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जिला पंचायत: 17 करोड़ लैप्स होंगे और नया बजट भी नहीं मिलेगा
Updated Tue, 20 Mar 2018 11:12 PM IST
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हरिद्वार।
जिला पंचायत की राजनीति विकास गाड़ी को आगे बढ़ाने में रोड़ा बन गई है। हाईकोर्ट की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष का निलंबन खत्म करने के बाद भी उनके वित्तिय अधिकारों पर रोक लगाई हुई। शासन ने किसी और को वित्तिय अधिकार नहीं दिए। ऐसे में 17 करोड़ का बजट 31 मार्च को लैप्स हो जाएगा और अप्रैल महीने का बजट भी जिला पंचायत को नहीं मिल सकेगा। क्योंकि जब पिछले बजट का उपभोग प्रमाणपत्र विभाग को जारी नहीं होगा तो नया भी बजट जारी नहीं हो सकेगा।
पिछले साल पांच दिसंबर में राज्य सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी के अधिकार सीज करते हुए तीन सदस्यीय संचालन समिति बना दी थी। इसके बाद समिति में आपसी विवाद के चलते हुए जिला पंचायत का कोई बजट संबंधी कोई काम नहीं हो सका। यहां तक की पुराने कार्यों के बजट भी जारी नहीं हो सके। ठेकेदार मिले कार्य को पूरा करने के बावजूद आवंटित बजट को प्राप्त करने के लिए चक्कर काटते रहे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी। अब 12 मार्च को हाईकोर्ट ने अध्यक्ष सविता चौधरी के अधिकार बहाल कर दिए हैं, लेकिन वित्तीय अधिकार सीज होने के चलते हुए अध्यक्ष कोई बजट के संबंध में निर्णय नहीं ले सकतीं। ऐसे में जिला पंचायत को जिला योजना से जारी हुए 7.80 करोड़ रुपये के भुगतान न होने से बजट पर कुहासा लगने के आसार बने हुए हैं। हालांकि इस बजट के संबंध में कार्य होने का दावा अधिकारी कर रहे हैं। इसी के साथ राज्य वित्त से जारी बजट 9.50 करोड़ रुपये के भी काम नहीं हो सके हैं। ऐसे में यदि 31 मार्च तक अध्यक्ष सविता चौधरी के वित्तीय अधिकार बहाल नहीं होते हैं या फिर किसी अधिकारी को जिला पंचायत के वित्तीय अधिकार नहीं मिलते हैं तो करीब 17 करोड़ रुपये के भारी भरकम बजट लैप्स हो जाएगा। इसी के साथ ही यदि मार्च के अंतिम सप्ताह तक इस बजट का उपभोग प्रमाण पत्र नहीं मिलता है तो अगले वित्तीय वर्षअप्रैल महीने में नया बजट नहीं मिल सकेगा। इसी के साथ नये टेंडर तो क्या कर वसूली के लिए भी कोई योजना न बनने से भी आगामी कार्य भी नहीं हो सकेंगे। वहीं साढ़े तीन महीने में कोई भी विकास कार्य नहीं हो सका है। ऐसे में जिला पंचायत सदस्य परेशान है।
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गांवों से लेकर कस्बों तक ठप पड़े हैंडपंप
पिछले सालों में जिला पंचायत के माध्यम से लगाए गए हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। बजट जारी न होने से इस साल हैंडपंपों की मरम्मत भी नहीं हो सकी है। ऐसे में गर्मी के मौसम में लोगों को पानी नहीं मिलने पर परेशानी का सामना करना पड़ेगा। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 500 से अधिक हैंडपंपों की मरम्मत होनी है।
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स्टाफ को नहीं मिला वेतन
जिला पंचायत में संचालन समिति में सामंजस्य न होने से स्टाफ को दिसंबर और जनवरी महीने की तनख्वाह भी देरी से मिली। अब संचालन समिति की ओर से 12 मार्च तक चेक पर हस्ताक्षर न किए जाने से फरवरी महीने की तनख्वाह जारी नहीं हो सकी। अब हाईकोर्ट की ओर से 12 मार्च को ही संचालन समिति को समाप्त कर दिए जाने से अधिकार बहाल अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार न होने से स्टाफ की तनख्वाह जारी नहीं हो सकी।
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वित्तीय वर्ष 2017-18 के जारी हुए मार्च महीने के बजट को खर्च करने का उपभोग प्रमाण पत्र जारी न होने से नए वित्तीय वर्ष का अप्रैल महीने में बजट जारी न हो सकेगा। वहीं अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार न होने से स्टाफ को फरवरी महीने की तनख्वाह तक जारी नहीं हो सकी है।
