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अखाड़ा परिषद के चुनाव कराने में जुटा एक धड़ा
Updated Tue, 03 Apr 2018 11:00 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
बैरागियों के एक धड़े का मानना है कि अखाड़ा परिषद के चुनाव प्रयाग में होने वाले अर्द्धकुंभ में ही हो जाने चाहिए। जबकि चुनाव अगले हरिद्वार कुंभ में होना है।
दशकों पुरानी अखाड़ा परिषद का कोई संविधान नहीं है। प्रथा यह रही है कि जब कहीं कुंभ होता है, तब कुंभ नगर में परिषद का नया चुनाव करा लिया जाता है। परिषद का पिछला चुनाव 2016 के उज्जैन कुंभ में हुआ था। इस हिसाब से यह चुनाव 2021 के हरिद्वार कुंभ में होना है। चूंकि उज्जैन में तत्कालीन अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदास के बने रहने को लेकर संतों में काफी बवाल हुआ था। तब ज्ञानदास कुंभ छोड़कर अयोध्या लौट गए थे। ज्ञानदास तीन बैैरागी अणियों के भी सर्वमान्य संत हैं। कुछ बैरागी तभी से नाराज चल रहे हैं, यद्यपि सभी 13 अखाड़ों ने सर्वसम्मति से श्रीमहंत नरेंद्र गिरि को अध्यक्ष चुन लिया था। नरेंद्र गिरि के नेतृत्व में अखाड़ा परिषद ने फर्जी संतों के खिलाफ मुहिम चलाई, जिसका स्वागत देश के सभी क्षेत्रों में हुआ। संतों का एक खेमा यह कह रहा है कि प्रयाग का अर्द्धकुंभ भी कुंभ ही होता है। इसलिए परिषद का चुनाव प्रयाग में हो जाना चाहिए। कुछ संतों के इस मत से अखाड़े सहमत नहीं हैं। अखाड़ा सूत्रों के अनुसार चुनाव की मांग अवश्य की जाएगी। इस संबंध में जब अयोध्या में रहने वाले अखाडा परिषद के पूर्व अध्यक्ष एवं देश के प्रमुख वैरागी संत श्रीमहंत ज्ञानदास से वार्ता का प्रयास किया गया, तो उनसे वार्ता नहीं हो पाई।
अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि के अनुसार ऐसा कोई प्रयास कहीं नहीं हो रहा। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि का चुनाव विधि सम्मत है। उनके नेतृत्व में ही प्रयाग अर्द्धकुंभ और हरिद्वार कुंभ संपन्न होंगे।
हरिद्वार।
बैरागियों के एक धड़े का मानना है कि अखाड़ा परिषद के चुनाव प्रयाग में होने वाले अर्द्धकुंभ में ही हो जाने चाहिए। जबकि चुनाव अगले हरिद्वार कुंभ में होना है।
दशकों पुरानी अखाड़ा परिषद का कोई संविधान नहीं है। प्रथा यह रही है कि जब कहीं कुंभ होता है, तब कुंभ नगर में परिषद का नया चुनाव करा लिया जाता है। परिषद का पिछला चुनाव 2016 के उज्जैन कुंभ में हुआ था। इस हिसाब से यह चुनाव 2021 के हरिद्वार कुंभ में होना है। चूंकि उज्जैन में तत्कालीन अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदास के बने रहने को लेकर संतों में काफी बवाल हुआ था। तब ज्ञानदास कुंभ छोड़कर अयोध्या लौट गए थे। ज्ञानदास तीन बैैरागी अणियों के भी सर्वमान्य संत हैं। कुछ बैरागी तभी से नाराज चल रहे हैं, यद्यपि सभी 13 अखाड़ों ने सर्वसम्मति से श्रीमहंत नरेंद्र गिरि को अध्यक्ष चुन लिया था। नरेंद्र गिरि के नेतृत्व में अखाड़ा परिषद ने फर्जी संतों के खिलाफ मुहिम चलाई, जिसका स्वागत देश के सभी क्षेत्रों में हुआ। संतों का एक खेमा यह कह रहा है कि प्रयाग का अर्द्धकुंभ भी कुंभ ही होता है। इसलिए परिषद का चुनाव प्रयाग में हो जाना चाहिए। कुछ संतों के इस मत से अखाड़े सहमत नहीं हैं। अखाड़ा सूत्रों के अनुसार चुनाव की मांग अवश्य की जाएगी। इस संबंध में जब अयोध्या में रहने वाले अखाडा परिषद के पूर्व अध्यक्ष एवं देश के प्रमुख वैरागी संत श्रीमहंत ज्ञानदास से वार्ता का प्रयास किया गया, तो उनसे वार्ता नहीं हो पाई।
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अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि के अनुसार ऐसा कोई प्रयास कहीं नहीं हो रहा। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि का चुनाव विधि सम्मत है। उनके नेतृत्व में ही प्रयाग अर्द्धकुंभ और हरिद्वार कुंभ संपन्न होंगे।
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