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नदियों से सीखें जीवन में आगे बढ़ना : हरि चैतन्य पुरी महाराज
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कौसानी में प्रवचन देते हरि चैतन्य प्रभु महाराज।
- फोटो : BAGESHWAR
कौसानी (बागेश्वर)। श्री हरिकृपा पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 स्वामी हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने कौसानी के लोबांज में लोगों को प्रवचन देकर आगे बढ़ने की सीख दी।
उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं तो नदियों से सीखें। नदियां मार्ग में आने वाली बाधाओं, रुकावटों से नहीं घबराती हैं। कहा कि जीवन में यथासंभव व्यर्थ के उलझावों, टकरावों से बचने का प्रयास करना चाहिए। किसी को छोटा या हीन ना समझें, किसी का तिरस्कार ना करें।
उन्होंने कहा कि हमारा हृदय विशाल और उदार होना चाहिए। आज मनुष्य का मस्तिष्क तो विशाल हो रहा है परंतु हृदय सिकुड़ता चला जा रहा है। भय से तभी तक डरना चाहिए जब तक वह ना आए। भय आए तो उससे भय कैसा, उस समय भय का तो डटकर मुकाबला करना चाहिए। कहा कि अपने देश की अमूल्य और महान संस्कृति को समझने के साथ ही अपनाएं। पाश्चात्य सभ्यता के अंधानुकरण को त्यागकर संस्कृति के अनुसार जीवन जीएं। यदि ना जी सकें तो कम से कम विकृति परिपूर्ण जीवन जीने की कोशिश ना करे। कहा कि शिवरात्रि के अवसर पर श्री हरि कृपा आश्रम गढ़ीनेगी में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी 8 से 11 मार्च तक विराट धर्म सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं तो नदियों से सीखें। नदियां मार्ग में आने वाली बाधाओं, रुकावटों से नहीं घबराती हैं। कहा कि जीवन में यथासंभव व्यर्थ के उलझावों, टकरावों से बचने का प्रयास करना चाहिए। किसी को छोटा या हीन ना समझें, किसी का तिरस्कार ना करें।
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उन्होंने कहा कि हमारा हृदय विशाल और उदार होना चाहिए। आज मनुष्य का मस्तिष्क तो विशाल हो रहा है परंतु हृदय सिकुड़ता चला जा रहा है। भय से तभी तक डरना चाहिए जब तक वह ना आए। भय आए तो उससे भय कैसा, उस समय भय का तो डटकर मुकाबला करना चाहिए। कहा कि अपने देश की अमूल्य और महान संस्कृति को समझने के साथ ही अपनाएं। पाश्चात्य सभ्यता के अंधानुकरण को त्यागकर संस्कृति के अनुसार जीवन जीएं। यदि ना जी सकें तो कम से कम विकृति परिपूर्ण जीवन जीने की कोशिश ना करे। कहा कि शिवरात्रि के अवसर पर श्री हरि कृपा आश्रम गढ़ीनेगी में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी 8 से 11 मार्च तक विराट धर्म सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
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