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सगे संबंधी नहीं होने से वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2020 11:00 PM IST
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Not being relatives, forced to stay in old age home
Not being relatives, forced to stay in old age home
बागेश्वर। ‘छत नहीं रहती दहलीज नहीं रहती, दीवारों दर नहीं रहता, घर में बुजुर्ग न हो तो घर-घर नहीं रहता...’ पर आज कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपने बुजुर्गों को वृद्धाश्रम के भरोसे या एकाकी जीवन जीने के लिए छोड़ दिया है। वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या आज की युवा पीढ़ी की अपने बुजुर्गों के प्रति बेरुखी की गवाही देती है। हालांकि बागेश्वर के वृद्धाश्रम में अधिकतर बुजुर्ग अविवाहित हैं और परिजन या प्रशासन की ओर से इन्हें यहां ठहराया गया है।
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बागेश्वर के नीलेश्वर स्थित वृद्ध एवं अशक्त आश्रम में पांच महिलाओं समेत 11 बुजुर्ग रह रहे हैं। इनमें से ज्यादातर लोगों के सगे-संबंधी नहीं हैं। बुढ़ापे में कोई सहारा नहीं मिला तो किसी को परिचित तो किसी को प्रशासन ने यहां भेजा है।
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आश्रम में बुजुर्गों की सुविधा के लिए सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। खाने, रहने के अलावा स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया जाता है। आश्रम के अधीक्षक हेम चंद्र तिवारी ने बताया कि बुजुर्गों को सुबह और शाम के समय चाय-नाश्ते के साथ ब्रेड, दूध और मौसमी फल दिए जाते हैं। दिन और रात के समय भोजन में दाल, चावल, रोटी और सब्जी की व्यवस्था की गई है। साप्ताहिक मेन्यू के हिसाब से पनीर और अंडा दिया जाता है। बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर ई-संजीवनी के माध्यम से डॉक्टरों की सलाह ली जाती है।
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कोई सगा-संबंधी नहीं था
गौलापार (हल्द्वानी) के कुंवरपुर निवासी 70 वर्षीय दयाकिशन जोशी ने बताया कि वह दिव्यांग हैं। उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत होती है। उम्रदराज और परिवार में सगा-संबंधी नहीं होने से परिचित ने उन्हें वृद्धाश्रम पहुंचाया।
अब वृद्धाश्रम ही है ठिकाना
हल्द्वानी निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग खीम सिंह का कहना है कि दिव्यांग होने के साथ ही सगा संबंधी न होने के कारण उनके सामने वृद्धावस्था में पेट पालने की समस्या पैदा हो गई थी। लालकुआं के विधायक बंशीधर भगत के पत्र के आधार पर उन्हें वृद्धाश्रम में ठिकाना मिला।
मुझे तो पति ने ही छोड़ दिया
अल्मोड़ा निवासी 65 वर्षीय पुष्पा देवी ने बताया कि उन्हें पति ने छोड़ दिया था। उसके बाद उनके सामने पेट की समस्या खड़ी हो गई है। उनके कुछ परिचितों ने अल्मोड़ा के जिलाधिकारी को प्रार्थना भेजकर वृद्धाश्रम पहुंचाने की गुहार लगाई। डीएम के आदेश पर उन्हें आश्रम पहुंचाया गया।

दर-दर भटकने को थी मजबूर
गंगोलीहाट के पठक्यूड़ा निवासी 60 वर्षीय लीला देवी का कहना है कि परिवार में सगा-संबंधी नहीं होने के कारण वह दर-दर भटकने लगी। एसडीएम बागेश्वर के निर्देश पर व्यापार मंडल के सहयोग से उन्हें वृद्धाश्रम में ठौर मिली।
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