फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   मनरेगा धांधली की एसआईटी जांच शुरू, हड़कंप मचा

मनरेगा धांधली की एसआईटी जांच शुरू, हड़कंप मचा

Sun, 14 Oct 2018 10:58 PM IST
Updated Sun, 14 Oct 2018 10:58 PM IST
विज्ञापन
मनरेगा धांधली की एसआईटी जांच शुरू, हड़कंप मचा
चंपावत। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मनरेगा योजना के तहत भिंगराड़ा में सात साल पहले 1.17 करोड़ रुपये के कार्यों में गड़बड़ियों के आरोप की एसआईटी ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस क्षेत्राधिकारी आरएस रौतेला के नेतृत्व में गठित चार सदस्यीय जांच दल ने संबंधित दस्तावेजों को कब्जे में लेने के अलावा कई अधिकारियों के बयान भी लिए हैं। जनहित याचिका दायर करने वाले उच्च न्यायालय के एडवोकेट संजय भट्ट ने शनिवार को एसआईटी टीम से मुलाकात कर कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी।
विज्ञापन


भिंगराड़ा क्षेत्र में मनरेगा के तहत 36 वन पंचायतों में मृदा और जल संरक्षण के कामों में गड़बड़ी से संबंधित अधिवक्ता और स्थानीय निवासी संजय भट्ट की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने दो माह पहले एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। अदालत के आदेश के बाद 15 सितंबर 2018 को पाटी के खंड विकास अधिकारी अमित ममगांई ने पाटी थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
विज्ञापन


थानाध्यक्ष दिवान सिंह ने बताया कि अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468 और 471 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। एसआईटी में पाटी के एसओ दिवान सिंह, लोहाघाट के मनीष खत्री के अलावा चंपावत के दरोगा जसवीर सिंह शामिल हैं। टीम ने जांच के दायरे में आ रहे दस्तावेजों को ग्राम्य विकास विभाग और वन महकमे से लेकर सुरक्षा के मद्देनजर कोषागार में सील कर दिए हैं। टीम अब तक मामले के वादी बीडीओ के अलावा सीडीओ एसएस बिष्ट, डीडीओ आरसी तिवारी, वन विभाग और मनरेगा से जुड़े कर्मियों के बयान ले चुकी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



36 वन पंचायतों के कामों में हैं गड़बड़ी के आरोप
भिंगराड़ा क्षेत्र में 2011-12 में मनरेगा के तहत 36 वन पंचायतों में मृदा और जल संरक्षण के काम कराए गए थे। फरवरी 2012 में सूचना के अधिकार के तहत अधिवक्ता भट्ट को जानकारी मिली कि सात गैर पंजीकृत कंपनियों से 37.18 लाख रुपये का सीमेंट खरीदा गया। मनरेगा में कई ऐसे मजदूरों को भुगतान किया गया, जो न केवल गांव छोड़ चुके थे बल्कि निजी स्कूलों में शिक्षण का कार्य करते थे। वन पंचायतों में 1.17 करोड़ रुपये के मृदा और जल संरक्षण संबंधी कार्यो में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे थे।


प्रशासनिक जांच में मिली थी क्लीन चिट
मनरेगा धांधली के मामले की एसडीएम और सीडीओ द्वारा चार साल पूर्व की गई जांच में सरकारी महकमों को क्लीन चिट दी गई थी। लोकायुक्त के दरवाजे तक यह मामला गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला था। तत्कालीन मंडलायुक्त एएस नयाल ने अक्तूबर 2015 को शासन को रिपोर्ट भेज अनियमितता की पुष्टि करते हुए एफआईआर की संस्तुति की थी। एफआईआर तब भी नहीं हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed