गरीब वृद्ध महिलाओं को भेंट किए शॉल
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जनसेवा के लिए कोई उम्र या बेहतर आर्थिकी मायने नहीं रखती, जरूरी होता है तो बस जज्बा और यह जज्बा किसी भी वर्ग के और किसी भी उम्र के इंसान में कभी भी आ सकता है। हेल्प-डे पर बृहस्पतिवार को शहर के तीन निर्धन भाई-बहनों में देखने को मिला। हेल्प-डे के असली हीरो हैं मंजू, उसकी छोटी बहन अंजू और ममेरा भाई संदीप। उन्होंने जनसहयोग से नौ निर्धन वृद्ध महिलाओं को शॉल खरीदकर भेंट किए। पढ़ने लिखने की उम्र में इन बच्चों ने असहायों की मदद की अनूठी पहल शुरू की है। और एक बात और कि इनकी आर्थिक स्थिति कैसी है यह आप इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि इनके पिता मजदूरी और सब्जी बेचकर परिवार पालते हैं।
सीमेंट रोड स्थित शिवालय के पास रहने वाली बीए में पढ़ रही मंजू सक्सेना (17), हाईस्कूल में पढ़ रही उसकी छोटी बहन अंजू (15) और हाईस्कूल में ही पढ़ने वाले उनके ममेरे भाई संदीप सक्सेना (15) ने जनसेवा की मिसाल कायम की है। 24 दिसंबर हेल्प-डे के रूप में मनाया जाता है, शायद यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी, लेकिन मन में सेवाभाव का जज्बा लिए मंजू, अंजू और संदीप ने हेल्प-डे पर असहायों की मदद करने का पहले से ही मन बना लिया था। खुद गरीब परिवार की मंजू-अंजू के पिता कल्लू सक्सेना मजदूरी करते है और संदीप के पिता प्रहलाद सक्सेना सब्जी का ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
अपने परिवार की कमजोर माली हालत को भी इन्होंने अपने इरादे में बाधक नहीं बनने दिया। तीनों ने कुछ दिन पहले ही मोहल्ले के लोगों से आर्थिक सहायता जुटानी शुरू की और हेल्प-डे आते-आते तीनों ‘हीरो’ ने इतने रुपये जुटा लिए कि नौ शॉल खरीद सकें। बृहस्पतिवार को बच्चों ने शॉल खरीदकर जरूरतमंद निर्धन वृद्ध महिलाओं को यह शॉल भेंट किए। मंजू तो बृहस्पतिवार को बाहर गई थी, लेकिन उसकी प्रेरणा पर अंजू और संदीप ने रेलवे कालोनी की गरीब वृद्ध महिलाओं को शॉल भेंट किए।