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नहीं थम रहा भगवान केदारनाथ की पूजा पर उठा विवाद

Fri, 28 Jun 2013 08:11 AM IST
हरिद्वार/ब्यूरो
हरिद्वार/ब्यूरो Updated Fri, 28 Jun 2013 08:11 AM IST
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controversy on lord kedarnath worship

भगवान केदारनाथ की पूजा पर अब विवाद की स्थिति है। धर्मगुरु और विद्वान बंट गए हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का मानना है कि ज्योर्तिलिंगों और शक्तिपीठों की पूजा उसी स्थल पर हो सकती है, जहां वे विद्यमान हैं।

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फिलहाल बाबा केदार की पूजा ऊखीमठ में हो रही है। अब देश भर के संत और पंडित इस मसले पर विभाजित हैं। कुछ विद्वानों का मानना है कि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की बात ठीक नहीं है तो संन्यास परंपरा से जुड़े साधु-संत जगद्गुरु को सही ठहरा रहे हैं।
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जहां तक पूजा का सवाल है, मंदिरों के जीर्णोद्धार अथवा खंडित होने पर देवों की पूजा उन्हें अन्यत्र रख कर की जाती रही है। देश के कुछ अन्य मंदिरों के जीर्णोद्धार के समय भी अन्यत्र पूजा हुई है।
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गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर का भव्य निर्माण कराया था, तब मंदिर की पूजा पड़ोस के एक मंदिर में की गई थी। देश के कईं मंदिरों में भी ऐसा होता आया है।

वर्ष 1934-35 में हरकी पैड़ी स्थित चार मंदिरों का नव निर्माण कराया गया था। तब मंदिरों की प्रतिमाओं को गंगा में तख्त रख स्थापित किया था और वहीं पूजा अर्चना की थी।

आतंकवादियों ने जब अहमदाबाद के अक्षरधाम मंदिर को क्षतिग्रस्त किया तब पूजा-अर्चना अन्य स्थान पर की गई थी। वैसे भी घरों में किसी की मौत पर घरों के ठाकुर जी को किसी पड़ोसी के घर 13 दिनों की पूजा के लिए भेज दिया जाता है।

राहत पर हो रही सियासत की तस्वीरें

उखीमठ में केदारनाथ की पूजा सही
पूजा के मुद्दे पर जब आपदा आ गई है तब मंदिर के रावल भला कर भी क्या सकते हैं। जिस स्थान पर छह महीने पूजा होती है, उस ऊखीमठ में पूजा कर ली गई तो क्या बिगड़ता है। आश्चर्य की बात है कि साधु-संत और शंकराचार्य अपनी शक्ति को निर्माण के बजाय बेवजह की बातों में खर्च कर रहे हैं। यदि शंकराचार्य में इतनी शक्ति थी तो उन्होंने मंदिर के पास विध्वंस क्यों नहीं रोक दिया। अब समय की मांग है कि जब तक मंदिर परिसर पूर्ण स्वच्छ नहीं हो जाता तब तक भगवान केदार की पूजा ऊखीमठ में की जाए। -श्रीमहंत ज्ञान दास, अध्यक्ष अभा अखाड़ा परिषद 


पूजा हटाने में कोई हर्ज नहीं

शंकराचार्य का विरोध जायज नहीं। जब आपातकाल आ गया है और मंदिर का अस्तित्व संकट में फंस गया है, तब पूजा हटाने में क्या हर्ज है। आखिर घरों में भी तो लोग पातक होने पर अपने ठाकुर जी दूसरों के घरों में भेज देते हैं। वास्तव में केदारनाथ जैसे पवित्र धामों को पिकनिक स्पॉट बनाने से बचाना होगा। जब तक ऐसा नहीं होगा हादसे होते रहेंगे। पूजा ऊखीमठ में होने का संत जगत में कोई विरोध नहीं है। -महामंडलेश्वर शांतानंद शास्त्री, जगदीश आश्रम

नहीं हो सकती अन्यत्र पूजा

केदारनाथ स्थापित नहीं हैं। वे स्वयंभू हैं और स्वत: प्रकट हैं। उनकी पूजा केवल केदारनाथ में हो सकती है। भगवान केदारनाथ का अपमान करने का अधिकार रावल को नहीं है। दुर्भाग्य का विषय है कि रावल अपने अधिकार का दुरुपयोग करते हुए ऊखीमठ में पूजा करा रहे हैं। देश के धर्मज्ञ ऐसा नहीं होने देंगे। -पंडित नितिन शुक्ला, अध्यक्ष धर्मजागृति संघ

केदारनाथ मंदिर में शनिवार से होगी पूजा

जिसने बचाया, उस पत्थर को पूजें

भगवान केदारनाथ के मंदिर को उस विशाल पत्थर ने बचाया है जिसके कारण बाढ़ का पानी दो भागों में विभाजित हो गया था। यदि पूजना है तो उस पत्थर की पूजा शिवलिंग की भांति होनी चाहिए। वह पत्थर साक्षात भगवान शिव ने भेजा है। केदारनाथ मंदिर में लाशें भरी हैं, ऐसे में भला कैसे पूजा की जा सकती है। अनेक तीर्थ स्थलों पर मंदिरों के खंडित होने पर अन्यत्र पूजा की जाती है। शंकराचार्य का विरोध गैरजरूरी है। -पंडित कमलकांत, मुख्य पुजारी, गंगा मंदिर हरकी पैड़ी

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