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धू धू कर जली बुराई की प्रतिक होलिका
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होलिका का पूजन करती महिलाएं ।
- फोटो : HARIDWAR
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होली के गीतों और डीजे की धुन पर रात को लोगों ने बुराई की प्रतिक होलिका का दहन किया और एक दूसरे को रंग लगाकर जमकर होली खेली। शहर से लेकर देहात तक सभी होली के रंगों और गीतों में रंगे दिखे। आधी रात तक कई मोहल्लों में नाच गाना होता रहा। इससे पहले महिलाओं ने होलिका का पूजन किया और सुख समृद्धि की कामना की।
वहीं लोगों ने अपने देव पितरों के स्थानों पर जाकर भी पूजा अर्चना की। होली की रात पुलिस भी चौंकने रही।
शहर के विभिन्न मोहल्लों और चौराहों पर होलिका स्थल भव्य रूप से सजाए गए थे। परंपरा के अनुसार सनातन धर्म को मानने वाली महिलाओं ने नए अनाज और पुष्प चढ़ाने के बाद होली की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की। नववधुओं ने होली का पूजन कर बड़ों का आशीर्वाद लिया। घरों में प्रसाद वितरण किया गया। होली पर सजी-धजी सुहागिनों ने भी होलिका स्थल पर पहुंचकर विभिन्न पकवानों, पुष्पों और अन्य पूजन सामग्री से पूजा-अर्चना की। सबसे ज्यादा महिलाओं की भीड़ कनखल के होली मोहल्ले में स्थित होलिका स्थल पर रही। महिलाओं के पूजन में किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए पुलिस ने चौक बाजार से दक्ष मंदिर की तरफ जाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध रखा। शाम के समय विद्वान पंड़ितों ने होलिका दहन के अवसर पर मंत्रोच्चार किया। इसके बाद होलिका दहन हुआ। वहीं, लोगों ने गेहूं की बाल को होलिका दहन में भूूना कर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।
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वहीं लोगों ने अपने देव पितरों के स्थानों पर जाकर भी पूजा अर्चना की। होली की रात पुलिस भी चौंकने रही।
शहर के विभिन्न मोहल्लों और चौराहों पर होलिका स्थल भव्य रूप से सजाए गए थे। परंपरा के अनुसार सनातन धर्म को मानने वाली महिलाओं ने नए अनाज और पुष्प चढ़ाने के बाद होली की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की। नववधुओं ने होली का पूजन कर बड़ों का आशीर्वाद लिया। घरों में प्रसाद वितरण किया गया। होली पर सजी-धजी सुहागिनों ने भी होलिका स्थल पर पहुंचकर विभिन्न पकवानों, पुष्पों और अन्य पूजन सामग्री से पूजा-अर्चना की। सबसे ज्यादा महिलाओं की भीड़ कनखल के होली मोहल्ले में स्थित होलिका स्थल पर रही। महिलाओं के पूजन में किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए पुलिस ने चौक बाजार से दक्ष मंदिर की तरफ जाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध रखा। शाम के समय विद्वान पंड़ितों ने होलिका दहन के अवसर पर मंत्रोच्चार किया। इसके बाद होलिका दहन हुआ। वहीं, लोगों ने गेहूं की बाल को होलिका दहन में भूूना कर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।
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