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डीएम ने कंप्यूटर घोटाले की जांच को टीम गठित की
Updated Sun, 25 Feb 2018 11:36 PM IST
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हरिद्वार।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने नगर पालिका (नगर निगम) में हुए कंप्यूटर घोटाले की जांच के लिए नगर मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। उन्होंने नगर आयुक्त को गायब 11 कंप्यूटरों की धनराशि की वसूली कार्यरत रहे कर्मचारियों करने की कार्रवाई करने को लिखा है।
जिलाधिकारी ने कंप्यूटर घोटाले की जांच के लिए समिति का गठन राज्य सूचना आयुुक्त राजेंद्र कोटियाल द्वारा पारित आदेश 12 जनवरी के अनुपालन में की है। जिलाधिकारी ने अपने आदेश में कहा है कि इस प्रकरण में नगर मजिस्ट्रेट से प्राप्त आख्या के आधार पर नगर पालिका (नगर निगम) में 15 मई 2005 के उपरांत स्टोर कीपर के पद पर कार्यरत रहे कार्मिकों से 11 कंप्यूटरों की धनराशि की वसूली की जाए। शेष गायब कंप्यूटरों की जांच कार्रवाई के लिए एसएनए, जिला सूचना विज्ञान केंद्र अधिकारी तथा एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की संयुक्त जांच कमेटी गठित की जाए, जिनके द्वारा नगर निगम को प्राप्त 41 कंप्यूटरों की जांच की जाएगी। कंप्यूटर घोटाले को सूचना आयोग में ले जाने वाले रमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि नगर मजिस्ट्रेट की जांच आख्या पर डीएम द्वारा जांच कमेटी गठित नहीं करने पर मामला आयोग में ले जाना पड़ा। राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल ने इसको गंभीरता से लिया और जिलाधिकारी दीपक रावत को लोक प्राधिकारी नामित करते हुए जांच टीम का गठन कर 28 फरवरी जांच कार्रवाई आयोग पर प्रस्तुत करने का आदेश पारित किया था। नगर मजिस्ट्रेट ने 11 कंप्यूटरों के गायब होने की कीमत स्टोर कीपरों से वसूलने के साथ ही स्टोर में मिले 17 कंप्यूटरों के खोखों की तकनीकी तथा बैच नंबर जांच कराने के लिए जांच कराने की संस्तुति जिलाधिकारी से की थी, किंतु जिलाधिकारी को जांच कमेटी का गठन नहीं किया जा रहा था इसलिए सूचना आयोग को उन्हें लोक प्राधिकारी नामित करने का आदेश पारित करना पड़ा है। गौरतलब है कि शासन से प्राप्त 41 कंप्यूटरों में 28 कंप्यूटरों को ठिकानें लगाया जा चुका है, जिनका नगर निगम के स्टोर रजिस्टर में रिकार्ड भी नहीं मिला है।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने नगर पालिका (नगर निगम) में हुए कंप्यूटर घोटाले की जांच के लिए नगर मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। उन्होंने नगर आयुक्त को गायब 11 कंप्यूटरों की धनराशि की वसूली कार्यरत रहे कर्मचारियों करने की कार्रवाई करने को लिखा है।
जिलाधिकारी ने कंप्यूटर घोटाले की जांच के लिए समिति का गठन राज्य सूचना आयुुक्त राजेंद्र कोटियाल द्वारा पारित आदेश 12 जनवरी के अनुपालन में की है। जिलाधिकारी ने अपने आदेश में कहा है कि इस प्रकरण में नगर मजिस्ट्रेट से प्राप्त आख्या के आधार पर नगर पालिका (नगर निगम) में 15 मई 2005 के उपरांत स्टोर कीपर के पद पर कार्यरत रहे कार्मिकों से 11 कंप्यूटरों की धनराशि की वसूली की जाए। शेष गायब कंप्यूटरों की जांच कार्रवाई के लिए एसएनए, जिला सूचना विज्ञान केंद्र अधिकारी तथा एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की संयुक्त जांच कमेटी गठित की जाए, जिनके द्वारा नगर निगम को प्राप्त 41 कंप्यूटरों की जांच की जाएगी। कंप्यूटर घोटाले को सूचना आयोग में ले जाने वाले रमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि नगर मजिस्ट्रेट की जांच आख्या पर डीएम द्वारा जांच कमेटी गठित नहीं करने पर मामला आयोग में ले जाना पड़ा। राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल ने इसको गंभीरता से लिया और जिलाधिकारी दीपक रावत को लोक प्राधिकारी नामित करते हुए जांच टीम का गठन कर 28 फरवरी जांच कार्रवाई आयोग पर प्रस्तुत करने का आदेश पारित किया था। नगर मजिस्ट्रेट ने 11 कंप्यूटरों के गायब होने की कीमत स्टोर कीपरों से वसूलने के साथ ही स्टोर में मिले 17 कंप्यूटरों के खोखों की तकनीकी तथा बैच नंबर जांच कराने के लिए जांच कराने की संस्तुति जिलाधिकारी से की थी, किंतु जिलाधिकारी को जांच कमेटी का गठन नहीं किया जा रहा था इसलिए सूचना आयोग को उन्हें लोक प्राधिकारी नामित करने का आदेश पारित करना पड़ा है। गौरतलब है कि शासन से प्राप्त 41 कंप्यूटरों में 28 कंप्यूटरों को ठिकानें लगाया जा चुका है, जिनका नगर निगम के स्टोर रजिस्टर में रिकार्ड भी नहीं मिला है।
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