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किसानों को मिला आलू का बीज
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चंपावत बाजार में आलू बीज लेते काश्तकार।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। आलू बीज के लिए किसानों का एक महीने से अधिक लंबा इंतजार खत्म हुआ। शनिवार को चंपावत जिले को 230 क्विंटल आलू का बीज मिल गया। सोमवार से इस आलू को किसानों को बेचा जाएगा।
जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि काशीपुर से आलू का 230 क्विंटल बीज चंपावत पहुंच चुका है। इसमें 100 क्विंटल देवीधुरा, 50 क्विंटल खेतीखान और 80 क्विंटल चंपावत दिया जा रहा है। दो दिन के भीतर उद्यान सचल दल के माध्यम से ये बीज 11 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाएगा। जल्द ही लोहाघाट को भी बीज उपलब्ध कराया जाएगा। वैसे उद्यान विभाग ने जिले के लिए इस बार 583 क्विंटल बीज की मांग की थी। आवंटन 405 क्विंटल हुआ, लेकिन इस बीज के लिए उद्यान विभाग ने मदकोट से लेकर कई जगह संपर्क किया। अलबत्ता अब काशीपुर से बीज मिलने से किसानों का इंतजार खत्म हो गया।
काफी किसानों ने खरीदा खुले बाजार से महंगा बीज
चंपावत। वक्त पर सरकारी बीज मिलने में देरी से 300 से अधिक किसान खुले बाजार से महंगा बीज खरीदने को मजबूर हुए। किसानों का कहना है कि अधिक दाम पर बीज खरीदने से उन्हें या तो घाटा होता है या मुनाफे में कमी आती है। चंपावत जिले की प्रमुख नकदी फसल में आलू सबसे ज्यादा बोया जाता है। पहाड़ी हिस्से में आलू की ज्यादा फसल होने के साथ समुद्र तल से पांच हजार फीट से अधिक ऊंचाई के चलते खास स्वाद वाले इस आलू की मांग भी खूब है। पिछले साल जिले में 1115 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती हुई। इसमें 11673 मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ, लेकिन इस बार किसानों को आलू बीज के लिए फरवरी तक का इंतजार करना पड़ा। (ब्यूरो)
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जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि काशीपुर से आलू का 230 क्विंटल बीज चंपावत पहुंच चुका है। इसमें 100 क्विंटल देवीधुरा, 50 क्विंटल खेतीखान और 80 क्विंटल चंपावत दिया जा रहा है। दो दिन के भीतर उद्यान सचल दल के माध्यम से ये बीज 11 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाएगा। जल्द ही लोहाघाट को भी बीज उपलब्ध कराया जाएगा। वैसे उद्यान विभाग ने जिले के लिए इस बार 583 क्विंटल बीज की मांग की थी। आवंटन 405 क्विंटल हुआ, लेकिन इस बीज के लिए उद्यान विभाग ने मदकोट से लेकर कई जगह संपर्क किया। अलबत्ता अब काशीपुर से बीज मिलने से किसानों का इंतजार खत्म हो गया।
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काफी किसानों ने खरीदा खुले बाजार से महंगा बीज
चंपावत। वक्त पर सरकारी बीज मिलने में देरी से 300 से अधिक किसान खुले बाजार से महंगा बीज खरीदने को मजबूर हुए। किसानों का कहना है कि अधिक दाम पर बीज खरीदने से उन्हें या तो घाटा होता है या मुनाफे में कमी आती है। चंपावत जिले की प्रमुख नकदी फसल में आलू सबसे ज्यादा बोया जाता है। पहाड़ी हिस्से में आलू की ज्यादा फसल होने के साथ समुद्र तल से पांच हजार फीट से अधिक ऊंचाई के चलते खास स्वाद वाले इस आलू की मांग भी खूब है। पिछले साल जिले में 1115 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती हुई। इसमें 11673 मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ, लेकिन इस बार किसानों को आलू बीज के लिए फरवरी तक का इंतजार करना पड़ा। (ब्यूरो)
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