तथा रास्ते खुले न होने के कारण उसे एक रात रूकना भी पड़ा।
दूसरे दिन रेफर किए जाने पर उसे वहां से बेस रूद्रप्रयाग स्थित जिला अस्पताल या श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल पहुंचाने वाला कोई नहीं था। अपनी जेब से 400 रूपए खर्च कर मध्य प्रदेश के ही दूसरे एक घायल को लेकर वह बेस अस्पताल पहुंचा। 20 जून को भर्ती हुआ और अंत में बेहतर इलाज दिलाने के लिए परिजन उसे मध्य प्रदेश ले गए।
सोनभद्र उत्तर प्रदेश निवासी भगवती देव पांडे 12 दिनों तक बदरीनाथ में फंसे रहे। परेशान भगवती पांडे को ब्रेन हेम्बरेज हुआ। जोशीमठ स्थित अस्पताल में उन्हें कोई इलाज नहीं मिल पाया, तो चमोली के जिला अस्पताल में रेफर किया गया।
वहां से भी उन्हें तुरंत ही श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। यदि आपदा राहत को देखते हुए जोशीमठ में कुछ समय के लिए ही सही विशेषज्ञों तथा जरूरी जांचां की सुविधा कर दी जाती, तो रोगियों को बेवजह अन्य अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
36 रोगियों ने ही करवाया इलाज
गढ़वाल के सबसे बड़े अस्पताल बेस अस्पताल में इतनी बड़ी आपदा के बावजूद मात्र 36 प्रभावितों ने ही इलाज लिया। जिसमें से दूसरे प्रदेशों के छह घायलों ने अपनी मर्जी से डिस्चार्ज लिया तथा सात घायलों को हायर सेंटर रेफर किया गया।
एक घायल की मृत्यु हो गई। जबकि 8 घायलों का इलाज वर्तमान में चल रहा है। मेडिसिन विभाग में भर्ती एक साधु बीते 10 दिनों से भर्ती है, जो अर्धचेतन अवस्था में है।