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भूस्खलन ने घर छोड़ने को किया मजबूर
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बागेश्वर। ग्राम पंचायत हाम्टीकापड़ी के कापड़ी तोक में 11 परिवार भूस्खलन की जद में आ गए हैं। घरों के ऊपर पहाड़ी दरकने और जमीन पर दरार पड़ने से भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। भय से इन परिवारों ने मकान छोड़कर गांव में ही अन्य लोगों के घरों में आश्रय ले लिया है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
आपदा के सीजन में कापड़ी तोक के 11 परिवारों के दिन मुश्किल में बीत रहे हैं। आलम यह है कि आपदा के भय से परिवार दूसरे के घरों में आश्रय लेने के लिए मजबूर हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 16 अगस्त को भारी बारिश से हाम्टीकापड़ी के कापड़ी तोक में पहाड़ी दरक गई और तमाम मकान खतरे की जद में आ गए। अगले दिन यानी कि 17 अगस्त को प्रभावित परिवारों ने गांव के अन्य लोगों के घरों में आश्रय ले लिया। कापड़ी में करीब 90 परिवार रहते हैं। आपदा से कई मकानों और प्राथमिक स्कूल के भवन में दरार पड़ गई है। गांव का पैदल मोटर मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है। गांव में पीने के पानी का मुख्य स्रोत ध्वस्त हो गया है, जिससे लोग को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में मलबा आने से और खोली रौली गधेरे में भूस्खलन होने से पैदल पुल और महाकाली मंदिर खतरे में आ गया है। ग्रामीणों को नियमित रूप से बिजली न मिलने से भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान उमा देवी ने शासन-प्रशासन से गांव के लोगों को आपदा के संकट से बचाने की गुहार लगाई है।
इन परिवारों ने छोड़े मकान
मेहरमान सिंह पुत्र हयात सिंह, प्रवीन सिंह पुत्र हयात सिंह, यशपाल सिंह पुत्र त्रिलोक सिंह, कुंवर सिंह पुत्र कल्याण सिंह, नंदन सिंह पुत्र बाले सिंह, नेत्र सिंह पुत्र पान सिंह, प्रवीन सिंह पुत्र बाले सिंह, सुंदर सिंह पुत्र हर सिंह, मोहन सिंह पुत्र पान सिंह, पान सिंह पुत्र कमल सिंह, डिगर सिंह पुत्र पान सिंह।
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--:: बोले एसडीएम --::
हाम्टी कापड़ी में आपदा के कारण परिवारों के शिफ्ट होने की जानकारी संज्ञान में नहीं है। गांव में प्राथमिक स्कूल में दरार पड़ी है, जिसकी मरम्मत के लिए कार्यवाही की जा रही है। गांव में स्थिति का पता करने के लिए टीम भेजी जाएगी। आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। - प्रमोद कुमार, एसडीएम कपकोट
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आपदा के सीजन में कापड़ी तोक के 11 परिवारों के दिन मुश्किल में बीत रहे हैं। आलम यह है कि आपदा के भय से परिवार दूसरे के घरों में आश्रय लेने के लिए मजबूर हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 16 अगस्त को भारी बारिश से हाम्टीकापड़ी के कापड़ी तोक में पहाड़ी दरक गई और तमाम मकान खतरे की जद में आ गए। अगले दिन यानी कि 17 अगस्त को प्रभावित परिवारों ने गांव के अन्य लोगों के घरों में आश्रय ले लिया। कापड़ी में करीब 90 परिवार रहते हैं। आपदा से कई मकानों और प्राथमिक स्कूल के भवन में दरार पड़ गई है। गांव का पैदल मोटर मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है। गांव में पीने के पानी का मुख्य स्रोत ध्वस्त हो गया है, जिससे लोग को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में मलबा आने से और खोली रौली गधेरे में भूस्खलन होने से पैदल पुल और महाकाली मंदिर खतरे में आ गया है। ग्रामीणों को नियमित रूप से बिजली न मिलने से भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान उमा देवी ने शासन-प्रशासन से गांव के लोगों को आपदा के संकट से बचाने की गुहार लगाई है।
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इन परिवारों ने छोड़े मकान
मेहरमान सिंह पुत्र हयात सिंह, प्रवीन सिंह पुत्र हयात सिंह, यशपाल सिंह पुत्र त्रिलोक सिंह, कुंवर सिंह पुत्र कल्याण सिंह, नंदन सिंह पुत्र बाले सिंह, नेत्र सिंह पुत्र पान सिंह, प्रवीन सिंह पुत्र बाले सिंह, सुंदर सिंह पुत्र हर सिंह, मोहन सिंह पुत्र पान सिंह, पान सिंह पुत्र कमल सिंह, डिगर सिंह पुत्र पान सिंह।
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हाम्टी कापड़ी में आपदा के कारण परिवारों के शिफ्ट होने की जानकारी संज्ञान में नहीं है। गांव में प्राथमिक स्कूल में दरार पड़ी है, जिसकी मरम्मत के लिए कार्यवाही की जा रही है। गांव में स्थिति का पता करने के लिए टीम भेजी जाएगी। आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। - प्रमोद कुमार, एसडीएम कपकोट