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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Kanwar Yatra 2022: Four and a half crore Kanwariya came to Haridwar in 13 days but sampling only 1907

Kanwar Yatra 2022: 13 दिन में हरिद्वार आए पौने चार करोड़ कांवड़िए, सैंपलिंग हुई मात्र 1907

Wed, 27 Jul 2022 04:12 PM IST
देहरादून ब्यूरो निशांत खनी, अमर उजाला, हरिद्वार
निशांत खनी, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Wed, 27 Jul 2022 04:12 PM IST
सार

दो साल बाद शुरू हुए मेले में तीन करोड़ 79 लाख 70 हजार कांवड़ियों ने हरिद्वार पहुंचकर गंगा स्नान किया और वे कांवड़ जल भरकर अपने गंतव्यों को रवाना हुए।

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Kanwar Yatra 2022: Four and a half crore Kanwariya came to Haridwar in 13 days but sampling only 1907
हरिद्वार में कांवड़ियों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

कांवड़ मेला तो सकुशल संपन्न हो गया, लेकिन धर्मनगरी में कोरोना प्रसार का खतरा एक बार फिर डराने लगा है। इसकी वजह कांवड़ मेले में उमड़ी तीन करोड़ 79 लाख 70 हजार लोगों की भीड़ है। कांवड़ मेले में कुंभ की तरह कई राज्यों से पहुंचे लोग गंगा स्नान कर वापस लौटे हैं। इस अवधि में उत्तराखंड ही नहीं, देशभर में कोरोना के नए मामले भी तेजी से बढ़े हैं लेकिन हरिद्वार में सैंपलिंग बंद रही है। कांवड़ अवधि के 13 दिनों में मात्र 1907 कोरोना आशंकितों के सैंपल लिए गए। वायरल फीवर और डायरिया के बढ़ते मामलों ने कोरोना संक्रमण के खतरे को और अधिक प्रबल बना दिया है। 

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14 जुलाई से कांवड़ मेला शुरू हुआ। 26 जुलाई को मेले का समापन हो गया। हरिद्वार में पूरे साल श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। औसतन प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख लोग वाया हरिद्वार होकर आवाजाही करते हैं। हरिद्वार पहुंचने पर गंगा स्नान भी करते हैं। पर्व स्नानों पर संख्या बढ़कर सात से 10 लाख तक पहुंच जाती है लेकिन इस बार कांवड़ मेले में एतिहासिक भीड़ उमड़ी। दो साल बाद शुरू हुए मेले में तीन करोड़ 79 लाख 70 हजार कांवड़ियों ने हरिद्वार पहुंचकर गंगा स्नान किया और वे कांवड़ जल भरकर अपने गंतव्यों को रवाना हुए। कांवड़ियों की संख्या का दावा पुलिस ने किया है। 
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जुलाई पहले सप्ताह से देशभर में कोविड के नए मामलों में तेजी आने लगी। इसकी बड़ी वजह मौसमी बदलाव से वायरल फीवर और डायरिया की चपेट में आने से इम्युनिटी सिस्टम का कमजोर होना रहा है। कमजोर इम्युनिटी होने से बच्चों से लेकर बड़े आसानी से कोरोना की चपेट में आने लगे। उत्तराखंड में भी कोरोना के मामलों में तेजी देखी गई है। प्रदेश सरकार को महीनों बाद 25 जुलाई को कोविड से बचाव के लिए एसओजी जारी करनी पड़ी है। मेला अवधि में हरिद्वार में कोविड आशंकितों की जांचें गिनती की हुईं। पुलिस-प्रशासन के अलावा स्वास्थ्य महकमा कांवड़ मेला ड्यूटी में लगा रहा। कांवड़ रूट पर अस्थायी अस्पतालों में बीमार कांवड़ियों का प्राथमिक उपचार हुआ। 

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सैंपलिंग नहीं होने से नए मरीज नहीं मिल सके

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो 13 जुलाई तक जिले में कोविड जांचों की कुल संख्या 2624745 थी। 26 जुलाई को यह संख्या 2626652 पहुंची। यानी 13 दिनों में मात्र 1907 सैंपल हुए। औसतन प्रतिदिन 146 लोगों का सैंपल हुआ, जबकि कांवड़ से पूर्व सामान्य दिनों में हरिद्वार में 130 से 150 सैंपल रोजाना होते थे। कांवड़ शुरू होने से पहले हरिद्वार में एक्टिव केस सात थे, जो मेले के समापन पर 11 हैं। सैंपलिंग नहीं होने से नए मरीज नहीं मिल सके हैं। 

हरिद्वार में अधिकतर परिवारों में लोग सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और पेट खराब होने की समस्या से पीड़ित हैं। सामान्य वायरल के अलावा कोरोना के भी अधिकतर ऐसे ही लक्षण होते हैं। ऐसे में लोग परेशान हो रहे हैं लेकिन अस्पतालों में कोविड जांच की सुविधा बेहद सीमित है। स्थानीय लोगों में दहशत भी बनी है। कुंभ में स्थानीय लोग कोरोना का कहर झेल चुके हैं। लोग चाहकर भी अपनी कोविड जांच नहीं करवा पा रहे हैं। सरकार की नई एसओपी के बाद अब 28 जुलाई से सभी सरकारी अस्पतालों में कोविड टेस्टिंग करने और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। 

मेला अस्पताल में जो भी मरीज कोविड टेस्ट करवाने स्वयं आ रहा था, उसकी जांच की जा रही है। कांवड़ मेले के दौरान अलग से कोई कोविड जांच की डेस्क नहीं बनाई गई थी।
- डॉ. राजेश गुप्ता, सीएमएस मेला अस्पताल 

चिकित्सा स्टाफ कांवड़ मेला ड्यूटी पर था। मेला अवधि में अस्पताल में कोई भी कोविड टेस्ट नहीं किया गया है। 28 जुलाई से चिकित्सक से परामर्श के बाद मरीज कोविड टेस्ट करा पाएंगे।
- डॉ. चंदन राम मिश्रा, वरिष्ठ नेत्र सर्जन जिला अस्पताल 

कांवड़ मेला खत्म हो गया। अब मेला, जिला अस्पताल और सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर कोविड की जांच की जाएगी। कर्मचारियों की कमी के चलते फिलहाल बॉर्डर चेक पोस्टों पर जांच केंद्र नहीं खोले जाएंगे। सरकार की एसओपी का पालन कराया जाएगा।
- डॉ. खगेंद्र कुमार, सीएमओ हरिद्वार 

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