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दार्जिलिंग की तर्ज पर कपकोट में बने चाय बागान
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चाय विकास बोर्ड कौसानी के प्रबंधक प्रमोद कुमार दहिया को पत्र सौंपते कपकोट के ब्लॉक प्रमुख गोविं?
- फोटो : BAGESHWAR
कपकोट (बागेश्वर)। ब्लॉक प्रमुख गोविंद सिंह दानू ने कौसानी जाकर चाय विकास बोर्ड के प्रबंधक प्रमोद कुमार दहिया को ज्ञापन सौंपा। इसमें दार्जिलिंग की तर्ज पर कपकोट में चाय बागान बनाने की मांग की गई।
ज्ञापन में बताया गया कि दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों ने अपनी कृषि भूमि चाय विकास बोर्ड को लीज पर देने की इच्छा जताई है। कपकोट में जैविक खेती के लिए कृषि भूमि उपयुक्त है।
कहा कि जैविक चाय की बढ़ती मांग के मद्देनजर इस खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसलिए कपकोट क्षेत्र में चाय की खेती के लिए मनरेगा और नाबार्ड से बजट दिलाने की मांग की। बताया कि इससे गांवों में स्वरोजगार बढ़ेगा तो पलायन भी रुकेगा। प्रबंधक दहिया ने दानू को बताया कि धरमघर में चाय फैक्ट्री लगाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। कपकोट क्षेत्र में शीघ्र मृदा परीक्षण शिविर भी आयोजित किया जाएगा।
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चाय उत्पादन को मुफीद जगह
सरयू, पिंडर घाटी समेत पोथिंग, तोली, बघर, दोबाड़, सिमगढ़ी, जगथाना, कन्यालीकोट, सुमटी, बैसानी, झाकरा, बास्ती, भंतोला, जाखनी, सेरी आदि गांवों में चाय की खेती हो सकती है। एससीपी के तहत खलझूनी, हरकोट, मिकिलाखलपट्टा, रिखाड़ी को क्लस्टर के तौर पर विकसित किया जा सकता है। मृदा परीक्षण कर कर्मी या चौड़ास्थल में चाय के पौधों की नर्सरी लगाने का सुझाव दिया।
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ज्ञापन में बताया गया कि दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों ने अपनी कृषि भूमि चाय विकास बोर्ड को लीज पर देने की इच्छा जताई है। कपकोट में जैविक खेती के लिए कृषि भूमि उपयुक्त है।
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कहा कि जैविक चाय की बढ़ती मांग के मद्देनजर इस खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसलिए कपकोट क्षेत्र में चाय की खेती के लिए मनरेगा और नाबार्ड से बजट दिलाने की मांग की। बताया कि इससे गांवों में स्वरोजगार बढ़ेगा तो पलायन भी रुकेगा। प्रबंधक दहिया ने दानू को बताया कि धरमघर में चाय फैक्ट्री लगाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। कपकोट क्षेत्र में शीघ्र मृदा परीक्षण शिविर भी आयोजित किया जाएगा।
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चाय उत्पादन को मुफीद जगह
सरयू, पिंडर घाटी समेत पोथिंग, तोली, बघर, दोबाड़, सिमगढ़ी, जगथाना, कन्यालीकोट, सुमटी, बैसानी, झाकरा, बास्ती, भंतोला, जाखनी, सेरी आदि गांवों में चाय की खेती हो सकती है। एससीपी के तहत खलझूनी, हरकोट, मिकिलाखलपट्टा, रिखाड़ी को क्लस्टर के तौर पर विकसित किया जा सकता है। मृदा परीक्षण कर कर्मी या चौड़ास्थल में चाय के पौधों की नर्सरी लगाने का सुझाव दिया।