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Bageshwar News: बोहाला में सातूं-आठूं मेले का आगाज
Thu, 24 Aug 2023 12:20 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Thu, 24 Aug 2023 12:20 AM IST
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बागेश्वर के बोहाला में आयोजित सातूं-आठूं महोत्सव में रंगांरग कार्यक्रम प्रस्तुत करते लोक कलाकार
बागेश्वर। न्याय पंचायत बोहाला के हरज्यू मंदिर में बुधवार को दो दिवसीय सातूं-आठूं महोत्सव का आगाज हुआ। महोत्सव के पहले दिन क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। महोत्सव में लोक कलाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। बृहस्पतिवार को गौरा-महेश की मूर्तियों को गांव में भ्रमण करा महोत्सव का समापन होगा।
मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य चंदन सिंह रावत ने महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सातूं-आठूं पर्व के माध्यम से क्षेत्र के लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य कर रहे हैं। विद्यार्थियों ने मुख्य मंच से कुमाउनी, गढ़वाली, हिंदी गीतों पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर लोगों का मन मोहा। कार्यक्रम में बोहाला, असों, नंदीगांव, कठपुड़ियाछीना समेत क्षेत्र के कई गांवों से लोग पहुंचे। जिपं सदस्य रावत ने बताया कि लोक कलाकारों के मंचीय कार्यक्रमों के साथ ही झोड़ा-चांचरी भी हुई। बृहस्पतिवार को महिलाएं गौरा यानि पार्वती और महेश यानि शंकर भगवान की मूर्तियां (गंवरे) बनाएंगी। इन्हें गांव भ्रमण कराया जाएगा और लोग उनका आशीर्वाद लेंगे। वहां ग्राम प्रधान पूरन असवाल, मेला समिति के अध्यक्ष गोविंद सिंह रावत, नरेंद्र रावत, मोहन सिंह रावत, अशोक बिष्ट, दर्शन मेहता, मोहन मेहता, हिमांशु असवाल आदि रहे।
शिव और पार्वती को समर्पित है पर्व
बागेश्वर। सातूं-आठूं का अर्थ है सप्तमी और अष्टमी का त्योहार। मान्यताओं के अनुसार मां पार्वती को दीदी और भगवान शिव को जीजा के रिश्ते में बांध कर यह त्योहार मनाया जाता है। माना जाता है जब दीदी गौरा (पार्वती) जीजा महेश्वर (भगवान शिव) से नाराज होकर अपने मायके आ जाती हैं तो महादेव उनको वापस ले जाने ससुराल आते हैं। दीदी गौरा की विदाई और जीजाजी महेश की सेवा के रूप में यह त्योहार मनाया जाता है। महिलाएं गौरा और महेश की मूर्तियां बनातीं हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में गंवरे कहा जाता है। इन मूर्तियों की विधिविधान से पूजा की जाती है और लोग नाच-गाकर उत्सव मनाते हैं।
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मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य चंदन सिंह रावत ने महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सातूं-आठूं पर्व के माध्यम से क्षेत्र के लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य कर रहे हैं। विद्यार्थियों ने मुख्य मंच से कुमाउनी, गढ़वाली, हिंदी गीतों पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर लोगों का मन मोहा। कार्यक्रम में बोहाला, असों, नंदीगांव, कठपुड़ियाछीना समेत क्षेत्र के कई गांवों से लोग पहुंचे। जिपं सदस्य रावत ने बताया कि लोक कलाकारों के मंचीय कार्यक्रमों के साथ ही झोड़ा-चांचरी भी हुई। बृहस्पतिवार को महिलाएं गौरा यानि पार्वती और महेश यानि शंकर भगवान की मूर्तियां (गंवरे) बनाएंगी। इन्हें गांव भ्रमण कराया जाएगा और लोग उनका आशीर्वाद लेंगे। वहां ग्राम प्रधान पूरन असवाल, मेला समिति के अध्यक्ष गोविंद सिंह रावत, नरेंद्र रावत, मोहन सिंह रावत, अशोक बिष्ट, दर्शन मेहता, मोहन मेहता, हिमांशु असवाल आदि रहे।
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शिव और पार्वती को समर्पित है पर्व
बागेश्वर। सातूं-आठूं का अर्थ है सप्तमी और अष्टमी का त्योहार। मान्यताओं के अनुसार मां पार्वती को दीदी और भगवान शिव को जीजा के रिश्ते में बांध कर यह त्योहार मनाया जाता है। माना जाता है जब दीदी गौरा (पार्वती) जीजा महेश्वर (भगवान शिव) से नाराज होकर अपने मायके आ जाती हैं तो महादेव उनको वापस ले जाने ससुराल आते हैं। दीदी गौरा की विदाई और जीजाजी महेश की सेवा के रूप में यह त्योहार मनाया जाता है। महिलाएं गौरा और महेश की मूर्तियां बनातीं हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में गंवरे कहा जाता है। इन मूर्तियों की विधिविधान से पूजा की जाती है और लोग नाच-गाकर उत्सव मनाते हैं।

बागेश्वर के बोहाला में आयोजित सातूं-आठूं महोत्सव में रंगांरग कार्यक्रम प्रस्तुत करते लोक कलाकार
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