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Bageshwar News: लकड़ी के सहारे टिके स्कूल में संवर रहा छात्र-छात्राओं का भविष्य
Sun, 10 Aug 2025 11:48 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sun, 10 Aug 2025 11:48 PM IST
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बागेश्वर। राजकीय इंटर कॉलेज तिलाड़ी का भवन जर्जर हालत में पहुंच गया है। स्कूल में दो भवन बने हैं लेकिन सुरक्षित बैठकर पढ़ने के लिए कक्षा-कक्षों की कमी है। राजूहा के दौर के टिनशेड भवन को लकड़ी की टेक लगाकर सुरक्षित रखने का प्रयास किया है। हाईस्कूल के भवन की छत झुक गई है। बारिश होने पर कमरों के भीतर पानी टपकता है। 14 कमरों वाले स्कूल में केवल तीन कमरे ही सुरक्षा की दृष्टि से ठीक हैं। बाकी कमरों में बच्चे डर के साये में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर हैं।
कपकोट के तिलाड़ी में वर्ष 1882 में राजूहा की स्थापना की गई थी। वर्ष 1986 में स्कूल का भवन बनकर तैयार हुआ था। वर्तमान में यह भवन जर्जर हो चुका है। बल्लियां और तख्ते सड़कर टूट चुके हैं। भवन के आगे की तरफ के बीम टेड़े होकर लटकने लगे हैं। भवन लकड़ी के टेक पर टिका हुआ है। 1998 में स्कूल को उच्चीकृत कर हाईस्कूल बनाया। 2005 में छात्र-छात्राओं के लिए कक्षा-कक्ष भी बनाए गए लेकिन यह भवन भी अब जर्जर हो गया है। भवन की छत झुकने लगी है। कक्षा-कक्षों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। छत खराब होने से पानी टपक रहा है। दीवारों पर सीलन हो गई है। प्रयोगशाला और पुस्तकालय के कमरों में कक्षाएं चल रही हैं। 2017 में स्कूल को इंटरमीडिएट की मान्यता मिली लेकिन नए भवन का निर्माण नहीं हो सका।
38 छात्र-छात्राएं रह गए स्कूल में
बागेश्वर। स्कूल के भवनों की बदहाली का असर छात्र संख्या पर भी पड़ रहा है। स्कूल की छात्र संख्या कम होकर 38 रह गई है। स्कूल में छह स्थायी (एक प्रवक्ता, पांच एलटी) शिक्षक और छह अतिथि शिक्षक हैं। आठ बच्चे मिड डे मील का लाभ उठाने वाले हैं। भोजन माता और परिचारक के पद भी भरे हुए हैं।
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स्कूल का भवन जर्जर है। कमरों में बैठने में डर लगता है। कभी बरामदे में तो कभी प्रयोगशाला के कमरे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
चेतना, छात्रा
स्कूल के कमरों में सीलन है। बारिश में छत से पानी टपकता है। कमरे बदहाल होने के कारण बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त सुरक्षित जगह नहीं है।
लता, छात्रा
कक्षाओं में बैठना सुरक्षित नहीं है। पुस्तकालय वाले कमरों में कक्षाएं चलती हैं। बारिश होने पर अधिकतर कमरों में पानी टपकता है। तब अधिक परेशानी होती है।
दीपक कुमार, छात्र
पुस्कालय और प्रयोगशाला में कक्षाएं चलने से प्रयोगात्मक कार्य और लाइब्रेरी का लाभ नहीं मिल पाता है। कमरों की हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है। पुराने भवन के गिरने का खतरा बना हुआ है।
पंकज सिंह, छात्र
स्कूल के अधिकतर कमरों की हालत खराब है। जूनियर हाईस्कूल वाला पुराना भवन गिरने की कगार पर है। हाईस्कूल भवन के कमरे भी जर्जर हो रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से बच्चों को बरामदे, लैब और लाइब्रेरी में बैठाया जा रहा है। उच्चाधिकारियों को समय-समय पर पत्र भेजकर स्कूल भवनों की स्थिति की जानकारी दी जाती है।
