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आधे घंटे के भीतर करनी होती थी युद्धक विमानों की मरम्मत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2020 11:09 PM IST
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War planes had to be repaired within half an hour
एमसी शर्मा, पूर्व स्क्वाडन लीडर। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1965 और 1971 में हुई लड़ाई में सीमा पर लड़ रहे सैनिकों के लिए वायुसेना की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही थी। चंपावत निवासी पूर्व स्क्वाड्रन लीडर एमसी शर्मा दोनों युद्धों में शिरकत कर चुके हैं। वायु सेना दिवस पर वह लड़ाई के उस दौर को याद करते हुए बताते हैं कि युद्ध के दौरान थल सेना सीधे दुश्मनों से मोर्चा ले रही थी। वायु सेना अप्रत्यक्ष रूप से थल सेना को मदद पहुंचाने का कार्य करती थी।
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दुश्मन सेना पर बम वर्षा कर लौटने वाले युद्धक विमानों की मरम्मत आधे घंटे के भीतर करनी होती थी। वह तकनीकी स्टाफ के साथ पूरी मुस्तैदी से इस कार्य को पूरा करते थे। इसके अलावा लड़ाकू विमानों के रनवे में उतरते ही बेहद तेज गति से लड़ाकू विमानों में मिसाइल और बम आदि सामग्री लादी जाती थी। वर्ष 1964 में वायु सेना में भर्ती होने वाले एमसी शर्मा बताते हैं कि 1965 के युद्ध के दौरान वह जोधपुर में तैनात थे। जबकि 1971 के युद्ध के दौरान वह पठानकोट में तैनात थे। युद्ध में अप्रत्यक्ष रूप से सहभागी बने थे।
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जिले में है कुल 22 पूर्व वायु सैनिक और अधिकारी
चंपावत। जिले में वर्तमान में 22 पूर्व वायु सैनिक और अधिकारी मौजूद हैं, जबकि छह वायु सैनिकों की वीरांगनाओं को पेंशन मिल रही है । पूर्व सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार 1965 और 1971 की लड़ाई में जिले के किसी भी वायु सैनिक ने सीधे तौर पर प्रतिभाग नहीं किया था। संवाद
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