फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Sharda barrage is ninety one years old

इक्यानवे वर्ष का हुआ शारदा बैराज

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 11 Dec 2019 10:33 PM IST
विज्ञापन
Sharda barrage is ninety one years old
बनबसा बैराज से निकली शारदा नहर। - फोटो : TANAKPUR
शारदा बैराज ने बुधवार को अपने निर्माण के 91 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यूपी की कृषि भूमि की सिंचाई को अंग्रेज हुकमरानों ने वर्ष 1928 में इसका निर्माण कराया था। इस ऐतिहासिक बैराज से यूपी के पीलीभीत से रायबरेली तक करीब 22 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। बैराज भारत-नेपाल के बीच आवागमन सेतु का भी कार्य कर रहा है। उत्तराखंड की भूमि पर स्थित बैराज पर यूपी का अधिकार है।
विज्ञापन

शारदा बैराज का निर्माण तत्कालीन अत्याधुनिक तकनीक से हुआ है। बैराज का निर्माण मूलत: सिंचाई नहर निकालने के लिए किया गया था। बैराज से निकाली गई शारदा नहर यूपी के रायबरेली तक करीब 550 किमी. दूरी तक अपना पानी पहुंचाकर 2208000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई कर रही है।
विज्ञापन

नहर संचालन को बैराज के करीब बने हेडरेगुलेटर 16 गेट हैं। बैराज की जल घनत्व सहन क्षमता 6 लाख क्यूसेक है। 18 जून 2013 को शारदा नदी में अब तक का सर्वाधिक 5 लाख 44 हजार क्यूसेक पानी बह चुका है। अंग्रेजों ने नई तकनीक का सिल्ट इजेक्टर और फिशलैडर (मछली मार्ग) का निर्माण कराया है। करीब 3 किमी. दूरी पर धनुषपुल पर जगबूड़ा नदी के नीचे से साइफन विधि से नहर को नदी के नीचे से निकाला गया है जो 91 वर्ष पूर्व की हैरत करने वाली तकनीक है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रोमांच भरा है बैराज निर्माण का इतिहास
बनबसा (चंपावत)। वर्ष 1918 में बैराज का निर्माण शुरू किया गया था जो 10 वर्ष बाद 1928 में बनकर तैयार हुआ। बैराज को 11 दिसंबर 1928 को तत्कालीन यूपी संयुक्त प्रांत के गवर्नर सर मैलकम हेली ने राष्ट्र को समर्पित किया था।
बनबसा जो एक फुटहिल (जहां से पहाड़ शुरू होते हैं) है, को नहर निकालने कि लिए उपयुक्त मान वर्ष 1857 में मद्रास इंजीनियर कोर के लेफ्टीनेंट एंडरसन ने सर्वे शुरू किया लेकिन वर्ष 1857 के विद्रोह में उनके सभी अभिलेख नष्ट हो गए। उनकी एकमात्र डायरी बची थी जिसके आधार पर सन 1867 में कैप्टन फारबेस ने सर्वे कार्य आगे बढ़ाया।
प्रथम विश्व युद्ध के बाद सर बरनार्ड डायरले ने बैराज की डिजाइनिंग की। वर्ष 1918 में बैराज निर्माण शुरू हुआ जो 1928 में पूरा हुआ। शारदा बैराज के निर्माण में तब करीब साढ़े 9 करोड़ रुपये का खर्चा आया था।
शारदा बैराज की आयु अंग्रेज प्रशासकों ने लगभग पचास वर्ष आंकी थी जो वर्ष 1978 में पूरी हो चुकी है। नियमित रखरखाव के चलते बैराज अभी सालों साल काम करता रहेगा। यूपी में सिंचाई के महत्व को देखते हुए वर्तमान बैराज के डाउन स्ट्रीम में 100 से डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर नया बैराज निर्माण कराने को लेकर प्रस्ताव भारत सरकार को दिया गया है। बृजेश मौर्य, एसडीओ शारदा हेडर्क्स बनबसा।

बैराज से निकली नहर का लाभ यूपी ले रहा है लेकिन इस राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा पूरी तरह से उत्तराखंड पुलिस विभाग के जिम्मे है। यूपी सिंचाई विभाग या यूपी सरकार से उत्तराखंड को बैराज की सुरक्षा के एवज में किसी तरह की कोई मदद नहीं मिलती है। बीसी पंत, सीओ टनकपुर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed