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खंडहर बन गया ऐतिहासिक मंदिर
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बागेश्वर। जहां एक ओर पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करने का दावा करता है, वहीं बनलेख तहसील के सनेती गांव का ऐतिहासिक मंदिर खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीण तारा सिंह बाफिला ने बताया कि लोग इस मंदिर को टोटा देबाव के नाम से जानते हैं। लोगों की मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडव यहां भी ठहरे थे।
जिले के तमाम गांवों में इस प्रकार के ऐतिहासिक स्थल उपेक्षित हैं। इसी कारण यहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की सूची में सिर्फ बैजनाथ मंदिर समूह ही दर्ज है। नगर क्षेत्र में सरयू, गोमती के संगम पर बने बागनाथ, फेणीनाथ के मंदिर भी इस सूची में दर्ज नहीं हो सके। इस कारण बागनाथ, फेणीनाथ के मंदिर संस्कृति विभाग के ही नियंत्रण में हैं। चोरों से बचाने के लिए इन सभी मंदिरों की ऐतिहासिक मूर्तियां सीलबंद कमरों में रखी गई हैं।
वहीं भारतीय पुरात्वविद सर्वेक्षण विभाग देहरादून के अधीक्षण पुरातत्वविद की ओर से जारी विज्ञप्ति में पुरावशेषों और बहुमूल्य कलाकृतियों को संरक्षित करने में जनसहयोग मांगा है। 25 से 27 सितंबर तक इन बहुमूल्य कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगनी है। यहां आसपास के गांवों में कई जगहों पर ऐसे मंदिर समेत वीर स्तंभ और मूर्तियां भी बिखरी पड़ी हैं।
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क्षेत्रीय पुरातत्वविद सीएस चौहान ने बताया कि दुग नाकुरी तहसील क्षेत्र के ग्राम सनेती में टोटा देबाल मंदिर का निरीक्षण हो चुका है। यह संरक्षण के लिए प्रस्तावित स्थलों की सूची में शामिल है। अगर पर्यटन, संस्कृति विभाग या विधायक निधि से राशि मिलेगी तो इसका संरक्षण किया जाएगा। फिलहाल विभाग की प्राथमिकता पहले से संरक्षित स्थलों की देखभाल करना है।
नेताजी भी यहां से आंख मूंद कर गुजरे
नए मंदिर बनाने में रुचि दिखाने वाले लोग इन ऐतिहासिक मंदिरों की अनदेखी कर रहे हैं जबकि इसी साल लगे पांच दिनी मेले में कई जिलों के मेलार्थियों समेत शासन, प्रशासन के अधिकारी भी इसी मंदिर के पास बनी कच्ची सड़क से गुजरे।
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जिले के तमाम गांवों में इस प्रकार के ऐतिहासिक स्थल उपेक्षित हैं। इसी कारण यहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की सूची में सिर्फ बैजनाथ मंदिर समूह ही दर्ज है। नगर क्षेत्र में सरयू, गोमती के संगम पर बने बागनाथ, फेणीनाथ के मंदिर भी इस सूची में दर्ज नहीं हो सके। इस कारण बागनाथ, फेणीनाथ के मंदिर संस्कृति विभाग के ही नियंत्रण में हैं। चोरों से बचाने के लिए इन सभी मंदिरों की ऐतिहासिक मूर्तियां सीलबंद कमरों में रखी गई हैं।
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वहीं भारतीय पुरात्वविद सर्वेक्षण विभाग देहरादून के अधीक्षण पुरातत्वविद की ओर से जारी विज्ञप्ति में पुरावशेषों और बहुमूल्य कलाकृतियों को संरक्षित करने में जनसहयोग मांगा है। 25 से 27 सितंबर तक इन बहुमूल्य कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगनी है। यहां आसपास के गांवों में कई जगहों पर ऐसे मंदिर समेत वीर स्तंभ और मूर्तियां भी बिखरी पड़ी हैं।
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क्षेत्रीय पुरातत्वविद सीएस चौहान ने बताया कि दुग नाकुरी तहसील क्षेत्र के ग्राम सनेती में टोटा देबाल मंदिर का निरीक्षण हो चुका है। यह संरक्षण के लिए प्रस्तावित स्थलों की सूची में शामिल है। अगर पर्यटन, संस्कृति विभाग या विधायक निधि से राशि मिलेगी तो इसका संरक्षण किया जाएगा। फिलहाल विभाग की प्राथमिकता पहले से संरक्षित स्थलों की देखभाल करना है।
नेताजी भी यहां से आंख मूंद कर गुजरे
नए मंदिर बनाने में रुचि दिखाने वाले लोग इन ऐतिहासिक मंदिरों की अनदेखी कर रहे हैं जबकि इसी साल लगे पांच दिनी मेले में कई जिलों के मेलार्थियों समेत शासन, प्रशासन के अधिकारी भी इसी मंदिर के पास बनी कच्ची सड़क से गुजरे।