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संचार सुविधा के लिए नदेड़ा के ग्रामीणों का प्रदर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Mon, 01 Oct 2018 10:51 PM IST
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मोबाइल टावर लगाने की मांग को लेकर नारेबाजी करते बाराकोट नदेड़ा के ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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बाराकोट ब्लॉक मुख्यालय से मात्र सात किमी दूर स्थित नदेड़ा सहित कई गांवों में किसी भी कंपनी के मोबाइल नेटवर्क नहीं आते हैं। यहां लोग संचार सुविधा से वंचित है। इससे ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर शासन-प्रशासन से गांव में मोबाइल टावर लगाने की मांग की। चेतावनी दी कि जल्द गांव में मोबाइल टावर नहीं लगाया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
कृष्ण जोशी, हरीश जोशी, त्रिभुवन जोशी, लालमणि जोशी, भोलादत्त जोशी, किशोर जोशी, राकेश जोशी, जगदीश जोशी, हेम जोशी, सुरेश जोशी आदि ग्रामीणों का कहना है कि गांव संचार क्रांति से अलग-थलग पड़ा हुआ है। गांव से 11 अध्यापक, 10 से अधिक सैनिक, आठ इंजीनियर, दो वैज्ञानिक होने के बाद भी डिजिटल इंडिया में ग्रामीण बदहाली का जीवन जीने के लिए मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि भनार, पठलती, बिसराड़ी, जिंडी, छुलापें, आली, पट्यूड़ा, चमौला आदि गांवों की आबादी करीब पांच हजार है। यहां के ग्रामीण पहाड़ियों, पेड़ों में चढ़कर अपने रिश्तेदारों से बात करने को मजबूर हैं। ऐसे में वह कभी भी दुर्घटना का भी शिकार हो सकते हैं। ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर गांवों को मोबाइल नेटवर्क से जोड़ने की मांग उठाई है।
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कृष्ण जोशी, हरीश जोशी, त्रिभुवन जोशी, लालमणि जोशी, भोलादत्त जोशी, किशोर जोशी, राकेश जोशी, जगदीश जोशी, हेम जोशी, सुरेश जोशी आदि ग्रामीणों का कहना है कि गांव संचार क्रांति से अलग-थलग पड़ा हुआ है। गांव से 11 अध्यापक, 10 से अधिक सैनिक, आठ इंजीनियर, दो वैज्ञानिक होने के बाद भी डिजिटल इंडिया में ग्रामीण बदहाली का जीवन जीने के लिए मजबूर हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि भनार, पठलती, बिसराड़ी, जिंडी, छुलापें, आली, पट्यूड़ा, चमौला आदि गांवों की आबादी करीब पांच हजार है। यहां के ग्रामीण पहाड़ियों, पेड़ों में चढ़कर अपने रिश्तेदारों से बात करने को मजबूर हैं। ऐसे में वह कभी भी दुर्घटना का भी शिकार हो सकते हैं। ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर गांवों को मोबाइल नेटवर्क से जोड़ने की मांग उठाई है।
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