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शहीद राहुल रैंसवाल की बरसी पर उमड़े लोग
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शहीद राहुल रैंसवाल।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे रियासी बमनगांव के शहीद फौजी राहुल रैंसवाल की बरसी पर सोमवार को भारी भीड़ उमड़ी। शहीद के पूर्व सैनिक पिता वीरेंद्र सिंह रैंसवाल का परिवार इस वक्त यहां कनलगांव में रहता है। धार्मिक विधि विधान से बरसी का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस मौके पर सामूहिक भोज भी हुआ। बरसी पर पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल पूरे वक्त मौजूद रहे, तो एक दिन पहले विधायक कैलाश गहतोड़ी ने शहीद के परिजनों से मिलकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
18 कुमाऊं के राष्ट्रीय रायफल्स में तैनात फौजी राहुल रैंसवाल की पिछले साल 21 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के पंपोर में आतंकियों से मुठभेड़ में शहादत हो गई थी। शहीद होने से पहले 25 वर्षीय रैंसवाल ने एक आतंकी को भी मार गिराया था। पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा, मंडी समिति के पूर्व अध्यक्ष हरीश भट्ट, एडवाकेट श्याम कार्की, पूर्व सैनिक सुभाष तड़ागी, कैप्टन बिंदु सिंह मौनी, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शंकर दत्त पांडेय सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
एक साल बाद भी नहीं बना शहीद स्मारक
चंपावत। देश के लिए सर्वोच्च कुर्बानी देने वाले राहुल रैंसवाल के परिजनों से किए गए कुछ वादे तो पूरे हुए, लेकिन सबसे अहम वादा अभी भी अधूरा है। जीआईसी क्षेत्र में शहीद स्मारक बनाने का वादा अब तक पूरा नहीं हो सका है। इस शहीद स्मारक का आग्रह खुद शहीद के परिजनों ने घर पहुंचे प्रभारी मंत्री अरविंद पांडेय से किया था।
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शहीद के पिता पूर्व फौजी वीरेंद्र सिंह रैंसवाल और शहीद के फौजी भाई राजेश रैंसवाल का कहना है कि चंपावत जीआईसी के परिसर के पास शहीद स्मारक के लिए कई बार प्रशासन से अनुरोध किया गया, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई कदम नहीं उठाया जा सका है। इधर डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि चंपावत जिले के सभी शहीदों का संयुक्त स्मारक पूर्व सैनिक कल्याण परिषद के परिसर में बनाया जा रहा है। इसके लिए धन स्वीकृत किया जा चुका है।
पूरे हुए ये वादे
1. चंपावत जीआईसी का नाम शहीद राहुल रैंसवाल के नाम पर रखा गया।
2. शहीद की पत्नी पिंकी रैंसवाल को कलक्ट्रेट में नौकरी दी गई।
3. विधायक निधि से शहीद के गांव रियासीबमन गांव तक सड़क का निर्माण।
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18 कुमाऊं के राष्ट्रीय रायफल्स में तैनात फौजी राहुल रैंसवाल की पिछले साल 21 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के पंपोर में आतंकियों से मुठभेड़ में शहादत हो गई थी। शहीद होने से पहले 25 वर्षीय रैंसवाल ने एक आतंकी को भी मार गिराया था। पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा, मंडी समिति के पूर्व अध्यक्ष हरीश भट्ट, एडवाकेट श्याम कार्की, पूर्व सैनिक सुभाष तड़ागी, कैप्टन बिंदु सिंह मौनी, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शंकर दत्त पांडेय सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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एक साल बाद भी नहीं बना शहीद स्मारक
चंपावत। देश के लिए सर्वोच्च कुर्बानी देने वाले राहुल रैंसवाल के परिजनों से किए गए कुछ वादे तो पूरे हुए, लेकिन सबसे अहम वादा अभी भी अधूरा है। जीआईसी क्षेत्र में शहीद स्मारक बनाने का वादा अब तक पूरा नहीं हो सका है। इस शहीद स्मारक का आग्रह खुद शहीद के परिजनों ने घर पहुंचे प्रभारी मंत्री अरविंद पांडेय से किया था।
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शहीद के पिता पूर्व फौजी वीरेंद्र सिंह रैंसवाल और शहीद के फौजी भाई राजेश रैंसवाल का कहना है कि चंपावत जीआईसी के परिसर के पास शहीद स्मारक के लिए कई बार प्रशासन से अनुरोध किया गया, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई कदम नहीं उठाया जा सका है। इधर डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि चंपावत जिले के सभी शहीदों का संयुक्त स्मारक पूर्व सैनिक कल्याण परिषद के परिसर में बनाया जा रहा है। इसके लिए धन स्वीकृत किया जा चुका है।
पूरे हुए ये वादे
1. चंपावत जीआईसी का नाम शहीद राहुल रैंसवाल के नाम पर रखा गया।
2. शहीद की पत्नी पिंकी रैंसवाल को कलक्ट्रेट में नौकरी दी गई।
3. विधायक निधि से शहीद के गांव रियासीबमन गांव तक सड़क का निर्माण।

पंपोर में पिछले साल शहीद हुए राहुल रैंसवाल के चित्र पर माल्यार्पण करते पिता, भाई और अन्य लोग।- फोटो : CHAMPAWAT