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उत्तराखंडः नदी किनारे अब किसी को बसने नहीं देंगे

Tue, 02 Jul 2013 01:04 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Tue, 02 Jul 2013 01:04 AM IST
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ban on construction along river banks in uttarakhand

उत्तराखंड में आपदा से हुई तबाही के बाद सरकार अब नए उत्तराखंड का निर्माण करेगी। इसके लिए पुनर्निर्माण और पुनर्वास प्राधिकरण बनाया जाएगा। इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा होंगे।

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सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने प्रदेश में नदी के किनारे किसी भी तरह के निर्माण (घर और व्यावसायिक) पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

इसका मतलब साफ है कि अब नदी किनारे किसी भी तरह के होटल और घर नहीं बनेंगे। प्राकृतिक आपदा में सबसे बड़ी तबाही ऐसे इलाकों में ही हुई है।

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आपदा पीड़ितों को दी जाने वाली राहत का दायरा बढ़ाकर ढाबे, चाय वाले, छोटे व्यापारी, छात्रों से लेकर गन्ना किसानों तक को क्षतिपूर्ति के मानक में शामिल किया जाएगा।
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राज्य सरकार मुख्यमंत्री राहत कोष से इन वर्गों को भी आपदा राहत मुहैया कराएगी। इस बारे में पहले केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के साथ हुई बैठक में सहमति बनी। बाद में कैबिनेट ने भी इस पर मुहर लगा दी।

इस प्राधिकरण को कानूनी रूप दिया जाएगा ताकि प्रदेश का नियोजित विकास और पुनर्निर्माण हो सके। इसमें पर्यावरण पहलुओं के साथ ही आपदा-भूकंप आदि सभी बिंदुओं को ध्यान में रख कर प्लान तैयार किया जाएगा।

हालांकि राज्य में पहले से मौजूद आधे दर्जन प्राधिकरण और वन कानून तथा सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश अब तक इस दिशा में कुछ खास प्रभावी साबित नहीं हुए। नदी-नालों पर कब्जे होते रहे।

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निजी खेतों में आए नदी के मलबे को निकालने और उसे बेचने की भी छूट कैबिनेट ने अगले तीन महीने के लिए दे दी है। लेकिन जेसीबी लगाकर मलबा निकालने के लिए जिला अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी।

कैबिनेट ने तय किया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में एक जून 2013 से 31 मार्च 2014 तक पेयजल और बिजली मुफ्त मुहैया कराई जाएगी।

विद्यार्थियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार इंटरमीडिएट तक के छात्रों को 500 रुपये और आईटीआई, पालीटेक्निक अथवा इंटर से आगे की कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक हजार रुपये एक बार बतौर क्षतिपूर्ति मुहैया कराएगी।

आपदा में अनाथ हो चुके बच्चों का लालन-पालन और पढ़ाई आदि राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग के जरिए सरकार अपने खर्च पर करेगी।

पीएमजीएसवाई में और मिलेगी मदद

आपदा के चलते मुख्य मार्गों से पूरी तरह कट गए गांवों में संपर्क मार्गों के नवनिर्माण और पुनर्निर्माण को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत केंद्र सरकार और मदद देने को तैयार है।


मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि अभी उत्तराखंड को पीएमजीएसवाई में जो बजट दिया गया है, उसके अतिरिक्त संशोधित प्रस्ताव आने पर सड़कों के लिए अलग से राशि मुहैया कराई जाएगी। मनरेगा और इंदिरा आवास योजना में भी प्रदेश सरकार को अतिरिक्त सहायता मुहैया कराने का प्रयास किया जाएगा।

आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास में वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक भी मदद करेंगे। उनकी संयुक्त टीम जल्द ही उत्तराखंड आएगी। वहीं केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने डेंजर जोन के अंतर्गत चिह्नित 238 गांवों के पुनर्वास को शीर्ष प्राथमिकता देने का अनुरोध किया।

अब वर्ल्ड बैंक से आस
केंद्र सरकार उत्तराखंड के पुनर्निर्माण के लिए वर्ल्ड बैंक और एशिया विकास बैंक (एडीबी) से वित्तीय मदद देने का आग्रह करेगी। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि राज्य को फिर से खड़ा करने में पैसों की कमी को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। राज्य के विकास की योजना पर चर्चा करने के लिए वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय की एक टीम जल्द ही उत्तराखंड जाकर वहां के अफसरों से चर्चा करेगी।

इनसे निपटना नहीं आसान
-सड़कों से कटे डेढ़ सौ गांवों तक डाक्टर पहुंचाना।
-लगभग ढाई सौ अतिरिक्त डाक्टरों की है जरूरत।
-108 सेवा को प्रभावित क्षेत्रों में संचालित करना।
-गांवों में वाटर क्लोरीनेशन एवं ब्लीचिंग करवाना।
-विशेषज्ञ इलाज की सुविधा के लिए उपकरण व अस्पताल।
-संक्रामक रोगों के लिए डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम चलाना।
-क्षतिग्रस्त स्वास्थ्य केंद्रों को किसी तरह चालू करना।

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