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डॉक्टरों का विरोध रंग लाया:फिलहाल मोबाइल एप से हाजिरी की अनिवार्यता नहीं
Updated Wed, 06 Jun 2018 11:37 PM IST
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चंपावत। जिले के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी में तैनात डॉक्टरों को फिलहाल चंपावत हेल्थ एप के जरिए हाजिरी लगाने की अनिवार्यता से राहत मिल गई है। इस एप को लेकर चिकित्सकों में निजता बाधित होने सहित कई तरह की आशंकाएं थीं। बुधवार को प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ (पीएमएस) ने डीएम के समक्ष अपना पक्ष रखा। डीएम डॉ.अहमद इकबाल ने एप के माध्यम से हाजिरी से राहत तो दी, मगर सेवा में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर इसे फिर से शुरू करने की बात कही है।
वहीं सीएमओ, एसीएमओ, सीएमएस और एमओआईसी को हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेह ठहराते हुए मरीजों को बेहतर सेवा देने के निर्देश दिए। बुधवार को पीएमएस के जिलाध्यक्ष डॉ.आरके जोशी, डॉ.रश्मि पंत, डॉ.आरपी खंडूरी की मौजूदगी में डॉक्टरों ने उपस्थिति के लिए ईजाद किए जा रहे मोबाइल एप के उपयोग से होने वाली परेशानियों के साथ कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों को उठाया। कुछ चिकित्सकों ने कहा कि मोबाइल एप बनाने वाली कंपनी भारत सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं है। और ये एप सिर्फ डॉक्टरों पर लागू करने को उन पर अविश्वास करने वाला कदम बताया।
अलबत्ता बाद में चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीएम से मुलाकात कर हाजिरी लगाने के बायोमीट्रिक या वाट्सशेप तरीके को लागू करने का आग्रह किया। दावा किया गया कि चिकित्सक अपनी ड्यूटी को जिम्मेदारी के साथ निभा रहे हैं।
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कोट
मोबाइल हेल्थ एप का उद्देश्य अस्पतालों में उपस्थिति को सुनिश्चित कर मरीजों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करना था। सरकारी अस्पताल के कुछ डॉक्टरों के गैर हाजिर रहने की शिकायत मिल रही थी। स्वास्थ्य विभाग अगर खुद ही अस्पतालों की व्यवस्था सुधार लें, तो इस एप की जरूरत नहीं रहेगी। फिलहाल इस एप को स्थगित किया जा रहा है। आगे जैसी जरूरत होगी, उसके मुताबिक कार्यवाही की जाएगी। वैसे भी ये एप प्रायोगिक रूप में शुरू किया जा रहा था।
डॉ.अहमद इकबाल,
जिलाधिकारी, चंपावत।
2 जून को जारी हुआ था आदेश
डीएम द्वारा 2 जून को जारी आदेश में अस्पतालों के आहरण-वितरण अधिकारी को चंपावत हेल्थ एप से हाजिरी लगाने के लिए इस एप को मोबाइल में डाउनलोड करने के साथ इसका प्रमाणपत्र आहरण-वितरण अधिकारी द्वारा कोषागार में देने के बाद ही मई के वेतन आहरण करने की बात कही गई थी। मगर चिकित्सकों ने इस एप को कई तरह से अव्यवहारिक बताने के साथ निजता के हनन का हवाला विरोध किया था। अलबत्ता अब इस एप को स्थगित कर दिया गया है।
पिथौरागढ़ में सिर्फ 13 दिन चला मोबाइल एप
एप के जरिए डॉक्टरों की उपस्थिति का शुरुआती प्रयोग पिथौरागढ़ में हुआ, लेकिन यह प्रयोग वहां कामयाब नहीं रहा। पिथौरागढ़ जिले में पिछले साल सितंबर में शुरू हुआ यह सिस्टम महज 13 दिन ही चल सका। अब पिथौरागढ़ जिले में भी अन्य विभागों की तरह ही बायोमैट्रिक सिस्टम से हाजिरी लगाई जा रही है।
वहीं सीएमओ, एसीएमओ, सीएमएस और एमओआईसी को हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेह ठहराते हुए मरीजों को बेहतर सेवा देने के निर्देश दिए। बुधवार को पीएमएस के जिलाध्यक्ष डॉ.आरके जोशी, डॉ.रश्मि पंत, डॉ.आरपी खंडूरी की मौजूदगी में डॉक्टरों ने उपस्थिति के लिए ईजाद किए जा रहे मोबाइल एप के उपयोग से होने वाली परेशानियों के साथ कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों को उठाया। कुछ चिकित्सकों ने कहा कि मोबाइल एप बनाने वाली कंपनी भारत सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं है। और ये एप सिर्फ डॉक्टरों पर लागू करने को उन पर अविश्वास करने वाला कदम बताया।
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अलबत्ता बाद में चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीएम से मुलाकात कर हाजिरी लगाने के बायोमीट्रिक या वाट्सशेप तरीके को लागू करने का आग्रह किया। दावा किया गया कि चिकित्सक अपनी ड्यूटी को जिम्मेदारी के साथ निभा रहे हैं।
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मोबाइल हेल्थ एप का उद्देश्य अस्पतालों में उपस्थिति को सुनिश्चित कर मरीजों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करना था। सरकारी अस्पताल के कुछ डॉक्टरों के गैर हाजिर रहने की शिकायत मिल रही थी। स्वास्थ्य विभाग अगर खुद ही अस्पतालों की व्यवस्था सुधार लें, तो इस एप की जरूरत नहीं रहेगी। फिलहाल इस एप को स्थगित किया जा रहा है। आगे जैसी जरूरत होगी, उसके मुताबिक कार्यवाही की जाएगी। वैसे भी ये एप प्रायोगिक रूप में शुरू किया जा रहा था।
डॉ.अहमद इकबाल,
जिलाधिकारी, चंपावत।
2 जून को जारी हुआ था आदेश
डीएम द्वारा 2 जून को जारी आदेश में अस्पतालों के आहरण-वितरण अधिकारी को चंपावत हेल्थ एप से हाजिरी लगाने के लिए इस एप को मोबाइल में डाउनलोड करने के साथ इसका प्रमाणपत्र आहरण-वितरण अधिकारी द्वारा कोषागार में देने के बाद ही मई के वेतन आहरण करने की बात कही गई थी। मगर चिकित्सकों ने इस एप को कई तरह से अव्यवहारिक बताने के साथ निजता के हनन का हवाला विरोध किया था। अलबत्ता अब इस एप को स्थगित कर दिया गया है।
पिथौरागढ़ में सिर्फ 13 दिन चला मोबाइल एप
एप के जरिए डॉक्टरों की उपस्थिति का शुरुआती प्रयोग पिथौरागढ़ में हुआ, लेकिन यह प्रयोग वहां कामयाब नहीं रहा। पिथौरागढ़ जिले में पिछले साल सितंबर में शुरू हुआ यह सिस्टम महज 13 दिन ही चल सका। अब पिथौरागढ़ जिले में भी अन्य विभागों की तरह ही बायोमैट्रिक सिस्टम से हाजिरी लगाई जा रही है।