- आरकेएन त्रिपाठी, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत।
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जिला पंचायत की राजनीति विकास गाड़ी को आगे बढ़ाने में रोड़ा बन गई है। हाईकोर्ट की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष का निलंबन खत्म करने के बाद भी उनके वित्तिय अधिकारों पर रोक लगाई हुई। शासन ने किसी और को वित्तिय अधिकार नहीं दिए। ऐसे में 17 करोड़ का बजट 31 मार्च को लैप्स हो जाएगा और अप्रैल महीने का बजट भी जिला पंचायत को नहीं मिल सकेगा। क्योंकि जब पिछले बजट का उपभोग प्रमाणपत्र विभाग को जारी नहीं होगा तो नया भी बजट जारी नहीं हो सकेगा।
पिछले साल पांच दिसंबर में राज्य सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी के अधिकार सीज करते हुए तीन सदस्यीय संचालन समिति बना दी थी। इसके बाद समिति में आपसी विवाद के चलते हुए जिला पंचायत का कोई बजट संबंधी कोई काम नहीं हो सका। यहां तक की पुराने कार्यों के बजट भी जारी नहीं हो सके। ठेकेदार मिले कार्य को पूरा करने के बावजूद आवंटित बजट को प्राप्त करने के लिए चक्कर काटते रहे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी। अब 12 मार्च को हाईकोर्ट ने अध्यक्ष सविता चौधरी के अधिकार बहाल कर दिए हैं, लेकिन वित्तीय अधिकार सीज होने के चलते हुए अध्यक्ष कोई बजट के संबंध में निर्णय नहीं ले सकतीं। ऐसे में जिला पंचायत को जिला योजना से जारी हुए 7.80 करोड़ रुपये के भुगतान न होने से बजट पर कुहासा लगने के आसार बने हुए हैं। हालांकि इस बजट के संबंध में कार्य होने का दावा अधिकारी कर रहे हैं। इसी के साथ राज्य वित्त से जारी बजट 9.50 करोड़ रुपये के भी काम नहीं हो सके हैं। ऐसे में यदि 31 मार्च तक अध्यक्ष सविता चौधरी के वित्तीय अधिकार बहाल नहीं होते हैं या फिर किसी अधिकारी को जिला पंचायत के वित्तीय अधिकार नहीं मिलते हैं तो करीब 17 करोड़ रुपये के भारी भरकम बजट लैप्स हो जाएगा। इसी के साथ ही यदि मार्च के अंतिम सप्ताह तक इस बजट का उपभोग प्रमाण पत्र नहीं मिलता है तो अगले वित्तीय वर्षअप्रैल महीने में नया बजट नहीं मिल सकेगा। इसी के साथ नये टेंडर तो क्या कर वसूली के लिए भी कोई योजना न बनने से भी आगामी कार्य भी नहीं हो सकेंगे। वहीं साढ़े तीन महीने में कोई भी विकास कार्य नहीं हो सका है। ऐसे में जिला पंचायत सदस्य परेशान है।
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गांवों से लेकर कस्बों तक ठप पड़े हैंडपंप
पिछले सालों में जिला पंचायत के माध्यम से लगाए गए हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। बजट जारी न होने से इस साल हैंडपंपों की मरम्मत भी नहीं हो सकी है। ऐसे में गर्मी के मौसम में लोगों को पानी नहीं मिलने पर परेशानी का सामना करना पड़ेगा। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 500 से अधिक हैंडपंपों की मरम्मत होनी है।
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स्टाफ को नहीं मिला वेतन
जिला पंचायत में संचालन समिति में सामंजस्य न होने से स्टाफ को दिसंबर और जनवरी महीने की तनख्वाह भी देरी से मिली। अब संचालन समिति की ओर से 12 मार्च तक चेक पर हस्ताक्षर न किए जाने से फरवरी महीने की तनख्वाह जारी नहीं हो सकी। अब हाईकोर्ट की ओर से 12 मार्च को ही संचालन समिति को समाप्त कर दिए जाने से अधिकार बहाल अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार न होने से स्टाफ की तनख्वाह जारी नहीं हो सकी।
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वित्तीय वर्ष 2017-18 के जारी हुए मार्च महीने के बजट को खर्च करने का उपभोग प्रमाण पत्र जारी न होने से नए वित्तीय वर्ष का अप्रैल महीने में बजट जारी न हो सकेगा। वहीं अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार न होने से स्टाफ को फरवरी महीने की तनख्वाह तक जारी नहीं हो सकी है।
- आरकेएन त्रिपाठी, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत।