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हाय तौबा मत मचाइये, यहां 15 सौ का एक गैस सिलेंडर

Fri, 09 Aug 2013 04:08 PM IST
उत्तरकाशी/ब्यूरो
उत्तरकाशी/ब्यूरो Updated Fri, 09 Aug 2013 04:08 PM IST
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fifteen hundred a gas cylinder

आप खामख्वाह गैस सिलेंडर के महंगे होने पर बवाल मचाए हुए हैं। आपको 500 का गैस सिलेंडर ही भारी पड़ जा रहा है और उत्तराखंड के कई इलाके ऐसे भी हैं जहां गैस सिलेंडर 12 से 15 सौ रुपये का पड़ रहा है।

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उत्तराखंड में आपदा क्या आई कि ग्रामीणों के सामने अपने भरण पोषण का संकट खड़ा हो गया है। सड़कें बंद होने से आपदा प्रभावित क्षेत्रों में रसोई गैस पहुंचाने में भी दिक्कत हो रही है। ऐसे में लोगों को दो वक्त की रोटी बनाना भी दुश्वार हो गया है।
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12 से 15 सौ रुपये में पड़ रहा सिलेंडर
ग्रामीणों को 450 रुपये का सिलेंडर घरों तक पहुंचने पर 12 से 15 सौ रुपये में पड़ रहा है। ऐसे में महंगाई का इतना बोझ उठाने में अक्षम कई गांवों में लोगों के यहां लकड़ी वाले पुराने चूल्हों का दौर लौट आया है।
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इंडियन गैस एजेंसी ज्ञानसू के गंगा घाटी में 25 हजार से अधिक उपभोक्ता हैं। अकेले भटवाड़ी क्षेत्र में सात हजार उपभोक्ता हैं जो जून माह में आई आपदा के बाद से अगल-थलग पड़े हुए है। यहां गैस की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

800 से 1000 रुपये चुकाना पड़ रहा भाड़ा
भटवाड़ी क्षेत्र के सुदर्शन ने बताया कि मई माह में यहां रसोई गैस आई थी। इसके बाद प्रशासन ने यहां ईंधन पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं की। नेताला, उत्तरकाशी से एक रसोई गैस सिलेंडर भटवाड़ी तक पहुंचाने के लिए 800 से 1000 रुपये भाड़ा चुकाना पड़ रहा है।

पाला गांव के जोत सिंह ने बताया कि इतना ज्यादा किराया चुकाना आम आदमी के बस से बाहर है। ऐसे में अधिकांश घरों में लोग पहले की तरह चूल्हों में लकड़ियां फूंकने को मजबूर हैं।

मांग घटी
भटवाड़ी क्षेत्र के दर्जनों गांवों की आपूर्ति तथा यात्रा सीजन ठप होने से जिले में रसोई गैस की मांग घट गई है। 25 हजार उपभोक्ताओं वाली गंगा घाटी में प्रति माह गैस सिलेंडरों की डिमांड 12 हजार से घटकर करीब आठ हजार रह गई है।


ग्रामीणों को अपने सब्सिडी वाले सिलेंडरों की चिंता भी सताने लगी है। अप्रैल माह से ग्रामीण अभी तक मात्र एक से दो सिलंडेर ही ले जा पाए हैं, ऐसे में उनके सात सिलेंडर बचे हुए हैं। जिन्हें अगले साल 31 मार्च तक लेना है।

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