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एक दशक पहले हुआ एलान, नहीं बढ़ा कोई कदम
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चंपावत में स्टेडियम नहीं होने से जीआईसी के गोरलचौड़ मैदान में होती हैं खेलकूद की गतिविधियां।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। जिले की आध्यात्मिक पहचान को ऊंचाई देने वाला मां पूर्णागिरि धाम ट्रस्ट बनने का इंतजार कर रहा है। फरवरी 2011 में इसे लेकर बाकायदा तत्कालीन मुख्यमंत्री (मौजूदा केंद्रीय शिक्षा मंत्री) डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने क्षेत्र के दौरे पर धाम को ट्रस्ट बनाने का एलान सार्वजनिक तौर पर किया था। ट्रस्ट बनता तो धाम का विकास होने के साथ ही तीर्थयात्रियों की सुविधाएं भी बढ़तीं लेकिन एक दशक बाद भी ये सपना हकीकत से कोसों दूर है।
मां पूर्णागिरि धाम जिले का सबसे बड़ा आध्यात्मिक स्थल है। कारोबार के नजरिए से भी यह अहम मेला है। धाम में सिर्फ तीन माह की मेलावधि में ही 20 लाख से अधिक तीर्थ यात्री आते हैं। जिला पंचायत संचालित इस मेले की तीन माह की अवधि तक ही व्यवस्था की जाती है। इसके बाद श्रद्धालुओं को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं जबकि ट्रस्ट बनने से तीर्थयात्रियों को सालभर सहूलियत मिलेगी। ट्रस्ट मंदिर के विकास के लिए नई योजनाएं भी बना सकेगा। इन्हीं सबको देखते हुए 2011 में ट्रस्ट बनाने का एलान हुआ, लेकिन इस पर अमल नहीं हो पाया।
कोट
मां पूर्णागिरि धाम को ट्रस्ट बनाने के लिए जिला पंचायत से फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। ट्रस्ट के किसी भी प्रस्ताव से पूर्व पूर्णागिरि धाम के पुजारियों सहित सभी संबद्ध पक्षकारों से मंत्रणा की जाएगी। शासन के निर्देश के अनुरूप आगे की कार्यवाही की जाएगी।
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- राजेश कुमार, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, चंपावत।
स्टेडियम का सपना भी नहीं हुआ साकार
एक नहीं, तीन मुख्यमंत्रियों ने की थी स्टेडियम की घोषणा
चंपावत। चंपावत में स्टेडियम बनाने की तीन मुख्यमंत्रियों ने घोषणा की, लेकिन इसे पूरा नहीं किया जा सका है। तीन मुख्यमंत्रियों (2001 में नित्यानंद स्वामी, 2008 बीसी खंडूरी और 2011 में डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक) ने चंपावत में स्टेडियम का एलान किया, भूमि तय न होने पर स्टेडियम एक कदम आगे नहीं बढ़ सका है। स्टेडियम के लिए निशुल्क भूमि न मिलने से काम शुरू ही नहीं हो सका। जिला क्रीड़ाधिकारी आरएस धामी का कहना है कि स्टेडियम के पास की सेना की जमीन को लेकर दूसरी जगह सेना को जमीन देने का प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। अगर यह प्रयास सफल रहा, तो स्टेडियम के लिए आगे की प्रक्रिया हो सकेगी। ब्यूरो
मुख्यमंत्रियों की ये घोषणाएं भी लटकी हैं
1. लोहाघाट नगर के लिए 45 करोड़ रुपये की लागत से सरयू नदी से लिफ्ट पेयजल योजना निर्माण।
2. लोहाघाट नगर की नजूल भूमि को फ्री होल्ड कर मालिकाना हक।
3. लोहाघाट पीजी कॉलेज में विधि संकाय की स्थापना।
4. देवीधुरा के राजकीय चिकित्सालय का उच्चीकरण कर 25 बेड का अस्पताल बनेगा।
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मां पूर्णागिरि धाम जिले का सबसे बड़ा आध्यात्मिक स्थल है। कारोबार के नजरिए से भी यह अहम मेला है। धाम में सिर्फ तीन माह की मेलावधि में ही 20 लाख से अधिक तीर्थ यात्री आते हैं। जिला पंचायत संचालित इस मेले की तीन माह की अवधि तक ही व्यवस्था की जाती है। इसके बाद श्रद्धालुओं को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं जबकि ट्रस्ट बनने से तीर्थयात्रियों को सालभर सहूलियत मिलेगी। ट्रस्ट मंदिर के विकास के लिए नई योजनाएं भी बना सकेगा। इन्हीं सबको देखते हुए 2011 में ट्रस्ट बनाने का एलान हुआ, लेकिन इस पर अमल नहीं हो पाया।
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कोट
मां पूर्णागिरि धाम को ट्रस्ट बनाने के लिए जिला पंचायत से फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। ट्रस्ट के किसी भी प्रस्ताव से पूर्व पूर्णागिरि धाम के पुजारियों सहित सभी संबद्ध पक्षकारों से मंत्रणा की जाएगी। शासन के निर्देश के अनुरूप आगे की कार्यवाही की जाएगी।
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- राजेश कुमार, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, चंपावत।
स्टेडियम का सपना भी नहीं हुआ साकार
एक नहीं, तीन मुख्यमंत्रियों ने की थी स्टेडियम की घोषणा
चंपावत। चंपावत में स्टेडियम बनाने की तीन मुख्यमंत्रियों ने घोषणा की, लेकिन इसे पूरा नहीं किया जा सका है। तीन मुख्यमंत्रियों (2001 में नित्यानंद स्वामी, 2008 बीसी खंडूरी और 2011 में डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक) ने चंपावत में स्टेडियम का एलान किया, भूमि तय न होने पर स्टेडियम एक कदम आगे नहीं बढ़ सका है। स्टेडियम के लिए निशुल्क भूमि न मिलने से काम शुरू ही नहीं हो सका। जिला क्रीड़ाधिकारी आरएस धामी का कहना है कि स्टेडियम के पास की सेना की जमीन को लेकर दूसरी जगह सेना को जमीन देने का प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। अगर यह प्रयास सफल रहा, तो स्टेडियम के लिए आगे की प्रक्रिया हो सकेगी। ब्यूरो
मुख्यमंत्रियों की ये घोषणाएं भी लटकी हैं
1. लोहाघाट नगर के लिए 45 करोड़ रुपये की लागत से सरयू नदी से लिफ्ट पेयजल योजना निर्माण।
2. लोहाघाट नगर की नजूल भूमि को फ्री होल्ड कर मालिकाना हक।
3. लोहाघाट पीजी कॉलेज में विधि संकाय की स्थापना।
4. देवीधुरा के राजकीय चिकित्सालय का उच्चीकरण कर 25 बेड का अस्पताल बनेगा।