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लिंगुड़े की सब्जी आजीविका का जरिया बनी

Wed, 26 Jul 2017 10:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बनबसा (चंपावत)।
अमर उजाला ब्यूरो बनबसा (चंपावत)। Updated Wed, 26 Jul 2017 10:30 PM IST
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Linguja's vegetable became a livelihood
बनबसा में बिक रही लिंगड़े की सब्जी। - फोटो : अमर उजाला
लिंगुड़े के नाम से प्रख्यात बरसाती सब्जी की इन दिनों क्षेत्र में खासी बिक्री हो रही है। इस जंगली सब्जी से ग्रामीण एक से दो हजार रुपये प्रतिदिन तक का मुनाफा कमा रहे हैं। फर्न की प्रजाति के  इस पौधे की सब्जी को पर्वतीय क्षेत्र के लोग बड़े चाव से खाते हैं। हरी सब्जियों के गुणों से भरपूर इस भाजी में आयरन, मिनरल के अलावा कई औषधीय गुण हैं।
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बनबसा के गढ़ीगोठ से इन दिनों बरसाती सब्जी लिंगुड़े की खासी बिक्री हो रही है। फर्न की प्रजाति की यह सब्जी पानी वाली जगह पर पैदा होती है। नदी, नालों के तट पर पैदा होने वाली इस सब्जी को बनाने का भी तरीका अलग अलग है। सरसों के तेल में हरी सब्जी की तरह से बनने वाली इस सब्जी का गजब स्वाद ही है।  पर्वतीय क्षेत्र के लोग इसे बहुत पसंद करते हैं। कुमाऊं में इसकी की सब्जी को मठ्ठे के साथ बनाया जाता है तो गढ़वाल और नेपाल में आलू के साथ भी बनाने की परंपरा है।
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बनबसा के गढ़ीगोठ क्षेत्र में नेपाल सीमा अंतर्गत बरसाती नाले, नदी तट पर यह काफी उत्पादित होती है। नेपाल में भी इस सब्जी को काफी पसंद किया जाता है। इन दिनों ग्रामीण जंगलों से बीनकर बाजार में बेच अपनी रोजी रोटी चलाते हैं। बताया जाता है कि बनबसा में इसकी एक गड्डी (2500 ग्राम) दस से बीस रुपये में बेचा जा रहा है।
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नेपाल में तो प्रति दिन इस सब्जी को बेच प्रति व्यक्ति दो से ढाई हजार रुपये तक आय प्राप्त कर रहा है।  इन दिनों नेपाल के डडेलधुरा, कंचनपुर आदि जिलों में ग्रामीण दो से ढाई हजार रुपये प्रतिदिन की कमाई कर रहे हैं। जबकि बनबसा क्षेत्र में  के लोग पांच से आठ सौ रुपये प्रतिदिन तक की आय कर रहे हैं। डॉ. वीके जोशी के मुताबिक इस सब्जी में भरपूर मात्रा में आयरन और मिनरल मौजूद हैं। मानव जीवन के लिए इस भाजी का खास महत्व बताया गया है। डॉ. जोशी ने बताया कि इस सब्जी का उत्पादन वर्ष में केवल चार माह ही होता है।
 
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