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चार शिक्षकों की सेवाएं समाप्त
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Thu, 26 Nov 2015 07:50 PM IST
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हरिद्वार। शिक्षा विभाग ने चार-चार वर्ष से बिना सूचना के गैरहाजिर चल रहे तीन शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी है। वहीं फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर 23 वर्षों से नौकरी कर रहे एक शिक्षक की भी सेवा समाप्त कर उसके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पीली पड़ाव विकास खंड बहादराबाद के प्रधानाध्यापक हरपाल सिंह यादव बिना किसी सूचना एक अप्रैल वर्ष 2011 से लगातार गैरहाजिर चल रहे थे। कई बार उनको नोटिस देकर विद्यालय में उपस्थिति दर्ज करने के लिए कहा गया। लेकिन वह फिर भी हाजिर नहीं हुए। दैनिक समाचार पत्र में विज्ञापन देकर उन्हें अंतिम सुनवाई का मौका दिया गया। सुनवाई के दौरान उनकी दलीलों में कोई दम नहीं पाया गया। जिसके चलते विभाग ने माना कि छात्र हित और जनहित के लिए अब विभाग को उनकी सेवा की जरूरत नहीं रह गई। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक की ओर से उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
दूसरा मामला राजकीय प्राथमिक विद्यालय बोडाहेडी का है। जिसके सहायक अध्यापक संजय गौड़ बिना कोई सूचना दिए 19 सितंबर 2012 से लगातार अनुपस्थित हैं। विभाग ने उनको कई नोटिस भेेजे। दैनिक समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशित कर अंतिम मौका दिया गया। लेकिन वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। जिसके चलते उत्तराखंड सरकारी सेवक नियमावली 2003 और 2010 में उल्लिखित प्रावधानों का हवाला देते हुए उनकी सेवा तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी। सुपर्णा घोष राजकीय प्राथमिक विद्यालय नसीरपुर कला में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थी। वह 10 जनवरी 2011 से लगातार विद्यालय से नदारद थी और विभाग को कोई सूचना भी नहीं दी गई थी। जिससे उनकी सेवा समाप्त कर दी गई है।
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इनसेट
यह फर्जी प्रमाणपत्रों वाला शिक्षक
बिजेंद्र कुमार की नियुक्ति 21 जनवरी 1992 को राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यूणा ब्लॉक लमगडा जिला अल्मोड़ा में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी। अक्तूबर 2001 में उनका तबादला राजकीय प्राथमिक विद्यालय बहादरपुर जट बहादराबाद में हो गया। उनके फर्जी प्रमाणपत्रों की शिकायत के संबंध में विभाग ने बीटीसी की मार्कशीट और सर्टिफिकेट का सत्यापन सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी उत्तर प्रदेश इलाहाबाद से कराया गया। न तो वह अनुक्रमांक और न प्रमाणपत्र उक्त संस्था की ओर से जारी होना नहीं पाया गया। जिसके चलते उनकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई।
इनसेट
कई जांच के घेरे में
हरिद्वार। बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा में अब भी कई शिक्षक ऐसे हैं जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक की नौकरी कर रहे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो 15 से अधिक ऐसे शिक्षक हैं जो प्रदेश छोड़कर यूपी में रिलीव हो चुके हैं। इससे पहले भी कई ऐसे शिक्षक नौकरी छोड़ चुके हैं, जिनके प्रमाण पत्र फर्जी थे।
कोट
उक्त शिक्षकों की ओर से कई बार नोटिस और समाचार पत्र में विज्ञापन देने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया। जिसके चलते उनकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। कागजी कार्रवाई कर सेवा समाप्ति की सूचना महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड, निदेशक, अपर निदेशक और समस्त संबंधित अधिकारियों को भेजते हुए उक्त शिक्षकों को भी भेजी गई है।
रामेंद्र कुशवाहा, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक।
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राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पीली पड़ाव विकास खंड बहादराबाद के प्रधानाध्यापक हरपाल सिंह यादव बिना किसी सूचना एक अप्रैल वर्ष 2011 से लगातार गैरहाजिर चल रहे थे। कई बार उनको नोटिस देकर विद्यालय में उपस्थिति दर्ज करने के लिए कहा गया। लेकिन वह फिर भी हाजिर नहीं हुए। दैनिक समाचार पत्र में विज्ञापन देकर उन्हें अंतिम सुनवाई का मौका दिया गया। सुनवाई के दौरान उनकी दलीलों में कोई दम नहीं पाया गया। जिसके चलते विभाग ने माना कि छात्र हित और जनहित के लिए अब विभाग को उनकी सेवा की जरूरत नहीं रह गई। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक की ओर से उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
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दूसरा मामला राजकीय प्राथमिक विद्यालय बोडाहेडी का है। जिसके सहायक अध्यापक संजय गौड़ बिना कोई सूचना दिए 19 सितंबर 2012 से लगातार अनुपस्थित हैं। विभाग ने उनको कई नोटिस भेेजे। दैनिक समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशित कर अंतिम मौका दिया गया। लेकिन वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। जिसके चलते उत्तराखंड सरकारी सेवक नियमावली 2003 और 2010 में उल्लिखित प्रावधानों का हवाला देते हुए उनकी सेवा तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी। सुपर्णा घोष राजकीय प्राथमिक विद्यालय नसीरपुर कला में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थी। वह 10 जनवरी 2011 से लगातार विद्यालय से नदारद थी और विभाग को कोई सूचना भी नहीं दी गई थी। जिससे उनकी सेवा समाप्त कर दी गई है।
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यह फर्जी प्रमाणपत्रों वाला शिक्षक
बिजेंद्र कुमार की नियुक्ति 21 जनवरी 1992 को राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यूणा ब्लॉक लमगडा जिला अल्मोड़ा में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी। अक्तूबर 2001 में उनका तबादला राजकीय प्राथमिक विद्यालय बहादरपुर जट बहादराबाद में हो गया। उनके फर्जी प्रमाणपत्रों की शिकायत के संबंध में विभाग ने बीटीसी की मार्कशीट और सर्टिफिकेट का सत्यापन सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी उत्तर प्रदेश इलाहाबाद से कराया गया। न तो वह अनुक्रमांक और न प्रमाणपत्र उक्त संस्था की ओर से जारी होना नहीं पाया गया। जिसके चलते उनकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई।
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कई जांच के घेरे में
हरिद्वार। बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा में अब भी कई शिक्षक ऐसे हैं जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक की नौकरी कर रहे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो 15 से अधिक ऐसे शिक्षक हैं जो प्रदेश छोड़कर यूपी में रिलीव हो चुके हैं। इससे पहले भी कई ऐसे शिक्षक नौकरी छोड़ चुके हैं, जिनके प्रमाण पत्र फर्जी थे।
कोट
उक्त शिक्षकों की ओर से कई बार नोटिस और समाचार पत्र में विज्ञापन देने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया। जिसके चलते उनकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। कागजी कार्रवाई कर सेवा समाप्ति की सूचना महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड, निदेशक, अपर निदेशक और समस्त संबंधित अधिकारियों को भेजते हुए उक्त शिक्षकों को भी भेजी गई है।
रामेंद्र कुशवाहा, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक।