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Almora News: अल्मोड़ा के 13 आयुर्वेदिक अस्पतालों में एक भी डॉक्टर नहीं
Thu, 08 Jun 2023 11:53 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 08 Jun 2023 11:53 PM IST
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अल्मोड़ा। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए आयुर्वेद को बढ़ावा देने की बात हो रही है। आयुर्वेदिक अस्पताल भी खोले गए हैं लेकिन इनमें डॉक्टर नहीं हैं। इस कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अल्मोड़ा में 13 आयुर्वेदिक अस्पतालों में एक भी डॉक्टर तैनात नहीं हैं। फार्मासिस्ट के भरोसे इन अस्पतालों का संचालन हो रहा है।
जिले में 50 राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल स्थापित किए गए हैं जिनमें डाॅक्टर के 50 पद सृजित हैं। 13 अस्पताल बगैर डॉक्टर के संचालित हो रहे हैं। आमधार, पीपना, सैंणामानुर, चित्तौड़खाल, नाली, नगचूलाखाल, सैल, सल्पड़, जागेश्वर, मानुली, टाना बसंतपुर और क्वैरला आयुर्वेदिक अस्पताल में एक भी डॉक्टर नहीं है। इन अस्पतालों में हर रोज दूर-दराज से मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं लेकिन उन्हें मायूस होकर अन्य अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है। दवा देने के लिए फार्मासिस्ट तो तैनात हैं लेकिन बिना डॉक्टर के मरीजों को दवा मिलना मुश्किल है। संवाद
शीतलाखेत में डॉक्टर और फार्मासिस्ट नहीं
अल्मोड़ा। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल शीतलाखेत में न तो डॉक्टर तैनात हैं और न ही फार्मासिस्ट हैं। यहां के ताले खोलने वाला कोई नहीं है। कभी-कभार अन्य अस्पतालों से स्वास्थ्य कर्मी भेजकर यहां के ताले खोलकर औपचारिकता निभाई जा रही है।
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आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी है। इसकी सूचना समय-समय पर शासन को भेजी गई है। खाली पद शासन स्तर से ही भरे जाते हैं। डॉक्टर नहीं होने से फार्मासिस्ट काम देख रहे हैं।
डॉ. निवेदिता जोशी, जिला आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी, अल्मोड़ा।
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जिले में 50 राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल स्थापित किए गए हैं जिनमें डाॅक्टर के 50 पद सृजित हैं। 13 अस्पताल बगैर डॉक्टर के संचालित हो रहे हैं। आमधार, पीपना, सैंणामानुर, चित्तौड़खाल, नाली, नगचूलाखाल, सैल, सल्पड़, जागेश्वर, मानुली, टाना बसंतपुर और क्वैरला आयुर्वेदिक अस्पताल में एक भी डॉक्टर नहीं है। इन अस्पतालों में हर रोज दूर-दराज से मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं लेकिन उन्हें मायूस होकर अन्य अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है। दवा देने के लिए फार्मासिस्ट तो तैनात हैं लेकिन बिना डॉक्टर के मरीजों को दवा मिलना मुश्किल है। संवाद
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शीतलाखेत में डॉक्टर और फार्मासिस्ट नहीं
अल्मोड़ा। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल शीतलाखेत में न तो डॉक्टर तैनात हैं और न ही फार्मासिस्ट हैं। यहां के ताले खोलने वाला कोई नहीं है। कभी-कभार अन्य अस्पतालों से स्वास्थ्य कर्मी भेजकर यहां के ताले खोलकर औपचारिकता निभाई जा रही है।
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आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी है। इसकी सूचना समय-समय पर शासन को भेजी गई है। खाली पद शासन स्तर से ही भरे जाते हैं। डॉक्टर नहीं होने से फार्मासिस्ट काम देख रहे हैं।
डॉ. निवेदिता जोशी, जिला आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी, अल्मोड़ा।