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Champawat News: विधिविधान से बालेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ाया पीतल का आवरण
Mon, 07 Jul 2025 10:59 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 07 Jul 2025 10:59 PM IST
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चंपावत जिला मुख्यालय के ऐतिहासिक बालेश्वर महादेव मंदिर के शिवलिंग को पीतल के आवरण से ढक दिया गया है। विधि विधान से मंदिर में पूजा-अर्चना कर आवरण चढ़ाया और भगवान भोलेनाथ की मूर्ति स्थापित की गई। अब सावन के प्रथम सोमवार को दोबारा पूजा-अर्चना कर बालेश्वर महादेव मंदिर में आवरण की विशेष पूजा की जाएगी।
सोमवार को पंडित बसंत पांडेय ने मंत्रोच्चार कर पूजा-अर्चना कर मंदिर के महंत पवन गिरी के हाथों गंगाजल, दूध से स्नान करा घी, शहद, चंदन लेप लगाकर आवरण और मूर्ति स्थापित की। इसके बाद फल, वस्त्र, धतूरा, बेलपत्र और कमल, गुलाब पुष्प चढ़ाया गया। काशी विश्वनाथ की तर्ज पर शिवलिंग आवरण तैयार किया है। महाराष्ट्र में आवरण बनाने में करीब डेढ़ माह का समय लगा। कुशल कारीगर बड्डू खड़के ने आवरण और भगवान भोले नाथ की मूर्ति का विधिविधान से निर्माण किया है। करीब डेढ़ लाख से अधिक की लागत से निर्माण किया है। मंदिर के महंत पवन ने बताया कि स्कंद पुराण के अनुसार बालेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करने से काशी विश्वनाथ के बराबर ही पुण्य मिलता है। बताया कि काशी विश्वनाथ में शिवलिंग का आवरण स्वर्ण का है। उस आवरण के आकार का पीतल धातु का आवरण शिवलिंग को चढ़ाया जाएगा। छह जुलाई की रात को आवरण को लगाया गया।
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सोमवार को पंडित बसंत पांडेय ने मंत्रोच्चार कर पूजा-अर्चना कर मंदिर के महंत पवन गिरी के हाथों गंगाजल, दूध से स्नान करा घी, शहद, चंदन लेप लगाकर आवरण और मूर्ति स्थापित की। इसके बाद फल, वस्त्र, धतूरा, बेलपत्र और कमल, गुलाब पुष्प चढ़ाया गया। काशी विश्वनाथ की तर्ज पर शिवलिंग आवरण तैयार किया है। महाराष्ट्र में आवरण बनाने में करीब डेढ़ माह का समय लगा। कुशल कारीगर बड्डू खड़के ने आवरण और भगवान भोले नाथ की मूर्ति का विधिविधान से निर्माण किया है। करीब डेढ़ लाख से अधिक की लागत से निर्माण किया है। मंदिर के महंत पवन ने बताया कि स्कंद पुराण के अनुसार बालेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करने से काशी विश्वनाथ के बराबर ही पुण्य मिलता है। बताया कि काशी विश्वनाथ में शिवलिंग का आवरण स्वर्ण का है। उस आवरण के आकार का पीतल धातु का आवरण शिवलिंग को चढ़ाया जाएगा। छह जुलाई की रात को आवरण को लगाया गया।
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