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जल निगम और संस्थान के एकीकरण का विरोध
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/बागेश्वर।
Updated Sun, 26 Jul 2015 12:54 AM IST
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जल संस्थान और जल निगम के एकीकरण का पेयजल तकनीकी फील्ड कर्मचारी संगठन ने विरोध किया है। संगठन ने जल संस्थान को अलग से राजकीय विभाग का दर्जा देने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही नुकसान दायक साबित होगी।
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संगठन के मंडलीय अध्यक्ष जगदीश सिंह दोसाद और सचिव रघुवर सिंह परिहार ने पेयजल निगम के अपर मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजा है।
संगठन का कहना हेै कि जल निगम और जल संस्थान का एकीकरण करके इसे राजकीय विभाग बनाने के संबंध में शासन स्तर पर प्रयास चल रहे हैं, लेकिन इस मामले में कर्मचारी संगठनों की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
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कर्मचारी नेताओं के अनुसार जल निगम और जल संस्थान के काम मूल रूप से अलग हैं। पेयजल योजनाओं के रखरखाव और वितरण में संस्थान की भूमिका अहम है और संस्थान ने लगातार अच्छा काम किया है।
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पत्र में कहा गया है कि जल निगम के अंदर पदोन्नति आदि की प्रक्रिया लगातार चलती रही है, वहां कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।
संस्थान में ऐसा नहीं है। निगम और संस्थान को एक साथ लाने से कई तरह की जटिलताएं आएंगी। विभाग के अंदर तालमेल नहीं हो पाएगा और अराजकता की स्थिति पैदा होगी।
इसलिए दोनों को एकीकरण करने के बजाए जल संस्थान को अकेले ही राजकीय विभाग का दर्जा दिया जाए। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जल निगम का रवैया जल संस्थान के प्रति ठीक नहीं है। जल निगम के लोग संस्थान के खिलाफ अनर्गल बातें प्रचारित करके संस्थान की छवि बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।