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Champawat News: वीरेंद्र सिंह बने चंपावत के पहले एवरेस्ट फतह करने वाले युवा
Tue, 20 May 2025 10:43 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Tue, 20 May 2025 10:43 PM IST
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चंपावत के वीरेंद्र सिंह माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराते। स्रोत : स्वयं
चंपावत। नगर के वीरेंद्र सिंह सामंत ने माउंट एवरेस्ट फतह कर देश और दुनिया में जिले का नाम रोशन किया है। वह चंपावत जिले से पहले युवा हैं, जिन्होंने विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया है।
ग्राम पंचायत बडोली के पड़ंगा निवासी वीरेंद्र सिंह सामंत (20) ने एवरेस्ट फतह कर नया इतिहास रचा है। तीन अप्रैल को रक्षा भवन में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और सीडीएस ने इंडिया की एनसीसी टीम को फ्लैग किया। यहां से वीरेंद्र के अभियान की शुरुआत हुई। टीम पांच अप्रैल को काठमांडो से और 10 अप्रैल को बेस कैंप के लिए रवाना हुई। वहां से लुक्ला नामछे बाजार पिंगबोचे डोंगबोचे होते हुए 20 अप्रैल को बेस कैंप पहुंची।
25 अप्रैल को 6100 मीटर लोबुचे चोटी फतह करने के बाद टीम के सदस्य बेस कैंप आ गए। इसके बाद 15 मई को कैंप एक के लिए रवाना हुए और फिर कैंप 2, 3 व 4 पहुंचे। 17 मई को सुबह छह बजे टीम एवरेस्ट फतह करने निकली। 18 मई को सुबह 4:46 बजे एवरेस्ट पर भारतीय तिरंगा और एनसीसी का झंडा फहराया गया।
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जुलाई 2024 से चल रही थी प्रक्रिया
एवरेस्ट विजेता वीरेंद्र ने बताया कि जुलाई 2024 से एवरेस्ट फतह की प्रक्रिया चल रही थी। पहले राज्यस्तरीय परीक्षा हुई। फिर राष्ट्रीय स्तर में उनका चयन हुआ। इसके बाद देश के अलग-अलग राज्यों के कैडेट को चुना गया। फिर उनका चयन अभियान के लिए बेसिक माउंटेन कोर्स के लिए हुआ। वीरेंद्र देहरादून कॉलेज से बीएससी कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2021 में विवेकानंद विद्या मंदिर से इंटर की पढ़ाई की। उनके पिता राजेंद्र सिंह सामंत प्राथमिक विद्यालय पड़ंगा में शिक्षक है जबकि माता ईश्वरी जोशी गृहिणी हैं। भाई प्रदीप और निशा चंपावत में पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि पर परिजनों में खुशी की लहर है। उनका परिवार वर्तमान में खटकना पुल न्यू काॅलोनी में रहता है।
फोटो : 20 सीपीटी 17पी : चंपावत के वीरेंद्र सिंह माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराते। स्रोत : परिजन
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ग्राम पंचायत बडोली के पड़ंगा निवासी वीरेंद्र सिंह सामंत (20) ने एवरेस्ट फतह कर नया इतिहास रचा है। तीन अप्रैल को रक्षा भवन में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और सीडीएस ने इंडिया की एनसीसी टीम को फ्लैग किया। यहां से वीरेंद्र के अभियान की शुरुआत हुई। टीम पांच अप्रैल को काठमांडो से और 10 अप्रैल को बेस कैंप के लिए रवाना हुई। वहां से लुक्ला नामछे बाजार पिंगबोचे डोंगबोचे होते हुए 20 अप्रैल को बेस कैंप पहुंची।
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25 अप्रैल को 6100 मीटर लोबुचे चोटी फतह करने के बाद टीम के सदस्य बेस कैंप आ गए। इसके बाद 15 मई को कैंप एक के लिए रवाना हुए और फिर कैंप 2, 3 व 4 पहुंचे। 17 मई को सुबह छह बजे टीम एवरेस्ट फतह करने निकली। 18 मई को सुबह 4:46 बजे एवरेस्ट पर भारतीय तिरंगा और एनसीसी का झंडा फहराया गया।
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जुलाई 2024 से चल रही थी प्रक्रिया
एवरेस्ट विजेता वीरेंद्र ने बताया कि जुलाई 2024 से एवरेस्ट फतह की प्रक्रिया चल रही थी। पहले राज्यस्तरीय परीक्षा हुई। फिर राष्ट्रीय स्तर में उनका चयन हुआ। इसके बाद देश के अलग-अलग राज्यों के कैडेट को चुना गया। फिर उनका चयन अभियान के लिए बेसिक माउंटेन कोर्स के लिए हुआ। वीरेंद्र देहरादून कॉलेज से बीएससी कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2021 में विवेकानंद विद्या मंदिर से इंटर की पढ़ाई की। उनके पिता राजेंद्र सिंह सामंत प्राथमिक विद्यालय पड़ंगा में शिक्षक है जबकि माता ईश्वरी जोशी गृहिणी हैं। भाई प्रदीप और निशा चंपावत में पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि पर परिजनों में खुशी की लहर है। उनका परिवार वर्तमान में खटकना पुल न्यू काॅलोनी में रहता है।
फोटो : 20 सीपीटी 17पी : चंपावत के वीरेंद्र सिंह माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराते। स्रोत : परिजन