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निजी अस्पताल की चूक से हुई मौत!
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
चंपावत। चंपावत के एक निजी अस्पताल से रेफर होने के चंद घंटों बाद 29 मई 2018 को एक महिला की मौत के मामले की जांच पूरी हो गई है। एसडीएम ने डीएम को सौंपी जांच में निजी अस्पताल की चूक के चलते मौत का अंदेशा जताया है। अलबत्ता मृतका का पोस्टमार्टम नहीं होने से गुत्थी उलझी हुई है।
बाराकोट मनरेगा उप ब्लाक समन्वयक सुनील गुप्ता ने आरोप लगाया था कि जीवन अनमोल अस्पताल में निश्चेतक के बगैर ही उनकी पत्नी शिवानी (31) का बच्चेदानी का ऑपरेशन हुआ था। लेकिन इलाज के बाद अचानक तबियत बिगड़ने से 28-29 मई के बीच खटीमा के एक निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया। कुछ ही घंटों बाद खटीमा के निजी अस्पताल में शिवानी ने दम तोड़ दिया था। इस मामले की शासन स्तर से जांच के आदेश जारी हुए थे।
पिछले साल डीएम ने शिवानी की मौत की जांच के लिए टनकपुर के एसडीएम दयानंद सरस्वती और दो डॉक्टर बैंकटेश और वर्षा रानी का जांच पैनल गठित किया था। पैनल ने जीवन अनमोल अस्पताल के संचालकों और पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज करने के अलावा संबंधित दस्तावेजों का भी परीक्षण किया। एसडीएम ने कहा कि मामूली मर्ज के इलाज के बाद इस प्रकार अटैक आना सामान्य नहीं है, बल्कि ये एक गंभीर मामला है। लिहाजा उन्होंने शिवानी की मौत के लिए अस्पताल की चूक का अंदेशा जताते हुए रिपोर्ट डीएम को भेजी है।
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कोट
अस्पताल की ओर से न तो कोई चूक हुई है और नहीं कोई लापरवाही। अस्पताल ने इलाज के दौरान न केवल सभी मान्य प्रक्रियाओं का पालन किया था, बल्कि निश्चेतक भी तैनात था। तीन सदस्यीय जांच रिपोर्ट में शामिल दोनों डॉक्टरों ने भी अस्पताल को दोषी नहीं बताया है।
दीपक जोशी,
निदेशक, जीवन अनमोल अस्पताल।
मृतका के पति ने हाईकोर्ट में लगाई मुआवजे की गुहार
चंपावत। इलाज के दौरान दम तोड़ने वाली महिला के पति सुनील गुप्ता ने 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी है। उन्होंने जीवन अनमोल नर्सिंग होम, खटीमा निजी अस्पताल के डॉक्टर मोहम्मद आसिफ खान, राज्य सरकार, चंपावत व यूएस नगर के सीएमओ, चंपावत के डीएम, स्वास्थ्य महानिदेशक और बीमा कंपनी को प्रतिवादी बनाया है। इधर चंपावत के सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने मंगलवार को इस मामले में न्यायालय में काउंटर दाखिल कर दिया है।
मनरेगा उप समन्वयक अपनी पत्नी शिवानी गुप्ता को बच्चेदानी में दिक्कत के चलते 28 मई 2018 को चंपावत के एक निजी अस्पताल में लाए थे। आरोप लगाया कि निश्चेतक के बगैर ही अस्पताल ने उनकी पत्नी का ऑपरेशन कर दिया था। तबियत बिगड़ने पर खटीमा के एक निजी अस्पताल में रेफर करने के कुछ ही घंटों में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। गुप्ता ने 16 दिसंबर 2019 को उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मुआवजे के लिए आग्रह किया। इस मामले में मंगलवार को सीएमओ ने भी कोर्ट में काउंटर दाखिल किया है।
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बाराकोट मनरेगा उप ब्लाक समन्वयक सुनील गुप्ता ने आरोप लगाया था कि जीवन अनमोल अस्पताल में निश्चेतक के बगैर ही उनकी पत्नी शिवानी (31) का बच्चेदानी का ऑपरेशन हुआ था। लेकिन इलाज के बाद अचानक तबियत बिगड़ने से 28-29 मई के बीच खटीमा के एक निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया। कुछ ही घंटों बाद खटीमा के निजी अस्पताल में शिवानी ने दम तोड़ दिया था। इस मामले की शासन स्तर से जांच के आदेश जारी हुए थे।
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पिछले साल डीएम ने शिवानी की मौत की जांच के लिए टनकपुर के एसडीएम दयानंद सरस्वती और दो डॉक्टर बैंकटेश और वर्षा रानी का जांच पैनल गठित किया था। पैनल ने जीवन अनमोल अस्पताल के संचालकों और पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज करने के अलावा संबंधित दस्तावेजों का भी परीक्षण किया। एसडीएम ने कहा कि मामूली मर्ज के इलाज के बाद इस प्रकार अटैक आना सामान्य नहीं है, बल्कि ये एक गंभीर मामला है। लिहाजा उन्होंने शिवानी की मौत के लिए अस्पताल की चूक का अंदेशा जताते हुए रिपोर्ट डीएम को भेजी है।
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अस्पताल की ओर से न तो कोई चूक हुई है और नहीं कोई लापरवाही। अस्पताल ने इलाज के दौरान न केवल सभी मान्य प्रक्रियाओं का पालन किया था, बल्कि निश्चेतक भी तैनात था। तीन सदस्यीय जांच रिपोर्ट में शामिल दोनों डॉक्टरों ने भी अस्पताल को दोषी नहीं बताया है।
दीपक जोशी,
निदेशक, जीवन अनमोल अस्पताल।
मृतका के पति ने हाईकोर्ट में लगाई मुआवजे की गुहार
चंपावत। इलाज के दौरान दम तोड़ने वाली महिला के पति सुनील गुप्ता ने 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी है। उन्होंने जीवन अनमोल नर्सिंग होम, खटीमा निजी अस्पताल के डॉक्टर मोहम्मद आसिफ खान, राज्य सरकार, चंपावत व यूएस नगर के सीएमओ, चंपावत के डीएम, स्वास्थ्य महानिदेशक और बीमा कंपनी को प्रतिवादी बनाया है। इधर चंपावत के सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने मंगलवार को इस मामले में न्यायालय में काउंटर दाखिल कर दिया है।
मनरेगा उप समन्वयक अपनी पत्नी शिवानी गुप्ता को बच्चेदानी में दिक्कत के चलते 28 मई 2018 को चंपावत के एक निजी अस्पताल में लाए थे। आरोप लगाया कि निश्चेतक के बगैर ही अस्पताल ने उनकी पत्नी का ऑपरेशन कर दिया था। तबियत बिगड़ने पर खटीमा के एक निजी अस्पताल में रेफर करने के कुछ ही घंटों में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। गुप्ता ने 16 दिसंबर 2019 को उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मुआवजे के लिए आग्रह किया। इस मामले में मंगलवार को सीएमओ ने भी कोर्ट में काउंटर दाखिल किया है।