बधाण की मां नंदा देवी लोकजात यात्रा बृहस्पतिवार को अंतिम पड़ाव थाला गांव पहुंची। जहां पर थाला व आस-पास के गांवों से आये भक्तों ने मां नंदा की धूप-दीप और दिया बाती के साथ आरती की। इस दौरान भक्तों ने मां की डोली पर फूलों की वर्षा की। शंख ध्वनि और बाजे भकुंरों के साथ मां भगवती के पश्वा अवतरति हुये और फिर भक्तों को आर्शीवाद देने के बाद मां की डोली को दर्शनों के लिए पंचायत चौक में रखा गया। इससे पहले विजयपुर गांव में देवी के आगमन पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
रात्रि जागरण में भक्तों ने मां नंदा की गौरा रूप में कैलाशपति शंभू के साथ विवाह का मार्मिक वर्णन किया गया। मां नंदा द्वारा अपनी मां मैनावती से यह आग्रह करना कि मेरी सात बहिनों को तो आपने सुंदर स्थानों में ब्याहा हैं, और मुझे क्यों इस वीरान कैलाश में अघोरी बाबा के साथ ब्याह दिया है। इसलिए मै अब छह महीने अपने ननिहाल और छह माह मायके में रहूंगी और प्रत्येक साल अपने भक्तों से मिलने मायके कुरूड़ से कैलाश तक की यात्रा करूंगी। इसको झोड़े और चांचरियों के रूप में प्रस्तुत किया। मां नंदा की गाथा को भक्तों ने सुंदर अभिनय के साथ प्रस्तुत किया। इससे पहले नंदा देवी की डोली, विजयपुर से लोड़ा गांव होते हुये तलवाड़ी खालसा पहुंची। जहां पर मां के दर्शनों को पहले से टकटकी लगाये सैकड़ों भक्तों ने मां के जयकारे से माहौल को देवीमयी बना दिया। पूरे रास्ते भक्त खेतों के किनारे खड़े होकर हाथ में पुष्प थाली लिये हुये फूल बरसा रहे थे और मां के जयकारे लगा रहे थे। दूर-दूर से मां नंदा से मनौतियां मांगने भक्त आये हुये थे। मां नंदा ने भक्तों को फिर से अगले साथ मिलने का दिलासा देकर उनको सुख-समृद्धि का आर्शीवाद दिया। इस अवसर पर विजयपुर की पूर्व प्रधान विमला देवी, लक्ष्मी प्रसाद जोशी, गोपाल दत्त, केशवानन्द, त्रिलोक चन्द्र, मोहन प्रसाद, पंकज देवराड़ी, मोहन चन्द्र, रमेश चन्द्र, प्रकाश देवराड़ी, प्रेमबल्लभ, कुलानन्द सहित कई लोग उपस्थित थे।