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Champawat News: पूर्व सैनिकों ने समान कार्य समान वेतन की मांग पर दिया धरना
Fri, 16 Jan 2026 11:09 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Fri, 16 Jan 2026 11:09 PM IST
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अपनी मांगों को लेकर लोहाघाट में जुलूस निकालते आसाम राइफल के पूर्व सैनिक। स्रोत: स्वयं
पिथौरागढ़। असम राइफल के पूर्व सैनिकों ने समान कार्य समान वेतन की मांग पर धरना दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें सेना की तरह ईसीएचएस और कैंटीन की सुविधा मिल रही है। दोहरे हस्तक्षेप के चलते उन्हें अन्य सुविधाएं नहीं मिल रहीं। इस दोहरे हस्तक्षेप से असम राइफल को दूर कर जवानों और पूर्व सैनिकों को सेना की तरह सुविधाएं मिलनी चाहिए।
संगठन के अध्यक्ष दामोदर पांडे के नेतृत्व में जिले भर के असम राइफल के पूर्व सैनिक कलक्ट्रेट पहुंचे और धरना दिया। उन्होंने कहा कि असम राइफल और देश की सेना एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। न्यायालय ने भी अपने फैसले में असम राइफल को सेना का हिस्सा मानने का निर्णय दिया है। इसी निर्णय के आधार पर असम राइफल के पूर्व सैनिकों को ईसीएचएस और कैंटीन की सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि असम राइफल भारतीय सेना के ऑपरेशनल कंट्रोल में है। इसके बाद भी इस पर गृह और रक्षा मंत्रालय दोनों का हस्तक्षेप है जो सही नहीं है।
इससे उलट प्रतिनियुक्ति पर तैनात असम राइफल के डीजी इसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल का हिस्सा बता रहे हैं। ऐसा बयान असम राइफल के पूर्व सैनिकों और सैनिकों के हितों की अनदेखी है। पूर्व सैनिकों ने कहा कि असम राइफल को पूर्ण रूप से भारतीय सेना का हिस्सा घोषित कर इसके जवानों को सैनिकों की तरह सुविधाएं मिलनी चाहिए। इस दौरान पूर्व सैनिकों ने एडीएम योगेंद्र सिंह के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। चेतावनी देते हुए कहा कि यदि असम राइफल को दोहरे हस्तक्षेप से मुक्त कर इसके सैनिकों और पूर्व सैनिकों को भारतीय सेना की तरह सुविधाएं नहीं मिलीं तो वे सड़कों पर उतरेंगे। धरना देने वालों में संगठन के सचिव हेमंत सौन, कोषाध्यक्ष शंकर सिंह मेहता, मोहन चंद्र तिवारी, गणेश चंद्र, मोहन चंद्र पांडे, राम सिंह, कमान सिंह, खुशाल सिंह दिगारी सहित कई पूर्व सैनिक शामिल रहे।
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बोले पूर्व सैनिक
असम राइफल के सैनिकों और पूर्व सैनिकों को समान कार्य समान वेतन देना चाहिए। असम राइफल को दोहरे हस्तक्षेप से मुक्त कर इसे पूर्ण रूप से भारतीय सेना के अधीन करना होगा। - दामोदर पांडे, अध्यक्ष, असम राइफल पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन
कोट
प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी असम राइफल के सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हितों की अनदेखी नहीं कर सकते। हर पूर्व सैनिक अपने हक के लिए लड़ेगा। यदि हमारी नहीं सुनी गई तो हम सड़कों पर उतरेंगे। - हेमंत सौन, सचिव, असम राइफल पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन
सेना के समान वेतन देने की मांग पर निकाली रैली
मांगें पूरी न होने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही
संवाद न्यूज एजेंसी
लोहाघाट (चंपावत)। असम राइफल संगठन (अरेवा) के पूर्व सैनिकों ने भारतीय सेना के समान वेतन देने की मांग की है। उन्होंने मांगों के लिए नगर से एसडीएम कोर्ट तक रैली निकाली। एसडीएम नीतू डांगर के माध्यम से डीएम मनीष कुमार को ज्ञापन भेजा।
शुक्रवार को अरेवा संगठन के अध्यक्ष गंगा दत्त चौबे की अध्यक्षता में सैनिक विश्राम गृह में बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान बल के पूर्व सैनिकों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। अध्यक्ष चौबे ने बताया कि संगठन के केस की हाईकोर्ट से सुनवाई हुई है, इसमें कोर्ट ने सरकार से तीन महीने के अंदर सेना के समान वेतन, पेंशन और सभी सुविधाएं देने के लिए लंबित मांग पर पक्ष रखने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार मांगें नहीं मानती है तो संगठन सुप्रीम कोर्ट जाएगा और आंदोलन के लिए मजबूर होगा। इस मौके पर सूबेदार जगदीश चंद्र चतुर्वेदी, दीवान सिंह अधिकारी, नवीन चंद्र पाटनी, गणेश सिंह पुजारी, सुरेश चंद्र, विक्रम तड़ागी, भुवन चौबे, जगत सिंह, प्रीतम राम, दूला राम, भास्कर जोशी, पूरन सिंह बोहरा, नित्यानंद चौबे, जानकी देवी, गीता देवी आदि मौजूद रहीं।
