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विकास प्राधिकरण के सवाल से निबटना होगा चुनौती
Updated Tue, 16 Oct 2018 11:39 PM IST
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बागेश्वर। जिला विकास प्राधिकरण निर्माणकर्ताओं के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। प्राधिकरण के पेचीदा नियमों के चलते लोगों के लिए घर बनाना मुश्किल हो रहा है। निकाय चुनाव में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के लिए प्राधिकरण के सवाल से निबटना बड़ी चुनौती होगी।
पिछले एक साल से प्राधिकरण के पेचीदा नियमों के चलते अपना आशियाना बनाना बेहद मुश्किल हो रहा है। खासकर जिला मुख्यालय और आस-पास के गांवों में लोगों को भवन का नक्शा पास करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की चाह में जिले के दूरदराज से लोग मुख्यालय का रुख कर रहे हैं लेकिन कड़े कानून और मोटा शुल्क निर्माण की राह में रोड़ा बना है। इसको लेकर लोगों में नाराजगी है। आसन्न निकाय चुनाव में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के लिए प्राधिकरण के मुद्दे पर बनी नाराजगी से निपटने की चुनौती रहेगी।
इस मुद्दे को लेकर मुखर सवाल संगठन के रमेश पांडेय कृषक कहते हैं कि जिले में विकास प्राधिकरण लागू करने के लिए कांग्रेस और भाजपा जिम्मेदार है। गरीब लोग आधा-एक नाली भूमि में निजी खर्च पर मकान बनाते हैं। इससे भी वंचित करने का कार्य भाजपा, कांग्रेस ने किया है। संगठन स्थानीय हितों के संरक्षण के लिए आवाज उठा रहा है। इसके लिए जनता को लामबंद करने की कोशिश की जा रही है। क्षेत्रवासी ज्वलंत समस्या बने इस मुद्दे को लेकर चुनाव में जाएंगे।
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पिछले एक साल से प्राधिकरण के पेचीदा नियमों के चलते अपना आशियाना बनाना बेहद मुश्किल हो रहा है। खासकर जिला मुख्यालय और आस-पास के गांवों में लोगों को भवन का नक्शा पास करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की चाह में जिले के दूरदराज से लोग मुख्यालय का रुख कर रहे हैं लेकिन कड़े कानून और मोटा शुल्क निर्माण की राह में रोड़ा बना है। इसको लेकर लोगों में नाराजगी है। आसन्न निकाय चुनाव में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के लिए प्राधिकरण के मुद्दे पर बनी नाराजगी से निपटने की चुनौती रहेगी।
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इस मुद्दे को लेकर मुखर सवाल संगठन के रमेश पांडेय कृषक कहते हैं कि जिले में विकास प्राधिकरण लागू करने के लिए कांग्रेस और भाजपा जिम्मेदार है। गरीब लोग आधा-एक नाली भूमि में निजी खर्च पर मकान बनाते हैं। इससे भी वंचित करने का कार्य भाजपा, कांग्रेस ने किया है। संगठन स्थानीय हितों के संरक्षण के लिए आवाज उठा रहा है। इसके लिए जनता को लामबंद करने की कोशिश की जा रही है। क्षेत्रवासी ज्वलंत समस्या बने इस मुद्दे को लेकर चुनाव में जाएंगे।
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