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सूख गए जल स्रोत, बूंद-बूंद मिल रहा पानी, टैंकर बन रहे सहारा
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चंपावत मोटर स्टेशन में जल संस्थान के टैंकर से पानी भरते लोग।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। बारिश की कमी ने इस बार विकराल पेयजल संकट को ला खड़ा किया है। मार्च तक दो दिन में एक बार पानी मिलने के बाद चंपावत क्षेत्र में अब नलों में पानी की यह आपूर्ति भी मुश्किल हो गई है। अधिकांश जगह बूंद-बूंद पानी मिल रहा है। लोग नौले, हैंडपंपों से पानी ढो रहे हैं। जल संस्थान की टैंकर सेवा भी मददगार बन रही है।
इस साल लोगों को मार्च के शुरू होने के साथ ही घनघोर पेयजल किल्लत से जूझना पड़ा है। चंपावत नगर में ही एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है। इसके चलते गांवों में ही नहीं, नगरों में भी लोग दूरदराज नौलों और हैंडपंपों से पानी ढो रहे हैं। जिले के नगरीय क्षेत्रों में 109.90 लाख लीटर के सापेक्ष सिर्फ 33.76 प्रतिशत (36.80 लाख लीटर) ही मिल रहा है। जल संस्थान के ईई विलाल युनूस का कहना है कि जल स्रोतों के सूखने से परेशानी बढ़ी है। अलबत्ता संस्थान टैंकरों के माध्यम से रोजाना 75 हजार लीटर पानी लोगों को मुहैय्या करा रहा है। उन्होंने बताया कि चंपावत नगर में प्रतिदिन 23.60 लाख लीटर पानी की मांग है। इसके सापेक्ष पांच लाख लीटर ही पानी की आपूर्ति हो रही है।
जीआईसी क्षेत्र के अधिकांश घरों में नहीं आया पानी
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ में तीन-तीन पेयजल योजनाएं होने के बाद भी लोगों को जरूरत का पानी नहीं मिल रहा है। जीआईसी क्षेत्र में सबसे अधिक पानी की किल्लत बनी हुई है। रविवार को लगातार दूसरे दिन भी अधिकांश घरों में पानी नहीं आया। जल संस्थान के टैंकर से कुछ हिस्सों में पानी की आपूर्ति की गई।
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आंवलाघाट, घाट और ठूलीगाड़ पेयजल योजनाओं के बाद भी एक लाख की आबादी पानी के लिए तरस रही है। जीआईसी क्षेत्र में रविवार को भी पानी नहीं आया। सरस्वती विहार कालौनी में हाल ही में बिछाई गई पेयजल योजना में वितरण व्यवस्था ठीक नहीं होने से कुछ परिवार पानी के लिए तरस रहे हैं। जहां कुछ संयोजनों में लगातार पानी आ रहा है वहीं कुछ लोगों के घरों में पानी नहीं आ रहा है। इससे लोगों को पीने के लिए महादेव धारे से पानी ढोना पड़ रहा है जबकि अन्य जरूरतों की आपूर्ति हैंडपंप से हो रही है। (संवाद)
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इस साल लोगों को मार्च के शुरू होने के साथ ही घनघोर पेयजल किल्लत से जूझना पड़ा है। चंपावत नगर में ही एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है। इसके चलते गांवों में ही नहीं, नगरों में भी लोग दूरदराज नौलों और हैंडपंपों से पानी ढो रहे हैं। जिले के नगरीय क्षेत्रों में 109.90 लाख लीटर के सापेक्ष सिर्फ 33.76 प्रतिशत (36.80 लाख लीटर) ही मिल रहा है। जल संस्थान के ईई विलाल युनूस का कहना है कि जल स्रोतों के सूखने से परेशानी बढ़ी है। अलबत्ता संस्थान टैंकरों के माध्यम से रोजाना 75 हजार लीटर पानी लोगों को मुहैय्या करा रहा है। उन्होंने बताया कि चंपावत नगर में प्रतिदिन 23.60 लाख लीटर पानी की मांग है। इसके सापेक्ष पांच लाख लीटर ही पानी की आपूर्ति हो रही है।
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जीआईसी क्षेत्र के अधिकांश घरों में नहीं आया पानी
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ में तीन-तीन पेयजल योजनाएं होने के बाद भी लोगों को जरूरत का पानी नहीं मिल रहा है। जीआईसी क्षेत्र में सबसे अधिक पानी की किल्लत बनी हुई है। रविवार को लगातार दूसरे दिन भी अधिकांश घरों में पानी नहीं आया। जल संस्थान के टैंकर से कुछ हिस्सों में पानी की आपूर्ति की गई।
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आंवलाघाट, घाट और ठूलीगाड़ पेयजल योजनाओं के बाद भी एक लाख की आबादी पानी के लिए तरस रही है। जीआईसी क्षेत्र में रविवार को भी पानी नहीं आया। सरस्वती विहार कालौनी में हाल ही में बिछाई गई पेयजल योजना में वितरण व्यवस्था ठीक नहीं होने से कुछ परिवार पानी के लिए तरस रहे हैं। जहां कुछ संयोजनों में लगातार पानी आ रहा है वहीं कुछ लोगों के घरों में पानी नहीं आ रहा है। इससे लोगों को पीने के लिए महादेव धारे से पानी ढोना पड़ रहा है जबकि अन्य जरूरतों की आपूर्ति हैंडपंप से हो रही है। (संवाद)