मोहन राम, प्रधानाचार्य, राइंका तिलाड़ी
राइंका तिलाड़ी की छात्र संख्या बेहद कम है। फिलहाल स्कूल में नए भवन के निर्माण की योजना नहीं है। जिन स्कूलों में अधिक छात्र-छात्राएं हैं, वहां भवन निर्माण को प्राथमिकता में रखा गया है। भविष्य में स्कूलों के पुराने कमरों की मरम्मत कराई जाएगी।
जीएस सौन, सीईओ बागेश्वर।
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कपकोट के तिलाड़ी में वर्ष 1882 में राजूहा की स्थापना की गई थी। वर्ष 1986 में स्कूल का भवन बनकर तैयार हुआ था। वर्तमान में यह भवन जर्जर हो चुका है। बल्लियां और तख्ते सड़कर टूट चुके हैं। भवन के आगे की तरफ के बीम टेड़े होकर लटकने लगे हैं। भवन लकड़ी के टेक पर टिका हुआ है। 1998 में स्कूल को उच्चीकृत कर हाईस्कूल बनाया। 2005 में छात्र-छात्राओं के लिए कक्षा-कक्ष भी बनाए गए लेकिन यह भवन भी अब जर्जर हो गया है। भवन की छत झुकने लगी है। कक्षा-कक्षों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। छत खराब होने से पानी टपक रहा है। दीवारों पर सीलन हो गई है। प्रयोगशाला और पुस्तकालय के कमरों में कक्षाएं चल रही हैं। 2017 में स्कूल को इंटरमीडिएट की मान्यता मिली लेकिन नए भवन का निर्माण नहीं हो सका।
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38 छात्र-छात्राएं रह गए स्कूल में
बागेश्वर। स्कूल के भवनों की बदहाली का असर छात्र संख्या पर भी पड़ रहा है। स्कूल की छात्र संख्या कम होकर 38 रह गई है। स्कूल में छह स्थायी (एक प्रवक्ता, पांच एलटी) शिक्षक और छह अतिथि शिक्षक हैं। आठ बच्चे मिड डे मील का लाभ उठाने वाले हैं। भोजन माता और परिचारक के पद भी भरे हुए हैं।
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स्कूल का भवन जर्जर है। कमरों में बैठने में डर लगता है। कभी बरामदे में तो कभी प्रयोगशाला के कमरे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
चेतना, छात्रा
स्कूल के कमरों में सीलन है। बारिश में छत से पानी टपकता है। कमरे बदहाल होने के कारण बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त सुरक्षित जगह नहीं है।
लता, छात्रा
कक्षाओं में बैठना सुरक्षित नहीं है। पुस्तकालय वाले कमरों में कक्षाएं चलती हैं। बारिश होने पर अधिकतर कमरों में पानी टपकता है। तब अधिक परेशानी होती है।
दीपक कुमार, छात्र
पुस्कालय और प्रयोगशाला में कक्षाएं चलने से प्रयोगात्मक कार्य और लाइब्रेरी का लाभ नहीं मिल पाता है। कमरों की हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है। पुराने भवन के गिरने का खतरा बना हुआ है।
पंकज सिंह, छात्र
स्कूल के अधिकतर कमरों की हालत खराब है। जूनियर हाईस्कूल वाला पुराना भवन गिरने की कगार पर है। हाईस्कूल भवन के कमरे भी जर्जर हो रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से बच्चों को बरामदे, लैब और लाइब्रेरी में बैठाया जा रहा है। उच्चाधिकारियों को समय-समय पर पत्र भेजकर स्कूल भवनों की स्थिति की जानकारी दी जाती है।
मोहन राम, प्रधानाचार्य, राइंका तिलाड़ी
राइंका तिलाड़ी की छात्र संख्या बेहद कम है। फिलहाल स्कूल में नए भवन के निर्माण की योजना नहीं है। जिन स्कूलों में अधिक छात्र-छात्राएं हैं, वहां भवन निर्माण को प्राथमिकता में रखा गया है। भविष्य में स्कूलों के पुराने कमरों की मरम्मत कराई जाएगी।
जीएस सौन, सीईओ बागेश्वर।