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Champawat News: उम्मीद और आशंकाओं के बीच कटे वो 17 दिन
Sat, 02 Dec 2023 10:45 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sat, 02 Dec 2023 10:45 PM IST
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माता-पिता सहित पूरे परिवार के साथ सुरंग से सुरक्षित लौटे टनकपुर छीनीगोठ के पुष्कर सिंह ऐरी। स
टनकपुर (चंपावत)। उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग से 17 दिन बाद निकले छीनीगोठ के पुष्कर सिंह ऐरी अपने घर आकर बहुत खुश हैं। पुष्कर कहते हैं कि सुरंग में फंसने के दौरान वो 17 दिन जीवन की उम्मीद और आशंकाओं के डर में गुजरे। सुरंग के भीतर उड़ी नींद के बीच किस्से-कहानी, बचपन के दिनों की याद के सहारे वक्त कटा।
पुष्कर बताते हैं कि 12 नवंबर की सुबह करीब पांच बजे सुरंग में स्खलन होने पर वे सभी सन्न रह गए। सभी 41 लोग एकदम सदमे में आ गए। एक पल ऐसा लगा कि रास्ता ही बंद नहीं हुआ जिंदगी के सारे रास्ते बंद हो गए लेकिन बाद में सभी ने मिलकर एक-दूसरे को हिम्मत जगाई। बाहरी दुनिया से संपर्क कटा था और दिवाली के दिन हुए हादसे के बीच घटना की जानकारी देर से मिलने का अंदेशा भी था।
बहरहाल 12 नवंबर की रात 10 बजे बाद राहत और बचाव टीम को घटना की जानकारी लगी। इससे उम्मीद जगी और फिर धीरे-धीरे सब सामान्य होने लगे। पुष्कर बताते हैं कि 13 और 14 नवंबर को भी सुरंग से स्खलन होने से डर बढ़ा। 28 नवंबर की सुबह उन्हें बाहर आने की अच्छी खबर मिली तो सुरंग के भीतर सारा सामान एकत्र कर 12 बजे तक तैयारी कर ली।
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तभी एक बड़ा झटका लगा छह इंच का पाइप सुरंग की भीतरी दीवार की ओर मुड़ गया जिससे एक बार फिर स्खलन का डर सताने लगा। हालांकि कुछ ही घंटों में इससे राहत मिली और फिर उम्मीद जगी कि सकुशल बाहर आ सकते हैं। वहीं भाई विक्रम सिंह और चचेरे भाई चंचल भी इस दौरान सुरंग के बाहर डटे रहे। वहीं छीनीगोठ में पुष्कर के घर के पास के शिव मंदिर के पुजारी बलदेव तिवारी इस दौरान लगातार भगवान शिव से पुष्कर और अन्य 41 लोगों की सलामती के लिए पूजा-अर्चना करते रहे। अब मां गंगा देवी, पिता राम सिंह, भाई विक्रम, भाभी ममता सहित परिवार और पड़ोस खुशी से झूम रहा है।
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पुष्कर बताते हैं कि 12 नवंबर की सुबह करीब पांच बजे सुरंग में स्खलन होने पर वे सभी सन्न रह गए। सभी 41 लोग एकदम सदमे में आ गए। एक पल ऐसा लगा कि रास्ता ही बंद नहीं हुआ जिंदगी के सारे रास्ते बंद हो गए लेकिन बाद में सभी ने मिलकर एक-दूसरे को हिम्मत जगाई। बाहरी दुनिया से संपर्क कटा था और दिवाली के दिन हुए हादसे के बीच घटना की जानकारी देर से मिलने का अंदेशा भी था।
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बहरहाल 12 नवंबर की रात 10 बजे बाद राहत और बचाव टीम को घटना की जानकारी लगी। इससे उम्मीद जगी और फिर धीरे-धीरे सब सामान्य होने लगे। पुष्कर बताते हैं कि 13 और 14 नवंबर को भी सुरंग से स्खलन होने से डर बढ़ा। 28 नवंबर की सुबह उन्हें बाहर आने की अच्छी खबर मिली तो सुरंग के भीतर सारा सामान एकत्र कर 12 बजे तक तैयारी कर ली।
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तभी एक बड़ा झटका लगा छह इंच का पाइप सुरंग की भीतरी दीवार की ओर मुड़ गया जिससे एक बार फिर स्खलन का डर सताने लगा। हालांकि कुछ ही घंटों में इससे राहत मिली और फिर उम्मीद जगी कि सकुशल बाहर आ सकते हैं। वहीं भाई विक्रम सिंह और चचेरे भाई चंचल भी इस दौरान सुरंग के बाहर डटे रहे। वहीं छीनीगोठ में पुष्कर के घर के पास के शिव मंदिर के पुजारी बलदेव तिवारी इस दौरान लगातार भगवान शिव से पुष्कर और अन्य 41 लोगों की सलामती के लिए पूजा-अर्चना करते रहे। अब मां गंगा देवी, पिता राम सिंह, भाई विक्रम, भाभी ममता सहित परिवार और पड़ोस खुशी से झूम रहा है।