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Bageshwar News: सिस्टम सोया रहा और जर्जर पुल ठीक करने के लिए महिलाओं ने संभाला मोर्चा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 10 Nov 2025 11:38 PM IST
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The system remained asleep and women took charge to repair the dilapidated bridge.
कपकोट (बागेश्वर)। तहसील क्षेत्र के सुडिंग ग्राम पंचायत के गधेरे के जर्जर पुल की मरम्मत की शासन-प्रशासन ने सुध नहीं ली तो गांव की महिलाओं ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया। गांव की महिलाएं गेंती, फावड़ा, हथौड़ा, कुदाल, सब्बल लेकर पुल की मरम्मत के कार्य में जुट गईं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को नींद से जगाने के लिए महिलाएं स्वयं पुल की मरम्मत के लिए आगे आई हैं।
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सुडिंग ग्राम पंचायत के चुड़िया गधेरे पर बने पुल से सुडिंग, चौड़ा और पेठी की 700 की आबादी आवागमन करती है। पिछले साल की बारिश में पुल को जोड़ने वाला रास्ता ध्वस्त हो गया था। ग्रामीण पिछले डेढ़ सात से एक किनारे की क्षतिग्रस्त दीवार के सहारे पुल पर चढ़-उतर रहे थे। ग्रामीणों ने कई बार लोनिवि से पुल की मरम्मत कराने की मांग की। मामला आश्वासनों तक ही सिमटा रहा। तब से करीब डेढ़ साल का समय गुजर गया है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। पुल का संपर्क मार्ग के बदहाल होने के कारण इससे आवाजाही में लगातार जोखिम बढ़ता जा रहा था।
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विभागीय अधिकारियों के इस रवैये से खिन्न होकर गांव की महिलाओं ने खुद ही पुल की मरम्मत करने का फैसला लिया। गांव की मीना मटियानी शांति देवी, खष्टी देवी, तुलसी मटियानी, शांति देवी आदि महिलाएं गधेरे से पत्थर और मिट्टी लाकर पुल की मरम्मत में जुट गईं। इस कार्य में उन्हें सेवानिवृत्त सूबेदार भुवन सिंह मटियानी का भी साथ मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है सरकार चाहे रजत जयंती वर्ष के नाम पर कितनी भी उपलब्धियों का बखान करे, धरातल पर आज भी स्थितियां जस की तस हैं।
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कोट
सुडिंग गांव की क्षतिग्रस्त पुल का भूगर्भीय सर्वेक्षण कराया गया था। रिपोर्ट में बताया गया कि इस स्थान पर पुल बनाना सुरक्षित नहीं है। अब अन्यत्र पुल बनाने के लिए जगह की तलाश की जा रही है।
अमित कुमार पटेल, ईई लोनिवि कपकोट
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