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Bageshwar News: 45 किमी दूर स्कूल पहुंच रहे बच्चे, पर पढ़ाने को नहीं हैं प्रवक्ता

Sat, 21 Feb 2026 12:17 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Sat, 21 Feb 2026 12:17 AM IST
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Children are reaching school 45 km away, but there is no teacher to teach them.
कपकोट (बागेश्वर)। दुर्गम क्षेत्र के बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए राजकीय इंटर कॉलेज बदियाकोट को पीएमश्री योजना में शामिल तो कर लिया गया लेकिन शिक्षकों की कमी ने इस योजना के उद्देश्यों पर सवाल खड़े हो गए हैं। 210 छात्रसंख्या वाले इस विद्यालय में शिक्षा की बुनियाद ही कमजोर नजर आ रही है। इंटरमीडिएट स्तर पर नौ स्वीकृत पदों में से सात प्रवक्ताओं के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं जिससे छात्रों का भविष्य अधर में लटका है।
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राजकीय इंटर कॉलेज बदियाकोट में क्षेत्र के बोरबलड़ा, कुंवारी, तीख, डौला, किलपारा, सोराग, कालों और बदियाकोट गांवों के विद्यार्थी पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। शिक्षा के प्रति बच्चों का जुनून इस कदर है कि वे 5वीं के बाद से ही मीलों का सफर तय कर रहे हैं। बोरबलड़ा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले छात्र सड़क मार्ग से 22 किमी की दूरी नापते हैं जबकि इसी गांव का तोक भराकांडे तो 2 किमी और अधिक दूरी पर स्थित है। इसी तरह कुंवारी से 17 किमी और डौला से 10 किमी का एकतरफा सफर तय करना यहां के बच्चों की नियति बन गई है। दूरस्थ क्षेत्रों में भी घर से 35 से 45 किमी दूर किराये में रहकर बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान बच्चों का दर्द साफ झलका। कक्षा 10वीं और 11वीं के छात्रों ने बताया कि उनकी रुचि विज्ञान वर्ग में थी लेकिन विद्यालय में प्रवक्ताओं की तैनाती न होने के कारण उन्हें मजबूरन दूसरे विषय चुनने पड़ रहे हैं। बच्चों ने मायूसी के साथ कहा, अगर स्कूल में भौतिक, रसायन और जीव विज्ञान के गुरुजी होते तो हम भी डॉक्टर-इंजीनियर बनने का सपना पूरा कर पाते। विद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभारी के सहारे है। प्रधानाचार्य का पद रिक्त होने के कारण इतिहास के प्रवक्ता ही वर्तमान में कमान संभाल रहे हैं। विद्यालय में जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और राजनीति विज्ञान जैसे मुख्य विषयों के प्रवक्ताओं के पद खाली पड़े हैं जिसमें से राजनीति विज्ञान विषय को पढ़ाने के लिए अतिथि शिक्षक की नियुक्ति की गई है। प्रयोगात्मक कार्यों के लिए प्रयोगशाला तो है लेकिन प्रयोगशाला सहायक का पद रिक्त होने से वह भी सफेद हाथी साबित हो रही है।
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