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Champawat News: भारत-नेपाल के हैं व्यापारिक संबंध में बनबसा बाजार की भूमिका अहम
Mon, 09 Jun 2025 10:50 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 09 Jun 2025 10:50 PM IST
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विनोद काला
बनबसा (चंपावत)। बनबसा का रेलवे बाजार ऐतिहासिक महत्व रखता है। नेपाल सीमा पर दोनों देशों के बीच मैत्री को बढ़ाने के अलावा व्यापारिक संबंधों को भी बढ़ाने में बनबसा बाजार का विशेष योगदान है। छह दशकों से ज्यादा समय से मध्यम, निम्न मध्यम और निर्धन वर्ग के नेपाली नागरिकों की दैनिक उपभोग की जरूरतों को बनबसा बाजार पूरी कर रहा है।
रेलवे की नई व्यवस्था से बनबसा रेलवे बाजर के व्यापारियों के पैदल होने का खतरा मंडराने लगा है। बनबसा में वर्ष 1965 में नेपाल के महेंद्रनगर की स्थापना के बाद से यहां बाजार में धीरे-धीरे दुकानों की संख्या बढ़ने लगी। रेलवे ने भी किराये पर दुकानें देना शुरू किया लेकिन बनबसा बाजार वर्ष 1985-86 में तब अस्तित्व में आया जब यहां एनएचपीसी के टनकपुर पावर स्टेशन का निर्माण शुरू हुआ।
व्यापार मंडल अध्यक्ष भरत भंडारी ने बताया कि बनबसा में 550 व्यापारी व्यापार मंडल में पंजीकृत हैं। खोखा, फड़ मिलाकर करीब 800 व्यापारी यहां रोजगार कर रहे हैं। वर्तमान में बनबसा बाजार में रेलवे बाजार का खास महत्व है। रेलवे बाजार में लगभग 125 व्यापारी रोजी-रोटी कमा रहे हैं लेकिन यहां के रेलवे बाजार ने कई झटके भी झेले हैं।
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वर्ष 1984 में तो पूरा रेलवे बाजार ही अग्निकांड की चपेट में आने से करोड़ों का नुकसान हुआ था। वरिष्ठ व्यवसायी कृष्णानंद खर्कवाल ने बताया कि उस समय अग्निकांड में रेलवे व्यापारी अपना सब कुछ लुटा चुके थे। कुछ व्यापारी तो कभी उबर ही नहीं पाए। अब रेलवे की नई व्यवस्था से रेलवे बाजार के कारोबारियों को बेरोजगार होने की चिंता सता रही है। संवाद
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बनबसा (चंपावत)। बनबसा का रेलवे बाजार ऐतिहासिक महत्व रखता है। नेपाल सीमा पर दोनों देशों के बीच मैत्री को बढ़ाने के अलावा व्यापारिक संबंधों को भी बढ़ाने में बनबसा बाजार का विशेष योगदान है। छह दशकों से ज्यादा समय से मध्यम, निम्न मध्यम और निर्धन वर्ग के नेपाली नागरिकों की दैनिक उपभोग की जरूरतों को बनबसा बाजार पूरी कर रहा है।
रेलवे की नई व्यवस्था से बनबसा रेलवे बाजर के व्यापारियों के पैदल होने का खतरा मंडराने लगा है। बनबसा में वर्ष 1965 में नेपाल के महेंद्रनगर की स्थापना के बाद से यहां बाजार में धीरे-धीरे दुकानों की संख्या बढ़ने लगी। रेलवे ने भी किराये पर दुकानें देना शुरू किया लेकिन बनबसा बाजार वर्ष 1985-86 में तब अस्तित्व में आया जब यहां एनएचपीसी के टनकपुर पावर स्टेशन का निर्माण शुरू हुआ।
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व्यापार मंडल अध्यक्ष भरत भंडारी ने बताया कि बनबसा में 550 व्यापारी व्यापार मंडल में पंजीकृत हैं। खोखा, फड़ मिलाकर करीब 800 व्यापारी यहां रोजगार कर रहे हैं। वर्तमान में बनबसा बाजार में रेलवे बाजार का खास महत्व है। रेलवे बाजार में लगभग 125 व्यापारी रोजी-रोटी कमा रहे हैं लेकिन यहां के रेलवे बाजार ने कई झटके भी झेले हैं।
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वर्ष 1984 में तो पूरा रेलवे बाजार ही अग्निकांड की चपेट में आने से करोड़ों का नुकसान हुआ था। वरिष्ठ व्यवसायी कृष्णानंद खर्कवाल ने बताया कि उस समय अग्निकांड में रेलवे व्यापारी अपना सब कुछ लुटा चुके थे। कुछ व्यापारी तो कभी उबर ही नहीं पाए। अब रेलवे की नई व्यवस्था से रेलवे बाजार के कारोबारियों को बेरोजगार होने की चिंता सता रही है। संवाद