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Bageshwar News: घोषणा के नौ साल बाद भी अधर में खोली स्टेडियम
Sat, 29 Aug 2026 12:42 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sat, 29 Aug 2026 12:42 AM IST
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बागेश्वर। देश आज महान हॉकी जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर राष्ट्रीय खेल दिवस मना रहा है लेकिन जिले के उदीयमान खिलाड़ियों के लिए यह दिन एक कड़वी हकीकत भी सामने लाता है। 15 सितंबर 1997 को अल्मोड़ा से अलग होकर पृथक जिला बने बागेश्वर में 29 साल बीत जाने के बाद भी एक अदद खेल स्टेडियम नसीब नहीं हो सका है। धीरे-धीरे कलेक्ट्रेट, पुलिस लाइन और विकास भवन जैसे प्रशासनिक परिसर तो अस्तित्व में आ गए लेकिन खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर युवा, खिलाड़ी और खेल प्रेमी आज भी मायूस हैं।
जनता और युवाओं के लगातार दबाव के बाद वर्ष 2017 में जिले के दौरे पर आए तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिला मुख्यालय में खेल स्टेडियम निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद जिला मुख्यालय के समीप खोली क्षेत्र में स्टेडियम के लिए जमीन का चयन किया गया।
शुरुआती प्रस्ताव में 200 मीटर का ट्रैक बनाने की योजना थी जिसे बाद में संशोधित कर 400 मीटर ट्रैक करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। बड़े ट्रैक के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता पड़ी लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी अब तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है जिससे स्टेडियम का सपना केवल कागजों में सिमट कर रह गया है।
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डिग्री कॉलेज और नुमाइशखेत पर निर्भर खेल विभाग
जिला बनने के 29 साल और उत्तराखंड राज्य गठन के 26 साल बीतने के बावजूद खेल स्टेडियम का न होना खेल विभाग के लिए भी चुनौती बना हुआ है। जिले में खेल विभाग की अधिकांश गतिविधियां, प्रतियोगिताएं और खिलाड़ियों का अभ्यास पंडित बीडी पांडेय परिसर के मैदान और नुमाइशखेत मैदान पर ही निर्भर है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्थानीय युवा लगातार खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन सुविधाओं के अभाव में उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है। खेल दिवस के अवसर पर जिले के खिलाड़ियों को आज भी यही उम्मीद है कि जल्द भूमि अधिग्रहण का पेंच सुलझेगा और खोली में स्टेडियम का निर्माण धरातल पर उतरेगा।
खेल प्रतिभाओं को तराशना और जिले में आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। खोली में 400 मीटर ट्रैक के खेल स्टेडियम के लिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। शासन और प्रशासन स्तर पर भूमि अधिग्रहण का पेंच जल्द सुलझाकर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा ताकि हमारे खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए भटकना न पड़े। -पार्वती दास, विधायक बागेश्वर
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जनता और युवाओं के लगातार दबाव के बाद वर्ष 2017 में जिले के दौरे पर आए तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिला मुख्यालय में खेल स्टेडियम निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद जिला मुख्यालय के समीप खोली क्षेत्र में स्टेडियम के लिए जमीन का चयन किया गया।
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शुरुआती प्रस्ताव में 200 मीटर का ट्रैक बनाने की योजना थी जिसे बाद में संशोधित कर 400 मीटर ट्रैक करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। बड़े ट्रैक के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता पड़ी लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी अब तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है जिससे स्टेडियम का सपना केवल कागजों में सिमट कर रह गया है।
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डिग्री कॉलेज और नुमाइशखेत पर निर्भर खेल विभाग
जिला बनने के 29 साल और उत्तराखंड राज्य गठन के 26 साल बीतने के बावजूद खेल स्टेडियम का न होना खेल विभाग के लिए भी चुनौती बना हुआ है। जिले में खेल विभाग की अधिकांश गतिविधियां, प्रतियोगिताएं और खिलाड़ियों का अभ्यास पंडित बीडी पांडेय परिसर के मैदान और नुमाइशखेत मैदान पर ही निर्भर है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्थानीय युवा लगातार खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन सुविधाओं के अभाव में उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है। खेल दिवस के अवसर पर जिले के खिलाड़ियों को आज भी यही उम्मीद है कि जल्द भूमि अधिग्रहण का पेंच सुलझेगा और खोली में स्टेडियम का निर्माण धरातल पर उतरेगा।
खेल प्रतिभाओं को तराशना और जिले में आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। खोली में 400 मीटर ट्रैक के खेल स्टेडियम के लिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। शासन और प्रशासन स्तर पर भूमि अधिग्रहण का पेंच जल्द सुलझाकर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा ताकि हमारे खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए भटकना न पड़े। -पार्वती दास, विधायक बागेश्वर