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संगठन के अध्यक्ष दामोदर पांडे के नेतृत्व में जिले भर के असम राइफल के पूर्व सैनिक कलक्ट्रेट पहुंचे और धरना दिया। उन्होंने कहा कि असम राइफल और देश की सेना एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। न्यायालय ने भी अपने फैसले में असम राइफल को सेना का हिस्सा मानने का निर्णय दिया है। इसी निर्णय के आधार पर असम राइफल के पूर्व सैनिकों को ईसीएचएस और कैंटीन की सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि असम राइफल भारतीय सेना के ऑपरेशनल कंट्रोल में है। इसके बाद भी इस पर गृह और रक्षा मंत्रालय दोनों का हस्तक्षेप है जो सही नहीं है।
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इससे उलट प्रतिनियुक्ति पर तैनात असम राइफल के डीजी इसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल का हिस्सा बता रहे हैं। ऐसा बयान असम राइफल के पूर्व सैनिकों और सैनिकों के हितों की अनदेखी है। पूर्व सैनिकों ने कहा कि असम राइफल को पूर्ण रूप से भारतीय सेना का हिस्सा घोषित कर इसके जवानों को सैनिकों की तरह सुविधाएं मिलनी चाहिए। इस दौरान पूर्व सैनिकों ने एडीएम योगेंद्र सिंह के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। चेतावनी देते हुए कहा कि यदि असम राइफल को दोहरे हस्तक्षेप से मुक्त कर इसके सैनिकों और पूर्व सैनिकों को भारतीय सेना की तरह सुविधाएं नहीं मिलीं तो वे सड़कों पर उतरेंगे। धरना देने वालों में संगठन के सचिव हेमंत सौन, कोषाध्यक्ष शंकर सिंह मेहता, मोहन चंद्र तिवारी, गणेश चंद्र, मोहन चंद्र पांडे, राम सिंह, कमान सिंह, खुशाल सिंह दिगारी सहित कई पूर्व सैनिक शामिल रहे।
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बोले पूर्व सैनिक
असम राइफल के सैनिकों और पूर्व सैनिकों को समान कार्य समान वेतन देना चाहिए। असम राइफल को दोहरे हस्तक्षेप से मुक्त कर इसे पूर्ण रूप से भारतीय सेना के अधीन करना होगा। - दामोदर पांडे, अध्यक्ष, असम राइफल पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन
कोट
प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी असम राइफल के सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हितों की अनदेखी नहीं कर सकते। हर पूर्व सैनिक अपने हक के लिए लड़ेगा। यदि हमारी नहीं सुनी गई तो हम सड़कों पर उतरेंगे। - हेमंत सौन, सचिव, असम राइफल पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन
सेना के समान वेतन देने की मांग पर निकाली रैली
मांगें पूरी न होने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही
संवाद न्यूज एजेंसी
लोहाघाट (चंपावत)। असम राइफल संगठन (अरेवा) के पूर्व सैनिकों ने भारतीय सेना के समान वेतन देने की मांग की है। उन्होंने मांगों के लिए नगर से एसडीएम कोर्ट तक रैली निकाली। एसडीएम नीतू डांगर के माध्यम से डीएम मनीष कुमार को ज्ञापन भेजा।
शुक्रवार को अरेवा संगठन के अध्यक्ष गंगा दत्त चौबे की अध्यक्षता में सैनिक विश्राम गृह में बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान बल के पूर्व सैनिकों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। अध्यक्ष चौबे ने बताया कि संगठन के केस की हाईकोर्ट से सुनवाई हुई है, इसमें कोर्ट ने सरकार से तीन महीने के अंदर सेना के समान वेतन, पेंशन और सभी सुविधाएं देने के लिए लंबित मांग पर पक्ष रखने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार मांगें नहीं मानती है तो संगठन सुप्रीम कोर्ट जाएगा और आंदोलन के लिए मजबूर होगा। इस मौके पर सूबेदार जगदीश चंद्र चतुर्वेदी, दीवान सिंह अधिकारी, नवीन चंद्र पाटनी, गणेश सिंह पुजारी, सुरेश चंद्र, विक्रम तड़ागी, भुवन चौबे, जगत सिंह, प्रीतम राम, दूला राम, भास्कर जोशी, पूरन सिंह बोहरा, नित्यानंद चौबे, जानकी देवी, गीता देवी आदि मौजूद रहीं।