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आखिर पूरी क्यों नहीं हो रही अवैध लीसा बरामदगी की जांच

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 16 Feb 2020 11:03 PM IST
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civic aminities
वन विभाग में भ्रष्टाचार के मामलों की कई जांच कछुए को भी मात देने वाली रही हैं। इसकी एक बानगी देवीधुरा रेंज से अगस्त 2018 में 240 टीन अवैध लीसा की बरामदगी का मामला है। मामले की जांच रिपोर्ट डेढ़ साल से अधिक बीतने के बावजूद नहीं सौंपी जा सकी है। जबकि बीच में एक जांच अधिकारी को भी बदला जा चुका है।
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पुलिस के सहयोग से वन विभाग की टीम ने 8 अगस्त 2018 को अल्मोड़ा जिले की सीमा से लगे चंपावत जिले के वालिग गांव के पास से दो पिकअप जीप से 240 टीन अवैध लीसा बरामद किया था। बरामद लीसा कई लाख रुपयों का था। शहरफाटक के बालम सिंह और पहाड़पानी के उमेश चंद्र की दो पिकअप जीपों से बरामद इस लीसे को दोनों आरोपियों सहित वन विभाग के सुपुर्द कर दिया था। वन विभाग ने मामले की जांच के आदेश तो दिए लेकिन जांच की गति बेहद ढीलीढाली रही। जांच अभी तक किसी अंजाम तक नहीं पहुंच सकी है।
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पहले काली कुमाऊं के वन क्षेत्रधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी को जांच अधिकारी बनाया गया लेकिन दिसंबर 2018 में जांच का जिम्मा लोहाघाट के वन क्षेत्राधिकारी दीप जोशी को दे दिया गया। अब तक वन विभाग लीसा चोरी में किसी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका है। अब जांच अधिकारी का दावा है कि जांच पूरी कर ली गई है और 19 फरवरी तक उच्चाधिकारियों को जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
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मैं पिछले काफी समय से प्रशिक्षण पर था। जांच की प्रगति का पता कर जल्द से जल्द जांच पूरी करने के आदेश दिए जाएंगे ताकि दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जा सके। कुबेर सिंह बिष्ट, वन संरक्षक।
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