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यूएस नगर से शुरू होगी नशे के खिलाफ लड़ाई

Tue, 03 May 2016 01:43 PM IST
चंदन बंगारी/ अमर उजाला, काशीपुर
चंदन बंगारी/ अमर उजाला, काशीपुर Updated Tue, 03 May 2016 01:43 PM IST
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fight against drug addiction in udham singh nagar
नशे की लत - फोटो : डेमो फोटो

गुजरात में नशे के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की ओर से चल रहे हेल्दी कैंपस अभियान की सफलता के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चलाने की योजना है। इसी क्रम में उत्तराखंड के यूएस नगर से अभियान की शुरुआत की जा रही है। जिला अस्पताल की ओएसटी काउंसलर को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। अभियान को स्कूल-कॉलेजों तक पहुंचाने के लिए टीमें गठित की जा रही हैं।

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दरअसल, गुजरात नारकोटिक्स ब्यूरो के जोनल डायरेक्टर हरिओम गांधी ने तीन साल पहले अभियान शुरू किया। जिसके तहत स्कूल, कॉलेजों में जाकर बच्चों को तंबाकू, नशीली दवा, इंजेक्शन, ड्रग्स से होने वाले नुकसानों की जानकारी देने के साथ ही उनके बीच पोस्टर, पेंटिंग, मैराथन, फिल्म मैकिंग, स्पोर्ट्स प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं। यह अभियान गुजरात में बहुत ज्यादा सफल रहा है। आईआईएम अहमदाबाद, आईआईटी गांधीनगर, अहमदाबाद यूनिवर्सिटी, सीईपीटी यूनिवर्सिटी, गुजरात यूनिवर्सिटी के अलावा करीब 100 स्कूल कॉलेजों में यह अभियान चल रहा है।
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अभियान की शुरुआत करने वाले जोनल डायरेटर गांधी कहते हैं कि यूथ में नशे का चलन बेहद तेजी से बढ़ रहा है। एक बार अगर छात्र या युवा नशे के दलदल में फंस गया तो उसका बाहर निकलना बेहद कठिन हो जाता है। हम अभियान के जरिए कोशिश करते हैं कि बच्चे नशे के दुष्प्रभावों को जानकर उसकी तरफ ही न जाएं। अभियान के गुजरात में सफल होने के बाद उसे राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों में काम कर रहे लोगों से संपर्क साधा जा रहा है।
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उत्तराखंड के यूएस नगर में तैनात मनोवैज्ञानिक और ओएटी काउंसर श्वेता दीक्षित को जिम्मेदारी दी गई है। वे वहां शिक्षक, पुलिस प्रशासन, सामाजिक और नशे के खिलाफ काम करने वालों के साथ मिलकर टीम बनाकर स्कूल-कॉलेजों में जागरुकता अभियान चलाएंगी। उम्मीद ही नहीं विश्वास है कि उत्तराखंड में भी गुजरात की तरह इसका रिजल्ट बेहद सकारात्मक होगा।

जिला अस्पताल में ओपीओयड सब्स्टीट्यूशन थैरेपी यानि ओएसटी काउंसलर श्वेता दीक्षित कहती है कि जिले में नशे का प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है। 15 से 30 साल उम्र के छात्र, युवा नशे के आदी होकर जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। उन्हें हेल्दी कैंपस अभियान का कोर्डिनेटर बनाया गया है। अभियान शुरू करने से पहले वह टीम तैयार कर रही हैं। नए सत्र से स्कूलों में अभियान के तहत विभिन्न सेमिनार, मैराथन, पोस्टर, पेंटिंग प्रतियोगिता जैसे आयोजन कराए जाएंगे, ताकि बच्चे नशे से दूर रहें। हेल्दी कैंपस अभियान को दिल्ली नारकोटिक्स ब्यूरो ने भी बेहतर मॉडल माना है।

गुजरात नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल डायरेक्टर हरिओम गांधी कहते हैं कि हेल्दी कैंपस का फेसबुक पेज, व्हाट्सअप ग्रुप और हेल्दी कैंपस डॉट ओआरजी नाम से वेबसाइट भी बनाई गई है। अभियान का टारगेट है कि बच्चों को गलत रास्ते पर जाने से रोका जाए। हम चाहते हैं कि बच्चे खाली न रहें।


खाली रहने पर उनके गलत रास्ते पर जाने की संभावनाएं बढ़ती हैं। अभियान का सबसे ज्यादा फोकस दसवीं, बारहवीं और ग्रेजुएशन के छात्रों पर रहता है। यही समय होता है बच्चे नशे की ओर आकर्षित होते हैं। नशे के दलदल में जाने से रोकने को बच्चों के बीच अनेक रोचक इवेंट कराए जाते हैं। हम चाहते हैं कि देशभर के स्कूल कॉलेजों में नशे के खिलाफ अभियान चले, जिससे नशे की और बच्चे न जाएं। 

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