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हरीश रावत बोले, जब संइया कोतवाल तो डर कांहे का
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शिवरात्रि पर मंदिरों में रोक के बावजूद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर भगत और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के पूजा अर्चना करने का मामला गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब सइंया कोतवाल तो डर काहे का। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले में खुद सामने आकर सफाई देनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा अध्यक्ष और शहरी विकास मंत्री पर प्रतिबंध के बावजूद मंदिर जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जनता जनार्दन पर भगवान शिव की पूजा करने पर तो रोक लगाई गई थी। शायद सत्ता में भाजपाई भूल गए हैं कि इसी जनता ने उन्हें चुनकर भेजा है। दुर्भाग्य की बात यह है कि सरकार के नियमों को उनके नुुमाइंदे तोड़कर गलत उदाहरण पेश कर रहे हैं। सत्ताधारियों को तो नियमों का सख्ती से पालन कर आम लोगों के लिए मिशाल बननी चाहिए, मगर यहां उल्टी गंगा बह रही है। सत्ताधारी ही सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इस मामले में सरकार के मुखिया और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सफाई देनी चाहिए कि प्रतिबंध के बावजूद उन्हें मंदिर में जाने की इजाजत कैसे दी गई। पूर्व सीएम ने कहा कि कोरोना संक्रमण रोकने में नाकाम प्रदेश सरकार लगातार नए प्रयोग कर जनता को दिक्कत में डाल रही है।
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा अध्यक्ष और शहरी विकास मंत्री पर प्रतिबंध के बावजूद मंदिर जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जनता जनार्दन पर भगवान शिव की पूजा करने पर तो रोक लगाई गई थी। शायद सत्ता में भाजपाई भूल गए हैं कि इसी जनता ने उन्हें चुनकर भेजा है। दुर्भाग्य की बात यह है कि सरकार के नियमों को उनके नुुमाइंदे तोड़कर गलत उदाहरण पेश कर रहे हैं। सत्ताधारियों को तो नियमों का सख्ती से पालन कर आम लोगों के लिए मिशाल बननी चाहिए, मगर यहां उल्टी गंगा बह रही है। सत्ताधारी ही सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इस मामले में सरकार के मुखिया और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सफाई देनी चाहिए कि प्रतिबंध के बावजूद उन्हें मंदिर में जाने की इजाजत कैसे दी गई। पूर्व सीएम ने कहा कि कोरोना संक्रमण रोकने में नाकाम प्रदेश सरकार लगातार नए प्रयोग कर जनता को दिक्कत में डाल रही है।
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