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मुआवजा न मिलने पर ग्रामीणों का प्रदर्शन
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बागेश्वर कलक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन करते रीमा के ग्रामीण।
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। रीमा के ग्रामीणों ने खनन के लिए दी जमीन का मुआवजा न मिलने का मामला डीएम रंजना राजगुरु के सामने उठाया है। ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर कलक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया।
सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचे लोगों ने डीएम को दिए ज्ञापन में कहा है कि उन लोगों ने एक खड़िया खनन पट्टाधारक को वज्यूड़ा गांव में जमीन खनन के लिए दी थी। पट्टाधारक ने लंबे समय से खनन करने के बाद भी उन्हें मुआवजा नहीं दिया है।
ग्रामीणों ने बताया कि बीच में खनन से भूमि धंसने के कारण उक्त जगह पर खनन का काम बंद कर दिया गया था लेकिन जनवरी से पट्टाधारकों ने बिना खेत मालिकों की अनुमति के फिर से खनन का कार्य शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने भूमि मालिकों की ओर से दिए गए सहमति पत्रों की जांच और खनन करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शन में सोबन सिंह, भूपाल सिंह, हिम्मत सिंह, गोविंद सिंह, जोगा सिंह, कल्याण सिंह, वीरेंद्र सिंह, खड़क सिंह, राम सिंह आदि शामिल थे।
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खनन से कमजोर हो रही घरों की नींव
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे खनन से गांव के लोग भी दहशत में हैं। उनके घरों पर खतरा मंडरा रहा है। आवासीय मकानों की नींव कमजोर होते जा रही है। जमीन का मुआवजा भी नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों ने कहा है कि खनन के बदले भूमि का मुआवजा देने, खनन से ध्वस्त हुए खेतों का सुधारीकरण पर पट्टाधारकों ने सहमति पत्र दिया था। उस पर अमल नहीं किया जा रहा है।
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सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचे लोगों ने डीएम को दिए ज्ञापन में कहा है कि उन लोगों ने एक खड़िया खनन पट्टाधारक को वज्यूड़ा गांव में जमीन खनन के लिए दी थी। पट्टाधारक ने लंबे समय से खनन करने के बाद भी उन्हें मुआवजा नहीं दिया है।
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ग्रामीणों ने बताया कि बीच में खनन से भूमि धंसने के कारण उक्त जगह पर खनन का काम बंद कर दिया गया था लेकिन जनवरी से पट्टाधारकों ने बिना खेत मालिकों की अनुमति के फिर से खनन का कार्य शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने भूमि मालिकों की ओर से दिए गए सहमति पत्रों की जांच और खनन करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शन में सोबन सिंह, भूपाल सिंह, हिम्मत सिंह, गोविंद सिंह, जोगा सिंह, कल्याण सिंह, वीरेंद्र सिंह, खड़क सिंह, राम सिंह आदि शामिल थे।
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खनन से कमजोर हो रही घरों की नींव
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे खनन से गांव के लोग भी दहशत में हैं। उनके घरों पर खतरा मंडरा रहा है। आवासीय मकानों की नींव कमजोर होते जा रही है। जमीन का मुआवजा भी नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों ने कहा है कि खनन के बदले भूमि का मुआवजा देने, खनन से ध्वस्त हुए खेतों का सुधारीकरण पर पट्टाधारकों ने सहमति पत्र दिया था। उस पर अमल नहीं किया जा रहा है।