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Champawat News: भक्तों संग मुचकुंद ऋषि के आश्रम पहुंची मां बाराही
Fri, 01 Sep 2023 11:42 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Fri, 01 Sep 2023 11:42 PM IST
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देवीधुरा में मुचकुंद ऋषि आश्रम तक निकली शोभा यात्रा। संवाद
पाटी/देवीधुरा (चंपावत)। बगवाल के एक दिन बाद शुक्रवार को मां बाराही की शोभायात्रा मुख्य मंदिर से मुचकुंद ऋषि के आश्रम मचवाल तक निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। साथ ही आंखों में पट्टी बांध कर मां बाराही मूर्ति को स्नान कराया गया।
पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी ने बताया कि बगवाल के दूसरे दिन मां बाराही की पूजा अर्चना की गई। यजमान जमन सिंह बागड़ और पूरन सिंह बागड़ ने विशेष पूजा अर्चना में हिस्सा लिया। धन सिंह बागड़ के पुत्रों ने आंखों में पट्टी बांध कर ताम्र पेटी में रखी मां बाराही, मां सरस्वती और मां काली की मूर्ति को नंदगृह में स्नान कराया। मुख्य पुरोहित धन सिंह बागड़ ने बैरख गांव के हर सिंह मेहरा को मां बाराही की मूर्ति सौंपी। इसके बाद मूर्ति को सात हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित मचवाल मुचकंद ऋषि के आश्रम ले जाया गया। भक्तों ने मूर्ति को स्पर्श कर आशीर्वाद लिया।
आश्रम में मां बाराही के डोले को पांच बार परिक्रमा कर वापस नंदगृह के लिए रवाना किया गया। इसके बाद खोलीखाड़ दुबाचौड़ के सीलिंग चौबाड़ी में भैसर्ख के भोपाल सिंह और नंदन सिंह को सौप दिया गया। नंदगृह में मां बाराही, सरस्वती और काली की मूर्ति को ताम्र पेटी में रख दिया।
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मंदिर कमेटी के मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया, महामंत्री रोशन सिंह लमगड़िया, भुवन चंद्र जोशी, दीपक बिष्ट, दीपक चम्याल, राजू बिष्ट, रमेश राणा, प्रकाश मेहरा, गंगा सिंह, मान सिंह, त्रिभुवन चम्याल, ईश्वर सिंह बिष्ट सहित चार खाम सात थोक के प्रतिनिधि।
100 महिलाओं ने रात्रि जागरण कर मांगी मन्नत
पाटी/देवीधुरा (चंपावत)। महिलाओं ने बगवाल के बाद बृहस्पतिवार रात्रि जागरण किया। 100 से अधिक महिलाओं ने मन्नत पूरी करने के लिए नंदगृह में मां बाराही की आराधना करने के साथ भजन-कीर्तन किए। मान्यता है कि ताम्र पेटी में रखी मा की मूर्ति के सामने आराधना करने पर संतान प्राप्ति होती है। महिलाओं ने दो दिन का उपवास रखने के बाद शनिवार सुबह मां बाराही के नौले से जल लाईं। इस जल को कालिका मंदिर, अनंत वैली, भैरव मंदिर में चढ़ाया जाएगा। इसके बाद सिंहासन डोले से प्रसाद दिया जाएगा।
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पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी ने बताया कि बगवाल के दूसरे दिन मां बाराही की पूजा अर्चना की गई। यजमान जमन सिंह बागड़ और पूरन सिंह बागड़ ने विशेष पूजा अर्चना में हिस्सा लिया। धन सिंह बागड़ के पुत्रों ने आंखों में पट्टी बांध कर ताम्र पेटी में रखी मां बाराही, मां सरस्वती और मां काली की मूर्ति को नंदगृह में स्नान कराया। मुख्य पुरोहित धन सिंह बागड़ ने बैरख गांव के हर सिंह मेहरा को मां बाराही की मूर्ति सौंपी। इसके बाद मूर्ति को सात हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित मचवाल मुचकंद ऋषि के आश्रम ले जाया गया। भक्तों ने मूर्ति को स्पर्श कर आशीर्वाद लिया।
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आश्रम में मां बाराही के डोले को पांच बार परिक्रमा कर वापस नंदगृह के लिए रवाना किया गया। इसके बाद खोलीखाड़ दुबाचौड़ के सीलिंग चौबाड़ी में भैसर्ख के भोपाल सिंह और नंदन सिंह को सौप दिया गया। नंदगृह में मां बाराही, सरस्वती और काली की मूर्ति को ताम्र पेटी में रख दिया।
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मंदिर कमेटी के मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया, महामंत्री रोशन सिंह लमगड़िया, भुवन चंद्र जोशी, दीपक बिष्ट, दीपक चम्याल, राजू बिष्ट, रमेश राणा, प्रकाश मेहरा, गंगा सिंह, मान सिंह, त्रिभुवन चम्याल, ईश्वर सिंह बिष्ट सहित चार खाम सात थोक के प्रतिनिधि।
100 महिलाओं ने रात्रि जागरण कर मांगी मन्नत
पाटी/देवीधुरा (चंपावत)। महिलाओं ने बगवाल के बाद बृहस्पतिवार रात्रि जागरण किया। 100 से अधिक महिलाओं ने मन्नत पूरी करने के लिए नंदगृह में मां बाराही की आराधना करने के साथ भजन-कीर्तन किए। मान्यता है कि ताम्र पेटी में रखी मा की मूर्ति के सामने आराधना करने पर संतान प्राप्ति होती है। महिलाओं ने दो दिन का उपवास रखने के बाद शनिवार सुबह मां बाराही के नौले से जल लाईं। इस जल को कालिका मंदिर, अनंत वैली, भैरव मंदिर में चढ़ाया जाएगा। इसके बाद सिंहासन डोले से प्रसाद दिया जाएगा।